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ट्रेन में सोते समय चार्जिंग लगाना पड़ सकता है महंगा, सामने आए ऐसे कई मामलों ने उड़ाए होश

ट्रेन में सोते समय चार्जिंग लगाना पड़ सकता है महंगा, सामने आए ऐसे कई मामलों ने उड़ाए होश

AP न्यूज प्रतिनिधि बिलासपुर : ट्रेन में सफर के दौरान यात्री मोबाइल को चार्जिंग में लगा कर सो जाते हैं, इसका फायदा उठाकर चोर आसानी से मोबाइल चोरी की (Mobile theft in Train) वारदात को अंजाम देकर फरार हो जा रहे। जीआरपी चोरी का अपराध दर्ज कर जांच का हवाला दे रही है। फिर भी चोरी के मामलों में अंकुश नहीं लग पा रहा है। लगातार मोबाइल चोरी के मामले बढ़ते जा रहे हैं।

मोबाइल चोरी होने की जानकारी पीडि़त को जब तक चलती है तब तक उनके मोबाइल बंद हो चुके होते हंै और ये मोबाइल कभी चालू भी नहीं होते। जीआरपी में अधिकांश मोबाइल चोरी की शिकायत दर्ज होने पर पुलिस मामले में जांच को आगे बढ़ाने का दावा करती है, लेकिन इक्का-दुक्का मामलों को छोड़ कर अधिकांश मोबाइल चोरी की जांच अधर में ही अटकी रहती है। आईएमईआई नम्बर के आधार पर जीआरपी मोबाइल की तलाश शुरू करती है लेकिन मोबाइल चालू न होने की स्थिति में अधिकांश मामले ठंडे बस्ते में चले जाते हंै। शासकीय रेलवे पुलिस बल शिकायत पर जांच कर आरोपी की तलाश का हवाला दे रही है।

जबलपुर से रायपुर के लिए सफर कर रहे यात्री अतुल पटेल का मोबाइल 29 सितम्बर को चोरी हो गया था। पीडि़त ने बताया कि सफर के दौरान सीट पर मोबाइल रखा था, नींद खुली तो पता चला मोबाइल चोरी हो चुका है। फोन लगाने पर मोबाइल बंद बता रहा था। शिकायत पर जीआरपी ने अपराध दर्ज किया है।

बिजुरी अनूपपुर निवासी देवेन्द्र कुमार 28 अक्टूबर को चिरमिरी एक्सप्रेस में सफर कर रहे थे। बिलासपुर से चिरमिरी जाने के दौरान पता चला किसी ने जेब से मोबाइल चोरी कर ली है। पीडि़त ने अनूपपुर में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत डायरी आने पर जीआरपी ने अपराध दर्ज किया है।

अनूपपुर निवासी रियाज अहमद 31 अक्टूबर को पत्नी व बच्चों के साथ बरौनी गोंदिया एक्सप्रेस में दुर्ग से अनूपपुर तक सफर कर रहे थे। रात में नींद खुली तो देखा कि सिरहाने रखा पर्स व सीट नीचे ट्राली बैग गायब था। मोबाइल व नगद रकम भी चोरी हो गया था।
&मोबाइल चोरी के मामले में शिकायत के बाद अपराध दर्ज कर जांच की जाती है। पुलिस ने जांच के दौरान कई मोबाइल फोन भी बरामद किया है। अन्य मामलों में जांच की जा रही है।
डीएन श्रीवास्तव, जीआरपी प्रभारी

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