मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में कैबिनेट के अहम फैसले, किसानों से लेकर परिवहन और ऊर्जा क्षेत्र को मिलेगा लाभ
रायपुर, 09 जून 2026। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इन फैसलों का सीधा लाभ किसानों, आम नागरिकों, सार्वजनिक परिवहन, ऊर्जा एवं खनन क्षेत्र को मिलेगा।
प्रमुख निर्णय
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड को आईपीओ के माध्यम से स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करने को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई। इससे आम निवेशकों को कंपनी की विकास यात्रा में भागीदारी का अवसर मिलेगा।
खरीफ-2026 से कृषक उन्नति योजना के नए स्वरूप को मंजूरी दी गई है। धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी तथा कपास जैसी वैकल्पिक फसलें लेने वाले किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की आदान सहायता प्रदान की जाएगी।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत वर्ष 2026-27 में चना वितरण की निरंतरता बनाए रखने के लिए राज्य नागरिक आपूर्ति निगम को NeML के ई-ऑक्शन प्लेटफॉर्म से चना खरीदी की अनुमति दी गई है।
योग विषय को समाज कल्याण विभाग से हटाकर चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन करने का निर्णय लिया गया है, जिससे योग शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान गतिविधियों का बेहतर संचालन सुनिश्चित होगा।
प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के अंतर्गत पेमेंट सिक्योरिटी मैकेनिज्म (PSM) के लिए डायरेक्ट डेबिट मैंडेट (DDM) की सहमति केंद्र सरकार को भेजने की अनुमति दी गई है। इससे रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर और कोरबा में 240 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का रास्ता साफ हो गया है।
नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण को भूमि क्रय पर स्टाम्प ड्यूटी में दी जा रही छूट की अवधि 31 मार्च 2028 तक बढ़ा दी गई है, जिससे आधारभूत संरचना के विकास को गति मिलेगी।
छत्तीसगढ़ खनिज (खनन, परिवहन एवं भंडारण) नियम, 2009 में संशोधन को मंजूरी दी गई है। अब खनिज परिवहन करने वाले वाहनों में आरएफआईडी टैग और वाहन ट्रैकिंग प्रणाली अनिवार्य होगी तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से खनिजों की मात्रा और गुणवत्ता का आकलन किया जाएगा। इससे अवैध खनन एवं परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के साथ राजस्व में वृद्धि होने की उम्मीद है।
इन निर्णयों से कृषि क्षेत्र में फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा, सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक स्वरूप मिलेगा, ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा तथा खनिज संसाधनों के प्रबंधन में पारदर्शिता और नियंत्रण को मजबूती मिलेगी।


