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सोमनाथ स्वाभिमान सांस्कृतिक यात्रा से लौटे 1040 विशिष्टजन, रायपुर स्टेशन पर हुआ भव्य स्वागत

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर सफल हुई सांस्कृतिक यात्रा, प्रथम ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर लौटे प्रदेशभर के प्रतिभागी

रायपुर, 26 जून। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी ‘सोमनाथ स्वाभिमान सांस्कृतिक यात्रा’ सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। पांच दिवसीय यात्रा के बाद प्रदेश के सभी जिलों से शामिल 1040 विशिष्टजन शुक्रवार को रायपुर लौटे। रायपुर रेलवे स्टेशन पर उनका पुष्पवर्षा, माल्यार्पण और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ आत्मीय स्वागत किया गया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आयोजित इस यात्रा के माध्यम से प्रतिभागियों को भारत के प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान सोमनाथ के दर्शन के साथ देश की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय एकात्मता का अनुभव करने का अवसर मिला। शासन का उद्देश्य विकास के साथ संस्कृति, आस्था और राष्ट्रीय स्वाभिमान को भी सशक्त करना रहा।

यात्रा में पद्मश्री सम्मान प्राप्त विभूतियां, राष्ट्रीय एवं राज्य सम्मान से सम्मानित कलाकार, साहित्यकार, संस्कृति कर्मी, समाजसेवी तथा अन्य विशिष्टजन शामिल हुए। इससे छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली।

संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में संस्कृति विभाग ने यात्रा का सफल संचालन किया। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, गुजरात सरकार और सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के सहयोग से आवागमन, आवास, भोजन, चिकित्सा और सुरक्षा सहित सभी व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित रहीं। संस्कृति एवं राजभाषा विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे भी पूरी यात्रा के दौरान प्रतिभागियों के साथ मौजूद रहे।

यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान सोमनाथ के दर्शन-पूजन के साथ मंदिर की ऐतिहासिक विरासत का अवलोकन किया। कई प्रतिभागियों ने अपने क्षेत्र की पावन मिट्टी और नदियों का जल भगवान सोमनाथ को अर्पित कर राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में आयोजित लाइट एंड साउंड शो भी देखा, जिसमें सोमनाथ मंदिर के इतिहास और पुनर्निर्माण की प्रेरक गाथा प्रस्तुत की गई।

यात्रा से लौटे प्रतिभागियों ने इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि वर्षों पुरानी सोमनाथ दर्शन की इच्छा शासन की इस निःशुल्क और सुव्यवस्थित पहल से पूरी हुई। उत्कृष्ट व्यवस्थाओं और आत्मीय व्यवहार के लिए उन्होंने छत्तीसगढ़ शासन का आभार भी व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की इस पहल को सांस्कृतिक पुनर्जागरण, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। शासन का कहना है कि भविष्य में भी ऐसे आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

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