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बोड़ला जनपद में 23 सदस्यों ने अध्यक्ष -उपाध्यक्ष के खिलाफ किया अविश्वास प्रस्ताव के लिए आवेदन

कवर्धा – कबीरधाम जिले के सबसे बड़े और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बोड़ला जनपद पंचायत में बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। जनपद अध्यक्ष बालका रामकिंकर वर्मा और उपाध्यक्ष नंद श्रीवास के खिलाफ 25 में से 23 जनपद सदस्यों ने कलेक्टर को अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए आवेदन सौंप दिया है। इस आवेदन में दोनों पदाधिकारियों पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिससे जिले की राजनीति गरमा गई है।आवेदन में लगाए गए ये प्रमुख आरोप जनपद सदस्यों द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार—अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पर जनपद सदस्यों के साथ असंतोषजनक व्यवहार और मनमानी करने का आरोप लगाया गया है। बैठक के दौरान अधिकारियों से सवाल पूछने पर दबाव बनाने और स्वयं जवाब देने की बात भी आवेदन में कही गई है। आरोप है कि प्रस्ताव रजिस्टर में पहले हस्ताक्षर कराए जाते हैं और बाद में जानकारी के बिना अपनी मर्जी से प्रस्ताव जोड़े जाते हैं। इसके अलावा जनपद की राशि के खर्च में समानता न रखते हुए विशेष क्षेत्रों में कमीशन के आधार पर कार्य कराने का भी गंभीर आरोप लगाया गया है। इन आरोपों ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है, क्योंकि यह सीधे तौर पर कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हैं। अपने ही दल में खुली बगावत बोड़ला जनपद पंचायत में अधिकांश सदस्य भाजपा समर्थित माने जाते हैं। ऐसे में अपने ही दल के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के खिलाफ इतनी बड़ी संख्या में सदस्यों का एकजुट होना, संगठन के अंदर गहरी नाराजगी और असंतोष को दर्शाता है। सूत्रों का कहना है कि यह असंतोष पिछले कई महीनों से पनप रहा था, लेकिन लगातार अनदेखी के कारण अब यह खुलकर सामने आ गया है। जनप्रतिनिधियों का मानना है कि उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही। डिप्टी सीएम की साख पर असर इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की राजनीतिक साख को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर उनके विधानसभा क्षेत्र में। जहां प्रदेश स्तर पर उनकी छवि मजबूत मानी जाती है, वहीं उनके ही क्षेत्र में इस तरह की अंदरूनी बगावत को राजनीतिक रूप से बड़ा संकेत माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि जिस भरोसे और मेहनत के साथ कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने पार्टी को मजबूत किया, उस पर अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। यही वजह है कि अब असंतोष खुलकर सामने आ रहा है।चुनाव से पहले बढ़ी चुनौती बोड़ला जनपद, जिले का सबसे बड़ा ब्लॉक होने के कारण राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है। यहां की हलचल का असर पूरे विधानसभा क्षेत्र पर पड़ता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते इस स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया, तो इसका असर आने वाले विधानसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है। आगे की रणनीति पर नजर अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि पार्टी नेतृत्व और खासकर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा इस स्थिति को कैसे संभालते हैं। क्या संगठन स्तर पर संवाद कर नाराजगी दूर की जाएगी या यह विवाद और गहराएगा—यह आने वाले दिनों में साफ होगा।फिलहाल, बोड़ला जनपद पंचायत का यह मामला केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है। यह घटनाक्रम साफ संकेत दे रहा है कि जमीनी स्तर पर बढ़ती नाराजगी को नजरअंदाज करना किसी भी राजनीतिक दल के लिए भारी पड़ सकता है।

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