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गौण खनिज आबंटन में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ शासन का बड़ा फैसला

सुकमा- रेत खदानों का अब ई-नीलामी से होगा आबंटन

17 जून से शुरू होंगे ऑनलाइन आवेदन

शबरी नदी स्थित 4.00 हेक्टेयर क्षेत्र की खदान के लिए MSTC पोर्टल पर होगी पूरी प्रक्रिया

रायपुर, 15 जून 2026/ छत्तीसगढ़ शासन द्वारा गौण खनिज साधारण रेत खदानों के आबंटन में पारदर्शिता, निष्पक्षता और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इसके तहत सुकमा जिले की साधारण रेत खदान का आबंटन अब ई-नीलामी (ऑनलाइन रिवर्स ऑक्शन) प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। इस नई व्यवस्था से जहां खनिज संसाधनों के आबंटन में जवाबदेही तय होगी, वहीं राज्य के राजस्व संग्रहण में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

शबरी नदी की खदान के लिए लगेगी बोली

जिला प्रशासन सुकमा से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, नगर पंचायत कोंटा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली इस खदान में नगर पंचायत कोंटा क्षेत्र (शबरी नदी), खसरा क्रमांक 374 कुल रकबा- 4.00 हेक्टेयर साधारण रेत खदान का उत्खनन पट्टा आबंटन किया जाएगा।

पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल- MSTC पोर्टल का होगा उपयोग रेत खदान के आबंटन की यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल होगी। निविदा जारी करने से लेकर बोलीदाताओं का पंजीयन, तकनीकी पात्रता परीक्षण तथा लॉटरी प्रक्रिया सहित सभी महत्वपूर्ण चरण एमएसटीसी (MSTC) पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन ही संपन्न किए जाएंगे।

महत्वपूर्ण तिथियां और समय

इच्छुक बोलीदाताओं और आवेदकों के लिए जिला प्रशासन द्वारा समय-सारणी जारी कर दी गई है। ऑनलाइन आवेदन प्रारंभ होने की तिथि 17 जून 2026, आवेदन की अंतिम तिथि 23 जून 2026 (शाम 5.30 बजे तक), निविदाएं खोलने की तिथि 24 जून 2026 (प्रातः 11 बजे से) स्थान कलेक्ट्रेट सभाकक्ष, सुकमा में निर्धारित की गई है।

विस्तृत जानकारी और शर्तें कहाँ देखें

जिला प्रशासन ने इच्छुक आवेदकों से निर्धारित समयावधि में आवेदन करने का आग्रह किया है। निविदा की विस्तृत शर्तें एवं दिशा-निर्देश https://chhattisgarhmines.gov.in⁠/ तथा https://sukma.gov.in⁠/ पर उपलब्ध हैं। इसके अलावा कलेक्टर कार्यालय (खनिज शाखा), संबंधित ग्राम पंचायत, नगर पालिका, जनपद पंचायत एवं जिला पंचायत कार्यालयों के सूचना पटल पर भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। ई-नीलामी व्यवस्था से खनिज संसाधनों के आबंटन में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी तथा राजस्व संग्रहण में भी वृद्धि होगी।

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