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भीषण गर्मी और हीट वेव से वन्यजीवों पर संकट, वन विभाग अलर्ट मोड पर

AP न्यूज़ विश्वराज ताम्रकार जिला ब्यूरो चीफ KCG

खैरागढ़ वन क्षेत्र में 15 वन्यजीव एवं पक्षियों की मौत, जांच के लिए भेजे गए नमूने

वन्यजीव संरक्षण हेतु बनाए गए अस्थायी वाटर होल, ट्रेप कैमरों से बढ़ाई गई निगरानी

खैरागढ़ :वन परिक्षेत्र खैरागढ़ अंतर्गत उपवृत्त लछना के वन परिसर दल्लीखोली के वन कक्ष क्रमांक 322 में 25 मई 2026 की सायंकाल लगभग 6 बजे कुछ वन्यप्राणी एवं पक्षियों के मृत अवस्था में पाए जाने की सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही वन विभाग का अमला तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुआ और मौके पर पहुंचकर विस्तृत निरीक्षण एवं आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ की गई।

घटनास्थल के निरीक्षण के दौरान कुल 15 वन्यजीव एवं पक्षी मृत अवस्था में पाए गए। वन विभाग द्वारा समस्त मृत वन्यप्राणियों एवं पक्षियों का पंचनामा तैयार कर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की गई। साथ ही क्षेत्र के प्राकृतिक जल स्रोतों एवं पर्यावरणीय परिस्थितियों का भी परीक्षण किया गया। घटना की जानकारी मिलते ही पशु चिकित्सकों की एक्सपर्ट टीम तथा विभागीय वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और प्रारंभिक परीक्षण किया गया।

प्राथमिक जांच में संभावना व्यक्त की गई है कि विगत 3 से 4 दिनों से क्षेत्र में पड़ रही अत्यधिक गर्मी एवं हीट वेव की स्थिति के कारण वन्यप्राणियों और पक्षियों की मौत हुई हो सकती है। जांच के लिए मृत वन्यजीवों के आसपास के जल स्रोतों का पानी एवं मिट्टी के नमूने लेकर प्रयोगशाला भेजे गए हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार घटनास्थल पर प्राकृतिक वाटर होल मौजूद है, लेकिन लगातार बढ़ते तापमान और जंगलों में घटते जलस्तर का असर वन्यजीवों पर पड़ रहा है।

भीषण गर्मी को देखते हुए वन विभाग द्वारा वन्यप्राणियों एवं पक्षियों के लिए क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर 3 अस्थायी वाटर होल तैयार किए गए हैं, जिनमें नियमित रूप से पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा आवश्यकता के अनुसार अन्य स्थानों पर भी वाटर होल निर्माण की प्रक्रिया जारी है ताकि वन्यजीवों को राहत मिल सके।

वन मंडलाधिकारी पंकज सिंह राजपूत ने बताया कि प्रारंभिक जांच में अत्यधिक गर्मी एवं हीट वेव को वन्यप्राणियों और पक्षियों की मौत का संभावित कारण माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि वन विभाग द्वारा प्रभावित क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी जा रही है तथा वन्यजीवों के लिए अस्थायी वाटर होल तैयार कर नियमित रूप से पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही ट्रेप कैमरों के माध्यम से वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

वन विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार गश्त एवं निगरानी बढ़ा दी है। ट्रेप कैमरों के माध्यम से वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। विभाग ने स्थानीय ग्रामीणों एवं आम नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है।

वन विभाग ने अपील जारी करते हुए कहा है कि वर्तमान भीषण गर्मी के दौरान यदि कहीं कोई वन्यप्राणी अथवा पक्षी असामान्य अवस्था में दिखाई दे या घायल, बीमार अथवा मृत मिले, तो इसकी सूचना तत्काल निकटतम वन कार्यालय, वन कर्मचारियों अथवा वनमंडल कार्यालय के कंट्रोल रूम (247) मोबाइल नंबर 9301321797 पर दें, ताकि समय पर उपचार एवं संरक्षण संबंधी कार्रवाई की जा सके।

वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीव संरक्षण एवं पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए विभाग पूरी तरह प्रतिबद्ध है और क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा हेतु लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

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