वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने बोड़ला नगर पंचायत में किया पौनी पसारी और सर्व समाज के मांगलिक भवन का भूमिपूजन

वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने बोड़ला नगर पंचायत में किया पौनी पसारी और सर्व समाज के मांगलिक भवन का भूमिपूजन : पौनी पसारी से जुडेंगे स्थानीय परंपरागत व्यवसाय

बोड़ला । वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री मोहम्मद अकबर आज अपने एक दिवसीय कबीरधाम प्रवास के दौरान बोड़ला नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 7 में दुर्गा मंच के पास सर्व समाज मांगलिक भवन लागत 73 लाख 44 हजार रूपए तथा वार्ड क्रमांक 5 के पौनी पसारी लागत 25 लाख 53 हजार रूपए का भूमिपूजन किया। इस दौरान मंत्री अकबर ने योजना के क्रियान्वयन के लिए विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए और जल्द निर्माण कार्य प्रारंभ कर लोगों को योजनाओं का लाभ दिलाने कहा। इस अवसर पर क्रेेडा अध्यक्ष कन्हैया अग्रवाल, निलंकठ चन्द्रवंशी कलीम खान, नगर पंचायत अध्यक्ष सावित्री साहू, पिताम्बर वर्मा , गोरेलाल चंद्रवंशी, शमसाद बेगम सहित बोड़ला और क्षेत्र के अन्य गणमान्य नागरिक एवं जनप्रतिनिधि विशेष रूप से उपस्थित थे।
भूमिपूजन के अवसर पर मंत्री अकबर ने बताया कि बढ़ते हुए शहरीकरण तथा मशीनों के अंधाधुंध उपयोग के कारण पौनी पसारी से संबंधित अधिकांश व्यवसाय शहरो में लुप्त होते जा रहे है। उन्होनें बताया कि परंपरागत व्यवसायों तथा छत्तीसगढ़ की स्थानीय संस्कृति एवं परंपराओं को जीवन्त करने एवं इससे स्थानीय समाज तथा बेरोजगारों के लिए व्यवसाय के अवसरों का सृजन करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य प्रवर्तित पौनी पसारी योजना, नवीन परिवेश में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा प्रारंभ की गई है।
साप्ताहिक बाजार एवं पौनी पसारी स्थानीय छत्तीसगढ़ी संस्कृति का अभिन्न अंग है साप्ताहिक बाजारों के माध्यम से जहां एक ओर स्थानीय जनता अपने जीवन यापन के लिए आवश्यक सामान की खरीदी करते थे, वही पौनी पसारी के माध्यम से स्थानीय जन समुदाय की आवश्यकताओं तथा सेवाओं की पूर्ति भी सुनिश्चित की जाती थी जिसमें स्थानीय परंपरागत व्यवसायों जैसे लोहे से संबंधित कार्यो, मिट्टी के बर्तन, कपडे धुलाई, जुते चप्पल तैयार करना, लकड़ी से संबंधित कार्य, पशुओं के लिए चारा सब्जी भाजी उत्पादन, कपडो की बुनाई, सिलाई, कंबल, मूर्तियां बनाना, फूलो का व्यवसाय, पूजन सामाग्री, बांस का टोकना, सूपा, केशकर्तन, दोनो पत्तल, चटाई तैयार करना तथा आभूषण एवं सौंदर्य सामाग्री आदि का व्यवसाय ‘‘पौनी पसारी‘‘ व्यवसाय के रूप में जाना जाता रहा है। जिसमें परिवार के के मुखिया के साथ-साथ अन्य सदस्यों को भी रोजगार प्राप्त होता था।
