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सहकारिता विभाग में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का खुला खेल – कांग्रेस

850 बैंक कर्मचारियों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही भाजपा सरकार – तिवारी

रायपुर/25 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस वरिष्ठ प्रवक्ता घनश्याम राजू तिवारी ने प्रदेश की भाजपा सरकार और सहकारिता विभाग पर भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और तानाशाही का गंभीर आरोप लगाते हुये कहा कि विभाग के मंत्री, सचिव और पंजीयक की तिकड़ी ने सहकारिता के मूल सिद्धांतों की हत्या कर दी है। जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक रायपुर के लगभग 850 कर्मचारियों के वैध वार्षिक वेतन वृद्धि को रोकना भ्रष्टाचार का खुला उदाहरण है।

कांग्रेस वरिष्ठ प्रवक्ता तिवारी ने आरोप लगाते हुये कहा कि, प्रदेश सहकारिता मंत्री केदार कश्यप के भाई दिनेश कश्यप जगदलपुर जिला सहकारी बैंक के (प्राधिकृत) अध्यक्ष है, उन्होने कथित चंदा उगाही कर कर्मचारियों के 6 वर्षों के रुके हुए वेतन को पंजीयक के मार्गदर्शन में आनन-फानन में बहाल कर दिया है। वहीं, रायपुर के 850 कर्मचारियों के मामले में विभाग जानबूझकर अड़ंगे लगा रहा है। क्या नियम केवल चंदा देने वालों के लिए बदले जाते हैं?

कांग्रेस वरिष्ठ प्रवक्ता तिवारी ने रायपुर के कर्मचारी जब माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर से अपना हक जीत गए, तो उनके विरुद्ध माननीय उच्चतम न्यायालय (दिल्ली) में याचिका दायर करना शासकीय धन और समय की बर्बादी है। यह कर्मचारियों के परिवारों के विरुद्ध एक व्यक्तिगत लड़ाई है, जिसे जनता के पैसे से लड़ा जा रहा है।

कांग्रेस वरिष्ठ प्रवक्ता तिवारी ने रायपुर सीईओ अपेक्षा व्यास और तत्कालीन संयुक्त पंजीयक टावरी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि, अधिकारी खुद को विधानसभा और शासन से ऊपर समझ रहे हैं। फाइलों पर मनमाने आदेश टाइप करवाकर दलालों के जरिए हस्ताक्षर करवाने का खेल चल रहा है।

कांग्रेस वरिष्ठ प्रवक्ता तिवारी ने तंज कसते हुए कहा कि, ऐसा प्रतीत होता है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री का प्रशासन पर कोई नियंत्रण नहीं है, तभी तो अधिकारी और मंत्री अपनी मनमर्जी चला रहे हैं।

कांग्रेस वरिष्ठ प्रवक्ता घनश्याम राजू तिवारी ने कहा कि, इस विषय पर केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह इस गंभीर भ्रष्टाचार और नियमों के उल्लंघन पर तत्काल संज्ञान लें। दोषी अधिकारी पंजीयक और सीईओ पर शासन और कर्मचारियों को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई हेतु कठोर कार्यवाही की जाए एवं सुप्रीम कोर्ट से जन विरोधी याचिका वापस लेकर 850 कर्मचारियों के 6 वर्षों का बकाया वेतन तत्काल जारी किया जाए।

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