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“जनमन नहीं, जनपीड़ा की कहानी: बैगा आदिवासी गंदा पानी पीने को मजबूर – तुकाराम चंद्रवंशी”

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“कागजों में विकास, हकीकत में गंदा पानी; बैगा आदिवासियों के साथ अन्याय बंद हो – तुकाराम चंद्रवंशी”

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केशमर्दा में लाल पानी पीने को मजबूर बैगा आदिवासी, भाजपा सरकार के दावे खोखले – तुकाराम चंद्रवंशी

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कवर्धा। युवा कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष तुकाराम चंद्रवंशी ने ग्रामीणों की शिकायत पर कवर्धा विधानसभा के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र स्थित बैगा बाहुल्य ग्राम केशमर्दा का दौरा किया। गांव में व्याप्त भीषण पेयजल संकट एवं बोरिंग, झिरिया तथा कुओं से निकल रहे लाल एवं गंदे पानी की स्थिति देखकर उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त की और भाजपा सरकार एवं जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।

श्री चंद्रवंशी ने कहा कि मुख्यमंत्री, गृहमंत्री विजय शर्मा, जिला प्रशासन एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारी बताएं कि क्या वे स्वयं इस पानी का एक घूंट पी सकते हैं? जिस पानी को देखकर कोई भी व्यक्ति पीने से इंकार कर दे, उसी पानी को बैगा आदिवासी परिवार वर्षों से मजबूरी में पी रहे हैं। यह स्थिति केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि आदिवासी समुदाय के प्रति गंभीर संवेदनहीनता का उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि ग्रामवासियों ने शुद्ध पेयजल की मांग को लेकर कई बार आवेदन और शिकायतें कीं, यहां तक कि सुशासन तिहार में भी अपनी समस्याएं रखीं, लेकिन उन्हें समाधान के स्थान पर केवल आश्वासन मिला। सरकार आदिवासी विकास, सुशासन और जनकल्याण के बड़े-बड़े दावे करती है, जबकि धरातल पर केशमर्दा के बैगा परिवार आज भी स्वच्छ पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं।

तुकाराम चंद्रवंशी ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकार की अनेक योजनाएं कागजों तक सीमित हैं। बोड़ला को आकांक्षी ब्लॉक घोषित करने के बावजूद यहां की जन आकांक्षाएं फाइलों में दबकर रह गई हैं। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई तो यह आदिवासी परिवारों के स्वास्थ्य और जीवन के साथ गंभीर खिलवाड़ होगा।

उन्होंने प्रश्न उठाया कि आखिर बैगा आदिवासियों और उनके बच्चों के जीवन की कीमत क्या है? कब तक ग्रामीण आवेदन और निवेदन करते रहेंगे और कब तक प्रशासन आंखें मूंदे बैठा रहेगा?

श्री चंद्रवंशी ने बताया कि उन्होंने ग्राम की वास्तविक स्थिति का वीडियो जारी कर शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने तथा बैगा आदिवासी समाज की पीड़ा को जनता तक पहुंचाने का प्रयास किया है। उन्होंने मांग की कि केशमर्दा सहित आसपास के प्रभावित गांवों में तत्काल स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

उन्होंने कहा कि अब ग्रामीणों को वादे और घोषणाएं नहीं, बल्कि जीने के लिए साफ पानी चाहिए। जब तक बैगा आदिवासी परिवारों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं कराया जाता, तब तक यह आवाज उठती रहेगी।

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