केन्द्रीय गृह मंत्री शाह के दृढ़ संकल्प से बस्तर हुआ नक्सली हिंसा से मुक्त : देव

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में बस्तर अब ‘बंदूक‘ नहीं, ‘विकास’ और ‘खुशहाली‘ की राह पर अग्रसर
रायपुर । भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बस्तर आगमन प्रदेश और विशेषकर बस्तर संभाग की जनता के लिए ऐतिहासिक होगा। श्री देव ने कहा कि श्री शाह का बस्तर दौरा इस क्षेत्र की शांति, सुरक्षा और समृद्धि के लिए मील के पत्थर के समान है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री देव ने केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह के रणनीतिक कौशल की चर्चा करते हुए कहा कि जब से केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री के रूप में श्री शाह ने कमान संभाली है, तब से नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। श्री देव ने कहा कि श्री शाह ने देश से वामपंथी उग्रवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने का जो संकल्प लिया था, उसका सबसे सकारात्मक असर हमारे बस्तर में देखने को मिल रहा है। बस्तर जो कभी नक्सली हिंसा के साये में जीने को मजबूर था, आज वहां भय का माहौल खत्म हो रहा है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनते ही नक्सलियों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई गई है। श्री शाह के कुशल मार्गदर्शन और राज्य पुलिस व केंद्रीय सुरक्षा बलों के आपसी तालमेल के कारण आज देश में नक्सलवाद बैकफुट पर है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री देव ने कहा कि बस्तर के सुदूर अंचलों में नए सुरक्षा कैम्प स्थापित कर सुरक्षा घेरा मजबूत किया गया है। भाजपा की राज्य सरकार केवल सुरक्षा के मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि बस्तर के सर्वांगीण और सर्वतोमुखी विकास के लिए चौतरफा कार्य कर रही है। बस्तर का विकास हमारी सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘नियद नेल्लानार’ के माध्यम से बस्तर के प्रभावित और अंदरूनी गाँवों तक बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाई जा रही हैं। सुरक्षा कैम्पों के आसपास के गाँवों में सड़क, बिजली, शुद्ध पेयजल, स्कूल, अस्पताल और राशन जैसी मूलभूत सुविधाएँ युद्ध स्तर पर मुहैया कराई जा रही हैं। इसी तरह भाजपा सरकार आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह समर्पित है। तेंदूपत्ता संग्रहण दर में ऐतिहासिक वृद्धि कर इसे 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा करना और चरण पादुका जैसी योजनाओं को पुनर्जीवित करना इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। इसके साथ ही स्थानीय आदिम संस्कृति, देवगुड़ियों और पारंपरिक उत्सवों के संरक्षण के लिए विशेष बजट और संसाधन आवंटित किए गए हैं।

