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“मेरा गाँव – मेरी धरोहर” योजना अंतर्गत सचिवों का दो पाली में आयोजित होगा जिला स्तरीय प्रशिक्षण

AP न्यूज विश्वराज ताम्रकार जिला ब्यूरो केसीजी

जिला केसीजी : एंकर….. भारत सरकार की राष्ट्रीय पहल “मेरा गाँव – मेरी धरोहर” योजना के प्रभावी क्रियान्वयन एवं ग्राम स्तर पर धरोहरों के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण के उद्देश्य से दि 5 जनवरी को जिला पंचायत खैरागढ़–छुईखदान–गंडई के अंतर्गत समस्त करारोपण अधिकारी, कम्प्यूटर ऑपरेटर एवं ग्राम पंचायत सचिवों का दो पाली में जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है,यह प्रशिक्षण जिला पंचायत संसाधन केंद्र, देवरीभाठ (खैरागढ़) में संपन्न होगा।
प्रशिक्षण के तहत प्रथम पाली प्रातः 10:00 बजे से जनपद पंचायत छुईखदान के समस्त सचिवों हेतु तथा द्वितीय पाली अपराह्न 2:00 बजे से जनपद पंचायत खैरागढ़ के समस्त सचिवों हेतु आयोजित की गई हैं….
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रेम कुमार पटेल एवं जिला पंचायत संसाधन केंद्र के प्राचार्य गीत कुमार सिन्हा के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण में शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए. निर्देशानुसार बिना पूर्व सूचना के अनुपस्थित पाए जाने वाले सचिवों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही किए जाने की चेतावनी दी गई।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को पंचायतों से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण पोर्टल एवं सॉफ्टवेयर की जानकारी दी जायेगी, जिनमें प्रमुख रूप से ग्राम संपत्ति रजिस्टर अपडेट मीटिंग ऑनलाइन प्रणाली, एम-एक्शन सॉफ्टवेयर
ग्राम स्वराज पोर्टल जीपीडीपी (GPDP)सभा सार ऐपसमर्थ पोर्टल“मेरा गाँव – मेरी धरोहर” (MGMD) पोर्टल सहित योजना से जुड़े सभी तकनीकी एवं प्रक्रियात्मक बिंदुओं पर विस्तारपूर्वक प्रशिक्षण प्रदान किया जायेगा.
प्रशिक्षण में सभी सचिवों को निर्देशित किया जायेगा कि 20 जनवरी से 24 जनवरी 2026 तक अपने-अपने ग्राम पंचायत अंतर्गत प्रत्येक गाँव का भ्रमण कर ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, प्राकृतिक एवं जनजातीय धरोहर से संबंधित डाटा संग्रहण करेंगे, संकलित जानकारी को 26 जनवरी 2026 को आयोजित होने वाली ग्राम सभा में चर्चा हेतु प्रस्तुत किया जाएगा। ग्राम सभा से अनुमोदन पश्चात 31 जनवरी 2026 तक MGMD पोर्टल में ऑनलाइन प्रविष्टि (एंट्री) सुनिश्चित करना अनिवार्य किया जायेगा।प्रशिक्षण में सम्मिलित होने वाले सभी प्रतिभागियों को आधार नंबर एवं आधार से लिंक मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से साथ लाने के निर्देश पूर्व में दिए गए हैं। *उल्लेखनीय है कि “मेरा गाँव – मेरी धरोहर” योजना के माध्यम से गाँवों की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, प्राकृतिक एवं पारंपरिक विरासत का संरक्षण कर उसे ग्रामीण पर्यटन एवं स्थानीय आजीविका से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है*। छत्तीसगढ़ के जनजातीय बहुल क्षेत्रों में यह योजना ग्रामीण पहचान, रोजगार सृजन एवं पलायन रोकने की दिशा में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी

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