बोनी के सीजन में महंगे डीजल और खाद की किल्लत से अन्नदाता परेशान : रणजीत सिंह चंदेल

प्रदेश किसान कांग्रेस उपाध्यक्ष चंदेल ने उठाई आवाज: वैश्विक बाजार में कच्चा तेल ₹5,800 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर, फिर भी छत्तीसगढ़ के किसानों से ₹95 में वसूला जा रहा डीजल; तत्काल दाम घटाने की मांग
गंडई/खैरागढ़: वर्तमान में प्रदेश में खरीफ फसल की बोनी और खेती-किसानी का कार्य पूरे शबाब पर है। इस महत्वपूर्ण समय में जब किसानों को ट्रैक्टर चलाने और कृषि कार्यों के लिए डीजल की सबसे ज्यादा जरूरत है, तब महंगे डीजल और कृषि आदानों की बढ़ती लागत ने अन्नदाता की कमर तोड़ दी है। इस गंभीर जनसमस्या को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश किसान कांग्रेस के उपाध्यक्ष रणजीत सिंह चंदेल ने भारतीय जनता पार्टी की ‘डबल इंजन’ सरकार के खिलाफ तीखा मोर्चा खोलते हुए इसे खुली लूट और किसान विरोधी नीति करार दिया है।
किसान नेता रणजीत सिंह चंदेल ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि आज वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें भारी गिरावट के साथ 70 से 73 डॉलर (भारतीय मुद्रा में लगभग ₹5,800 से ₹6,100) प्रति बैरल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ चुकी हैं। यह कीमत पश्चिम एशिया संकट के शुरू होने से भी बेहद कम है। नियमानुसार जब कच्चा तेल इतना सस्ता हो चुका है, तो घरेलू बाजार में डीजल और पेट्रोल के दामों में तत्काल ₹12 से ₹15 प्रति लीटर की कटौती होनी चाहिए थी। लेकिन केंद्र की भाजपा सरकार और तेल कंपनियां मिलकर भारी मुनाफाखोरी कर रही हैं, जिसका सीधा नुकसान देश और प्रदेश के गरीब किसानों को उठाना पड़ रहा है।
रणजीत सिंह चंदेल का कड़ा प्रहार: > “एक तरफ जहां बोनी के इस नाजुक समय में किसान को ट्रैक्टर चलाने के लिए ₹95-100 से अधिक प्रति लीटर की दर से महंगा डीजल खरीदना पड़ रहा है, जिससे कृषि कार्य में भारी लागत आ रही है; वहीं दूसरी तरफ सहकारी सोसायटियों और बाजारों में खाद की भयंकर समस्या बनी हुई है। जो खाद मिल भी रही है, वह अत्यधिक ऊंचे दामों और अधिक रेट पर मिल रही है। इस दोहरी मार से छत्तीसगढ़ का किसान आज बुरी तरह त्रस्त और परेशान है। भाजपा की डबल इंजन सरकार केवल बड़े कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने में व्यस्त है और अन्नदाता को बेसहारा छोड़ दिया गया है।”
श्री चंदेल ने आगे कहा कि आज के आधुनिक दौर में खेती-किसानी में ट्रैक्टर की उपयोगिता अनिवार्य हो चुकी है। बोनी, जुताई और खेतों को तैयार करने के कार्यों में रोजाना सैकड़ों लीटर डीजल की खपत होती है। डीजल के दाम आसमान पर होने के कारण खेती की कुल लागत में अप्रत्याशित वृद्धि हो गई है, जिससे खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है।
उन्होंने कहा कि अगर कच्चे तेल का रेट कम हुआ है, तो उसका सीधा फायदा किसानों को मिलना चाहिए और डीजल-पेट्रोल के दाम तुरंत कम होने चाहिए। यदि भाजपा सरकार ने अपनी यह मुनाफाखोरी बंद नहीं की, तो उन्होंने चेतावनी दी है कि जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें गिरी हैं, तो इसका सीधा लाभ हमारे अन्नदाताओं को मिलना ही चाहिए और डीजल-पेट्रोल के दामों में तत्काल प्रभाव से कटौती की जानी चाहिए। यदि भाजपा सरकार ने अपनी इस मुनाफाखोरी और जनविरोधी नीतियों पर अंकुश नहीं लगाया, तो किसान कांग्रेस पूरे प्रदेश के किसानों को एकजुट कर सरकार की इस हठधर्मिता के खिलाफ एक व्यापक जन-आंदोलन का बिगुल फूंकेगी और गांवों से लेकर राजधानी तक हर स्तर पर पुरजोर विरोध दर्ज कराएगी।




