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सर्वसिद्ध शक्तिपीठ तपोभूमि श्री जामड़ी पाटेश्वर धामतीर्थ: रामबालक दास

@apnews19 अगस्त बालोद: सर्वसिद्ध शक्तिपीठ तपोभूमि श्री जामड़ी पाटेश्वर धामतीर्थ , हरियाली से भरे जंगल में स्थित एक ऐसा आश्रम है जहां विभिन्न प्रकार के श्रम चाहे वह मानसिक हो या शारीरिक सभी से भक्तो को आराम मिलता है, पाटेश्वर धाम के चारों हरे भरे जंगल में अपनी अद्भुत हरियाली से सुशोभित घनघोर जंगल में मांँ कौशिल्या जन्म भूमि मंदिर का पवित्र निर्माण हो रहा है- जो बड़ी बड़़ी शिलाखंडों से निर्माण का नजारा अद्भुत है, इसकी मजबूती ऐसी है, जो कि हजारों सालों तक रहे ,यह मंदिर विश्व का अद्वितीय मंदिर है!! मंदिर के अन्दर प्रवेश करते ही आप देखेंगे शंखावट,और मूर्तियों से शुशोभित मुख्य दरवाजा, सीलिंग का अद्भुत दृश्य, जहाँ सामने आप श्री भूतभावन महादेव के दर्शन करेंगे, यह विशाल गर्भ गृह में विराजमान हैं, जिसकी छटा भी अद्भुत है। इस गर्भ गृह के अन्दर और बाहर मंदिर में – आप दर्शन का लाभ -45 ऐसे ऋषि- मुनियों, देवियाँ, देवताओं की मूर्तियाँ सुशोभित की गईं हैं,जिनको अनेक धर्मों को मानने वाले श्रद्धालुओं की इच्छाओं को ध्यान में रखकर उनके सहयोग के द्वारा निर्मित कराये गये हैं। यहां पर सभी धर्मों को मानने वाले भक्तों को अनेकता में एकता का दर्शन होता हैं।
प्रतिदिन की भांति आज भी सीता रसोई संचालन ग्रुप में ऑनलाइन सत्संग का सुंदर आयोजन किया गया जिसमें भक्तों ने अपनी जिज्ञासा बाबा जी के समक्ष रखी और उनका समाधान प्राप्त किया
, भोलाराम साहू जी ने जिज्ञासा रखी की हरि रूठे गुरु ठौर है गुरु रूठे नहीं ठौर यदि गुरु जी रूठ जाए तो ऐसा कौन है जो हमें क्षमा कर सकता है, इस विषय को स्पष्ट करते हुए बाबा जी ने बताया कि गुरु कभी अपने शिष्य से नहीं रूठते, जैसे माता पिता अपनी संतान से कभी नहीं रूठते चाहे वह गलती करे तो उसे डांट देंगे या दंड दे देंगे, यदि गुरु सच्चा गुरु है तो वह कभी भी नहीं रूठेगा
और यदि शिष्य सच्चा शिष्य है तो गुरु के रूठने पर गुरु से दूर नहीं होगा वह गुरुदेव के चरणों में पड़कर तत्काल उनसे क्षमा याचना कर लेगा और उनके हृदय से लिपट कर क्षमा मांगेगा गुरुदेव भी सच्चे हृदय से उसे तत्काल क्षमा कर देंगे यही गुरु शिष्य का अटूट रिश्ता है, एक बार यदि हरि रूठ जाए तो गुरु हमें उनसे बचा लेंगे परंतु यदि गुरु रूठ जाए तो गुरु तो कुछ नहीं करेंगे परंतु ईश्वर आपको आपके कर्मों का दंड अवश्य देंगे अतः गुरु की अवमानना कभी ना करें शास्त्रों में भी यह वर्णित है कि यदि भगवान के पूजा के पूर्व गुरु के दर्शन हो जाए तो पूजा की थाली उन्हें समर्पित कर उनकी पूजा पश्चात भगवान की पूजा करें गुरु सेवा सर्वोपरि है वैसे ही माता-पिता की सेवा भाव होनी चाहिए, पत्नी का पति के लिए सेवाभाव होनी चाहिए, सास ससुर के लिए सेवा भाव होनी चाहिए एक आदर्श मां के लिए अपने बच्चों के लालन-पालन का भाव होना चाहिए
. डुबोबत्ती यादव जी ने , ब्रह्म मुहूर्त की महिमा पर प्रकाश डालने की विनती की, बाबा जी ने बताया कि सभी संत महात्मा का कथन है कि ब्रह्म मुहूर्त में वायु पवित्र होती है और उस समय ऊर्जा का संचार होता है इस समय हमारी चेतना का भी सँचार होता है और मन में चैतन्य भाव उत्पन्न होते हैं इस बेला को अमृतवेला इसलिए कहा जाता है कि इस समय चंद्रमा तारे मंडल आदि सभी के अमृत कण धरती पर बरसते हैं जो कि संपूर्ण वायुमंडल में मिश्रित हो जाते हैं अतः हम सभी को ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए, उठकर स्नान आदि करके पानी का सेवन करना चाहिए और सूर्योदय के पश्चात सूर्य नमन करके कुछ ग्रहण करना चाहिए, रात्रि में अवश्य रूप से जल्दी सो जाना चाहिए रात्रि में अधिक देर तक ना पढ़कर प्रातः काल में ही शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए, जो भी व्यक्ति ब्रह्म मुहूर्त में अपने कार्य को प्रारंभ करता है उसकी सफलता निश्चित रहती है
बाबा जी ने आज साहिब शब्द का अर्थ सभी को बताया साहेब का अर्थ होता है जो भी हमसे छूट गए हैं उसको बहुरा देना, अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाना अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाना यही साहिब बंदगी है
सोरन सिंह शर्मा जी ने जिज्ञासा रखी की कहते हैं कि मनुष्य जन्म 84 लाख यौनियों के बाद एक वार मिलता है, लेकिन सैकड़ों लोगों का अभी तक पुनर्जन्म हुआ है, और पिछले जन्म का सब याद है कैसे.. इस पर बाबा जी ने बताया कि, मनुष्य जन्म आवश्यक नहीं कि 84 योनि भोगने के बाद ही प्राप्त हुई यह तो अपने अपने कर्मों का फल होता है पुनर्जन्म याद रखना यह अक्सर जीव जंतुओं में होता है मनुष्य जीवन में यह संभावना कम होती है
चतुर राम कंवर जी ने शालिग्राम की पूजा विधि विधान को पूछा, बाबा जी ने बताया कि शालिग्राम को पंचामृत से स्नान कराना चाहिए एवं उसे अंगूठे से नहीं रगड़ना चाहिए, एवं तुलसी पत्र को भी दांत से नहीं।

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