G-QKE15KJ9P0 25777229988609873
ChhattisgarhINDIARaipurखास-खबर

पैरा आर्ट से आत्मनिर्भर बनेंगी महिलाएं, 40 स्व-सहायता समूह सदस्यों को मिला प्रशिक्षण

रायपुर, 16 जुलाई। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और गैर-कृषि आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक नई पहल की गई है। विकासखंड बलौदाबाजार के ग्राम लाहौद में स्व-सहायता समूह की 40 महिलाओं को धान एवं पैरा (पुआल) आर्ट का विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

छत्तीसगढ़ में धान की कटाई के बाद बचने वाले पैरा (पराली) से बनाई जाने वाली हस्तकला को पैरा आर्ट कहा जाता है। इस कला में अनुपयोगी पैरा का उपयोग कर महापुरुषों, देवी-देवताओं और विभिन्न आकर्षक आकृतियों के थ्री-डी चित्र तैयार किए जाते हैं। यह कला पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों के लिए आय का नया स्रोत भी बन रही है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन पर जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाओं को प्रमाण-पत्र वितरित किए। उन्होंने महिलाओं द्वारा धान और पैरा से तैयार की गई कलाकृतियों का अवलोकन कर उनके हुनर की सराहना की और उन्हें इस कला के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।

जिला पंचायत सीईओ ने बताया कि जिला पंचायत की बिहान टीम के प्रयासों से जिले में गैर-कृषि आजीविका को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य से छत्तीसगढ़ महतारी संकुल संगठन, लाहौद के माध्यम से स्व-सहायता समूह की 40 महिलाओं को पैरा आर्ट का प्रशिक्षण दिया गया।

उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण से महिलाएं अब स्थानीय स्तर पर बेकार समझे जाने वाले पैरा और धान का उपयोग कर आकर्षक कलाकृतियां तैयार कर सकेंगी। इससे उन्हें अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा और वे आर्थिक रूप से अधिक सशक्त एवं आत्मनिर्भर बन सकेंगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page