कवर्धा:- चुनावी गलियारों में गर्मियों के मौसम में मौसम तो नहीं लेकिन राजनितिक चर्चो का बाजार जमकर गर्म नजर आ रहा है।

राजनांदगाव लोकसभा प्रत्याशी क्या दोबारा जीत पाएंगे सांसद चुनाव, जनमानस में चर्चे,आम, निष्क्रियता कही मोदी मैजिक पर फेर ना दें पानी।

कवर्धा:- इन दिनों चुनावी गलियारों में गर्मियों के मौसम में मौसम तो नहीं लेकिन राजनितिक चर्चो का बाजार जमकर गर्म नजर आ रहा है,छत्तीसगढ़ प्रदेश की सबसे हाई प्रोफ़ाइल सीट राजनांदगाव लोकसभा का बन चुका है इस लोकसभा सीट के लिए जमकर दोनों बड़ी पार्टियां प्रचार करते नजर आये है, वही आज प्रचार प्रसार थम गया है,हर तरफ कवर्धा विधानसभा की जनता से लेकर राजनांदगांव, खैरागढ़ विधानसभा की जनता के बीच में सबसे ज्यादा यही चर्चे है की भाजपा के तरफ से प्रत्याशी इस बार बदलना था, लोगों के बीच में 5 सालों तक नदारद रहने से कई तो जानते ही नहीं देखे ही नहीं की सांसद कौन था,दुर्भाग्य की कवर्धा के लोकल सासंद होने के बावजूद आज भी कई जिलेवासी अंजान है वही विकास की बात करे तो कुछ खास उपलब्धि नहीं जिससे जनता प्रभावित हो सके, आमजनों के बीच बस यही चर्चे आम है की मोदी जी ही का चेहरा अब जीत दिला सकती है, लोकसभा के निष्क्रिय सांसद संतोष पांडे जी की राह आसान नहीं दिखाई दें रही हैं जनमानस में चर्चे आम है की इस बार सांसद चुनाव दिलचस्प रहेगा, गौरतलब है कि कवर्धा क्षेत्र के लोकल होने के बावजूद भी आम जनों में उतनी अच्छी पकड़ नहीं बना पाए हैं और कोई भी विशेष उपलब्धि सांसद महोदय की दिखाई नहीं देती है रेल लाइन की परियोजना हरी झंडी मिलने के बाद भी जमीनी स्तर पर लाने में सक्रिय नहीं हो पाए सांसद महोदय बहुत चर्चित कवर्धा मेडिकल कॉलेज की शुरुआत अभी तक के सांसद महोदय नहीं करा पाए है सूत्रों से पता चला है कि कुछ समाज विशेष संतोष पांडे जी को टिकट देने से लेकर अब तक काफी नाराज चल रहे हैं, गुटबाजी भी देखने कों मिल रही है उन्हें व्यापक जन समर्थन नहीं मिल पर रहा है, अब आगे देखना होगा की जनता मोदी के चेहरे पर मोहर लगाएंगे की या वर्तमान सांसद अपनी छवि से चुनाव जीत पाना आसान करेंगे।

वनांचल क्षेत्र में सांसद के नाम के साथ साथ सांसद महोदय का पहचान भी नही कर सकते क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र में जमीनी स्तर में पकड़ नही बना पाया है।भले ही उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रचार प्रसार के कारण वनांचल क्षेत्र में गर्माहट दिखाई दे रहा है। आमजनों के मन में कई सवाल है. इस बार सांसद चुनाव काफ़ी रोचक है।