बून्द बून्द पानी सहजने हो रहा सामुहिक प्रयास

नवा तरिया, कन्टूर ट्रेंच, रिचार्ज पिट सार्वजनिक डबरी, आजीविका डबरी,चेक डैम, तालाबों का गहरीकरण,अमृत सरोवर एवं वृक्षारोपण जैसे कार्यो से हो रहा प्रयास
जन भागीदारी से घर के पास, आंगनों, खेतों एवं अन्य उपयुक्त स्थानो में सोकपिट निर्माण के लिए किया जा रहा आह्वान
कबीरधाम-जिले के मैदानी क्षेत्र से लेकर वनांचल क्षेत्रो तक एवं शहरी क्षेत्रो से लेकर गांव तक इस वर्षा ऋतु में जनभागीदारी द्वारा बूंद-बूंद पानी बचाने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहे हैं। जल संचय जन भागीदारी से अभी तक अलग-अलग कैटेगरी में 125000 से अधिक कार्य होने जा रहे हैं जिससे जल संरक्षण करते हुए भू-जल स्तर में वृद्धि किया जा सके। पानी रोकने के लिए सबसे ज्यादा प्रयास जन भागीदारी के रूप में हो रहा है। जिसमें विशेष कर घरों एवं खेतों में सोकपिट का निर्माण ग्रामीणों द्वारा किया गया है,साथ ही स्कूल, आंगनबाड़ी भवनो,पंचायत भवन एवं हैंडपंप के पास जैसे अनेक स्थानों को मिलाकर अभी तक 102000 से अधिक सोकपिट का निर्माण जन भागीदारी से किया जा चुका है।जल संचय जन भागीदारी से पानी को रोकने के लिए सोकपिट का निर्माण करने गांव-गांव अभियान चलाया जा रहा है। इसमे ग्रामीण और विशेषकर महिलाएं स्वय से इस अभियान में जुड़कर लोगों को प्रोत्साहित कर रही है।
समूह की दीदियों द्वारा पांच प्रतिशत मॉडल अंतर्गत सोकपिट का निर्माण कर जल संरक्षण के लिए कर रही प्रेरित
5 प्रतिशत मॉडल के रूप में स्व सहायता समूह की दीदियों द्वारा अपने घरों एवं खेतों में सोकपिट का निर्माण किया जा रहा है। इस अभियान द्वारा अभी तक 25000 से अधिक सोकपिट का निर्माण हो चुका है। यह कार्य स्व प्रेरणा एवं जन भागीदारी से हो रहा है तथा ग्रामीण महिलाएं 221 फीट का सोकपिट उपयुक्त स्थानो पर अपने परिवार के साथ श्रमदान करते हुए बना रही है।
जल संरक्षण के साथ आजीविका के लिए महात्मा गांधी नरेगा योजना से हो रहे प्रयासों पर एक नजर……!
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत ग्रामीणों को रोजगार के साथ जल संरक्षण और उसे आजीविका संवर्धन की गतिविधियों को जोड़ने के लिए नवा तरिया आय के जरिया अंतर्गत 24 स्थान में बड़े पैमाने पर तालाबों का निर्माण कराया जा रहा है। इसमें अनुमानित 1.6 लाख मानव दिवस रोजगार का सीजन होगा। तरिया का आनुमानित आकार 80803 मीटर है जिसमे जल संरक्षण और आजीविका की गतिविधियां होगी।साथ ही 112 अलग-अलग ग्राम पंचायतो में अमृत सरोवर का निर्माण किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त दो पहाड़ी क्षेत्रो में 4975 कन्टूर ट्रेंच का निर्माण किया गया है। 292 आजीविका डाबरी के निर्माण से एक ओर जहा हितग्राहियों को रोजगार का अवसर मिलेगा तो वहीं दूसरी ओर मत्स्य पालन जैसे आजीविका के नए रास्ते भी खुले है। 652 रिचार्ज पिट, 435 तालाब गहरीकरण, 515 कच्ची नाली निर्माण, 121 नाला पुनरुद्धार, 150 चेक डैम, 75 सार्वजनिक डबरी एवं 85 वृक्षारोपण के कार्य हुए हैं।
पानी रोकने हो रहा सामूहिक प्रयास: कलेक्टर गोपाल वर्मा
वर्षा जल को रोकना,जल संरक्षण करना और इसके साथ आजीविका की गतिविधियों को बढ़ावा देना हमारा मुख्य लक्ष्य है। लेकिन यह तभी संभव है जब समाज के सभी वर्ग एक साथ मिलकर जल संरक्षण करने की दिशा में आगे बढ़े। जन भागीदारी एवं योजनाओं के द्वारा इस महत्वपूर्ण कार्य को पूरा करने के लिए योजना बनाई गई है। कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने आगे बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण एवं प्रधानमंत्री जनमन अंतर्गत बनाए गए सभी आवासो के पास जहां पर घरो का पानी बहता हो वहा सोकपिट बनाया जा रहा है।हमारा लक्ष्य है कि जिले में अभी तक 80100 से अधिक पूर्ण हुए प्रधानमंत्री आवास और 5300 से अधिक जनमन आवास में सोख्ता गद्दा का निर्माण कराया जाए और इसके लिए सभी हितग्राहियों को लगातार प्रोत्साहित कर रहे हैं। मैं सभी से अपील करता हूं कि आप सभी जिला प्रशासन के इस मुहिम में शामिल होकर जल संरक्षण करने में अपना योगदान जरूर दें।
गिरता भ-जल स्तर चिंता का विषय,सामूहिक प्रयास से मिलेंगे सुखद नतीजे: सीईओ अभिषेक अग्रवाल
सीईओ जिला पंचायत श्री अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि कबीरधाम जिला वृष्टि छाया क्षेत्र अंतर्गत आता है। इस कारण यहां कभी-कभी वर्षा ऋतु में असमानताएं देखने को मिलती है। यदि हम जल संरक्षण नहीं करते हैं तो भू-जल स्तर और भी नीचे चला जाएगा जिससे भविष्य में पानी की गंभीर समस्या उत्पन्न होगी। वर्तमान में किया गया भू-जल संरक्षण भविष्य में भू-जल स्तर को बनाए रखने में बहुत मदद करेगा। इसी क्रम में नवा तरिया आय के जरिया, घर के आंगनों एवं खेतों में सोकपिट निर्माण,रिचार्ज पिट,अमृत सरोवर,तालाब गहरीकरण, सार्वजनिक डबरी, चेक डैम निर्माण,आजीविका डबरी और वृक्षारोपण जैसे कार्यों के द्वारा वर्षा जल को रोकने प्रयास किया जा रहे हैं।राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान अंतर्गत महिला स्व सहायता समूह की दीदियों द्वारा अपने घरों एवं खेतों में 5% मॉडल के तहत सोख्ता गड्ढा बना रही है और अब तक हजारों की संख्या में यहा बन चुके हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत जल संरक्षण के लिए अनेकों संरचनाओं का निर्माण हो रहा है। इन संरचनाओं से आजीविका के कार्य को बढ़ावा मिलेगा, भू-जल स्तर में वृद्धि करने सहायता मिलेगा तथा यह कार्य रोजगार का पर्याय भी है। आइये आप और हम सब मिलकर इस बार वर्षा जल को रोकने के लिए अपना योगदान दे और अपने कबीरधाम को हरा भरा बनाने में मदद करें।



