भोरमदेव जंगल सफारी बनी छत्तीसगढ़ के इको-टूरिज्म की नई पहचान

एक माह में 480 से अधिक पर्यटक पहुंचे, स्थानीय युवाओं और महिला समूहों को मिला रोजगार

कवर्धा, 26 जून। भोरमदेव जंगल सफारी संचालन के पहले ही महीने में छत्तीसगढ़ के इको-टूरिज्म का प्रमुख आकर्षण बनकर उभरी है। प्रकृति, रोमांच और स्थानीय रोजगार का सफल संगम बनी इस पहल से एक माह में 480 से अधिक पर्यटकों ने सफारी का आनंद लिया, जबकि स्थानीय युवाओं, वन प्रबंधन समिति और स्व-सहायता समूहों को लगभग 2.75 लाख रुपये से अधिक की आय प्राप्त हुई।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा तथा वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में शुरू की गई इस जंगल सफारी का शुभारंभ 3 मई 2026 को हुआ था और 4 मई से पर्यटकों के लिए इसे खोला गया। मानसून के कारण 4 जून से इसका संचालन अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया है, जिसे नवंबर से पुनः शुरू किया जाएगा।
वन मंडलाधिकारी निखिल अग्रवाल के अनुसार, एक माह के दौरान सफारी से प्राप्त आय का लाभ स्थानीय समुदायों तक भी पहुंचा। वाहन चालक, गाइड और गेटकीपर के रूप में कार्यरत 17 स्थानीय युवाओं ने 75 हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित की। वहीं वन प्रबंधन समिति को 92 हजार रुपये और वन विभाग को 26 हजार रुपये से अधिक की आय हुई। सफारी परिसर में स्व-सहायता समूह द्वारा संचालित कैंटीन से भी 20 हजार रुपये से अधिक का लाभ मिला, जिससे समूह की महिलाओं की आय में वृद्धि हुई।
जंगल सफारी के साथ भोरमदेव का प्राकृतिक उद्यान भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। सफारी के अलावा 1,500 से अधिक पर्यटकों ने उद्यान का भी भ्रमण किया, जिससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिली है।
करीब 36 किलोमीटर लंबी सफारी के दौरान पर्यटकों को भारतीय गौर, भालू, नीलगाय, सांभर, कोटरी (बार्किंग डियर), बाघ के पदचिह्न, जंगली मुर्गा, विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों और रंग-बिरंगी तितलियों को देखने का अवसर मिला। घने जंगलों, पहाड़ियों और प्राकृतिक वातावरण ने पर्यटकों को रोमांचक अनुभव प्रदान किया।
वन विभाग के अनुसार लगभग 352 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले भोरमदेव अभयारण्य में विकसित यह जंगल सफारी छत्तीसगढ़ की जैव विविधता, वन्यजीवों और प्राकृतिक सौंदर्य को करीब से देखने का अवसर उपलब्ध करा रही है। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं और महिला समूहों के लिए रोजगार एवं आय के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

