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कलेक्टर गोपाल वर्मा ने ग्राम घुरसी और कांदावानी में हुए मृत्यु की घटनाक्रम को तत्काल संज्ञान।

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कलेक्टर गोपाल वर्मा ने ग्राम घुरसी और कांदावानी में हुए मृत्यु की घटनाक्रम को तत्काल संज्ञान।

कलेक्टर के निर्देश पर सीएमएचओं, एसडीएम, बीएमओं सहित प्रशासनिक अमला पहुंचकर पूरी घटनाक्रम की जानकारी ली

स्वास्थ्य विभाग की जांच से यह स्पष्ट पाया गया कि इन मौतों का कोई संबंध उल्टी-दस्त या मौसमी बीमारियों से नहीं है

कवर्धा, 27 सितम्बर 2024। कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने कबीरधाम जिले के पंडरिया विकासखंड के सुदूर वनांचल ग्राम घुरसी और कांदावानी में पांच लोगों की अलग-अलग तारिखों में हुई मृत्यु की घटना को तत्काल संज्ञान में लिया। कलेक्टर के निर्देश पर सीएमएचओ डॉ. बीएल राज, एसडीएम श्री संदीप ठाकुर, बीएमओ डॉ. अनामिका पटेल सहित प्रशासनिक अमला ग्राम घुरसी और कांदावानी में पीड़ित परिवारों के घर पहुंचकर घटनाक्रम की पूरी जानकारी ली। अधिकारियों ने पीड़ित परिवारों के साथ-साथ ग्रामीणों और उनके पड़ोंसियों से घटनाक्रम के संबंध में आवश्यक जानकारी भी ली। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बीएल राज ने बताया कि अलग-अलग कारणों से 14 सितंबर, 15, 16 और 26 सितंबर को कुल पांच लोगों की मृत्यु हुई। स्वास्थ्य विभाग की जांच से यह स्पष्ट पाया गया कि इन मौतों का कोई संबंध उल्टी-दस्त या मौसमी बीमारियों से नहीं है।
खंड़ चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनामिका पटेल ने बताया कि 16 सितंबर को ग्राम धुरसी में मंगली बाई और खुल्लर सिंह की मृत्यु महुआ शराब का लंबे समय से सेवन हुआ है। उन्होंने बताया कि मंगली बाई और खुल्लर सिंह की मृत्यु रात में लगभग एक घंटे के भीतर हो गई। मंगली बाई को पहले उल्टी आई और झटका लगा, जिसके बाद उनकी मृत्यु हो गई। लगभग 15 मिनट के बाद उनके पति खुल्लर सिंह को भी उल्टी और झटका आया और उनकी भी मृत्यु हो गई। मृतकों के परिजनों के अनुसार, दोनों लंबे समय से महुआ शराब का सेवन कर रहे थे, जो उनकी मृत्यु का मुख्य कारण हो सकता है। उन्होंनें बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने घटना की सूचना मिलने पर तुरंत गांव का दौरा किया और मृतकों का पंचनामा कराया। गांव में कोई भी उल्टी-दस्त या अन्य संक्रामक बीमारी के लक्षण नहीं पाए गए। स्वास्थ्य विभाग ने आवश्यक सावधानियां बरतते हुए क्लोरिनेशन और दवा वितरण का कार्य किया।
बीएमओं डॉ. पटेल ने बताया कि ग्राम कांदावानी के कान्हाखेरो में मानबती (5 वर्ष) की मृत्यु जो कि दिन भर खेल रही थी और पूरी तरह स्वस्थ थी, को रात के समय अचानक खांसी और उल्टी हुई। कुछ मिनटों के भीतर उसकी मृत्यु हो गई। परिवार के अनुसार, वह दिनभर स्वस्थ थी और उसके साथ कोई बीमारी या परेशानी नहीं थी। घटना के तुरंत बाद विभाग ने ग्राम में सर्वेक्षण किया और यह पाया कि गांव में उल्टी-दस्त या किसी अन्य मौसमी बीमारी के कोई लक्षण नहीं थे। विभाग ने ऐहतियात के तौर पर क्लोरिनेशन और स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाए गए।
उन्होंने बताया कि इसी तरह ग्राम नेउर के खैराहा पारा में सुंदरी बैगा की मृत्यु अचानक हुई। यह घटना स्वास्थ्य विभाग को समय पर सूचित नहीं की गई थी। विभाग को जानकारी तब मिली जब रूटीन शिविर के दौरान सर्वेक्षण किया गया। मृतक के परिवार ने स्वास्थ्य विभाग को सूचित नहीं किया, लेकिन जांच के दौरान स्वास्थ्य टीम ने गांव में किसी भी तरह की मौसमी बीमारी या उल्टी-दस्त के लक्षणों की पुष्टि नहीं की। विभाग ने गांव में जन-जागरूकता गतिविधियां और क्लोरिनेशन का कार्य सुनिश्चित किया।
ग्राम कांदावानी के आश्रित पारा बीजोराटोला में सिधराम बैगा स्वस्थ थे और उन्हें कोई गंभीर बीमारी नहीं थी। अचानक 14 सितंबर को उनकी मृत्यु हो गई और परिवार ने बिना किसी मितानिन को सूचित किए अंतिम संस्कार कर दिया। विभाग ने गांव का सर्वेक्षण किया और पाया कि मृतक के पैरों में पहले सूजन थी, जो घटना से कुछ समय पहले ठीक हो गई थी। स्वास्थ्य विभाग ने यह भी सुनिश्चित किया कि गांव में किसी और व्यक्ति में उल्टी-दस्त या कोई अन्य बीमारी के लक्षण नहीं थे। स्वास्थ्य विभाग ने गांव में आवश्यक चिकित्सा सेवाएं और जागरूकता अभियान चलाए।

स्वास्थ्य विभाग की जांच से यह स्पष्ट पाया गया कि इन मृत्यु का कोई संबंध उल्टी-दस्त या मौसमी बीमारियों से नहीं है

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बीएल राज ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की जांच से यह स्पष्ट पाया गया कि इन मौतों का कोई संबंध उल्टी-दस्त या मौसमी बीमारियों से नहीं है। अधिकतर मौतें अचानक स्वास्थ्य गिरावट या अन्य कारणों से हुईं, जिनमें महुआ शराब का सेवन और अन्य समस्या शामिल थीं। स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गांवों में चिकित्सा सेवाएं और जागरूकता अभियान चलाए, जिससे कोई भी बीमारी फैलने की संभावना खत्म हो गई। स्वास्थ्य विभाग ने सभी मामलों में एहतियातन कदम उठाए और यह सुनिश्चित किया कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए पर्याप्त स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध रहें।

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