G-QKE15KJ9P0 25777229988609873
ChhattisgarhGaurela-Pendra-MarwahiINDIA

सोन नदी उद्गम में हुआ शिक्षा और संस्कार का समागम

सोन नदी उद्गम में हुआ शिक्षा और संस्कार का समागम

एकल विद्यालय संच द्वारा नव दिवसीय आचार्य आवासीय प्रशिक्षण शिविर का समापन

गौरेला–पेंड्रा–मरवाही |
सोन नदी उद्गम क्षेत्र सोन बचरवार में एकल विद्यालय संच के तत्वावधान में आयोजित नव दिवसीय आचार्य आवासीय प्रशिक्षण शिविर का समापन गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। समापन दिवस पर बौद्धिक सत्र एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विश्व हिंदू परिषद के जिला धर्म प्रसार प्रमुख माननीय बृजेश पुरी उपस्थित रहे। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि एकल विद्यालय द्वारा संचालित योजनाओं के माध्यम से नगरों एवं ग्रामों में शिक्षा से वंचित बच्चों को शिक्षा प्रदान कर एक पुनीत कार्य किया जा रहा है, जिसमें संस्कारयुक्त शिक्षा भी सम्मिलित है।
उन्होंने अपने संबोधन में हनुमान जी के चरित्र का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस प्रकार हनुमान जी अपने कर्म और भक्ति से निरंतर राम कार्य में लगे रहते हैं, उसी प्रकार एकल विद्यालय संच के आचार्य भी पूर्ण निष्ठा और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। आचार्यों के उत्कृष्ट कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें श्रीराम मंदिर का छायाचित्र भेंट कर सम्मानित किया गया।


समापन समारोह में कोटमी मंडल के मंडल सह कारवाह उत्तम रॉय, राष्ट्रीय स्वयंसेवक मुकेश जायसवाल, एकल विद्यालय आचार्य वर्ग प्रमुख श्री चंद्रशेखर महंत, सर्व व्यवस्था प्रमुख सतोक पैकरा, रहन भानू, पर्यवेक्षक श्रीमती वचन मानिकपुरी, मनोज यादव, दोहा चौपाई प्रमुख प्रियंका, वर्ग गीत प्रमुख श्रीमति सरोज चंद्रा सहित एकल विद्यालय के आचार्यगणश्रीमती शिवकुमारी यादव, श्रीमती राम कुमारी कश्यप, गोविंद सिंह कोर्राम, श्रीमती देव कुमारी बघेल, श्रीमती गायत्री नागेश श्रीमती दीपिका ओडडे, श्रीमती रामबाई विश्वकर्मा, श्रीमती बुधवारिया भानु, श्रीमती ममता यादव, श्रीमती भारती पनीका, श्रीमती अवकाश कंवर, अशोक खालको, रहमान भानु, जियालाल वाकरे, श्रीमती निशा पुरी, श्रीमती संजना पड़वार, प्रेम सिंह पैकरा अशोक सिंह पैकरा, श्रीमती ललिता सिंह, श्रीमती मालती पेंद्रो, श्रीमती दूबसिया बाई, श्रीमती सरोज कुजूर, सुरेश सिह मार्को, श्रीमती हिरीया टांडिया, श्रीमती मीनाबाई पैकरा गरिमामयी उपस्थिति में
कार्यक्रम का समापन प्रेरणादायी वातावरण में हुआ, जिससे आचार्यों में सेवा, शिक्षा और संस्कार के प्रति और अधिक उत्साह देखने को मिला।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page