सौदान के हटने से राजनीति में हुआ बदलाव…… सियासी माहौल गर्माया


बिलासपुर। सौदान सिंह की छत्तीसगढ़ से विदाई न सिर्फ छत्तीसगढ़ भाजपा के लिए बल्कि प्रदेश की राजनीति के लिए भी नया वर्ष 2021 की सबसे महत्वपूर्ण घटना है ! भाजपा हाईकमान ने इस बदलाव के माध्यम से साफ संकेत दे दिया है कि आगामी दिनों में न सिर्फ छत्तीसगढ़ भाजपा का चाल,चरित्र व चेहरा बदलने वाला है बल्कि यह भी संकेत दे दिया है कि 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी भी भाजपा अब नए सिरे से करने वाली है ! सौदान सिंह 18 वर्षों तक छत्तीसगढ़ के प्रभारी रहे ! उनकी और डॉक्टर रमन सिंह की युगल जोड़ी ने छत्तीसगढ़ में सफलता के कई झंडे गाड़े ! उनकी सबसे बड़ी सफलता रही प्रदेश में लगातार 15 वर्षों तक भाजपा की सरकार ! जोगी सरकार के रहते जब प्रदेश का कोई भाजपा नेता संगठन की जिम्मेदारी लेकर जोगी से राजनीतिक दुश्मनी नहीं पालना चाहता था ऐसे कठिन दौर में सौदान सिंह को छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी मिली थी ! उन्होंने तत्कालीन केन्द्रीय राज्य मंत्री डॉ रमन सिंह को साथ लेकर छत्तीसगढ़ भाजपा के नेतृत्व के लिए तैयार किया ! इन दोनों की जोड़ी ने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा ! 2003 के विधानसभा चुनाव में न सिर्फ अजेय माने जा रहे अजित जोगी को करारी शिकस्त दी बल्कि तमाम धारणाओं को झूठा साबित करते हुए भाजपा की सरकार बनवा दी ! इसके बाद सौदान सिंह व रमन सिंह की जोड़ी ने प्रदेश में लगातार 3 बार भाजपा की सरकार बनाकर नया इतिहास रच दिया ! यह अलग बात है कि इन 15 वर्षों में भाजपा के कार्यकर्ता धीरे-धीरे उपेक्षित और निष्क्रिय होते गए ! पार्टी पर पूरी तरह सत्ता का नशा सर चढ़ कर बोलने लगा ! कॉंग्रेस की ही तरह संगठन व सरकार दोनों में पार्टी के निष्ठावान व समर्पित कार्यकर्ताओं की पूछ परख कम होने लगी ! सत्ता व संगठन दोनों पर सौदान व रमन का कब्जा हो गया ! दोनों नेताओं का सत्ता एवं संगठन पर इस कदर दबदबा रहा कि इनके विरुद्ध कोई आवाज उठाने कई हिम्मत नहीं कर पाता था ! दिल्ली में भी इन दोनों नेताओं के खिलाफ कोई शिकायत नहीं सुनी जाती थी ! छत्तीसगढ़िया नेतृत्व को उभरने नहीं दिया सौदान सिंह व रमन की जोड़ी ने शुरुवाती दौर से ही ऐसा सड़यंत्र रचा कि कोई छत्तीसगढ़िया नेतृत्व पार्टी के भीतर उभरने न पाए ! बेहद सौम्य व व्यवहार कुशल माने जाने वाले डॉ रमन सिंह बतौर मुख्यमंत्री सत्ता केंद्र में अपनी पकड़ धीरे-धीरे मजबूत करते रहे ! दूसरी ओर सौदान सिंह ने बतौर प्रभारी प्रदेश भाजपा संगठन को पूरी तरह अपनी मुट्ठी में रखा ! तथा उन्ही कार्यकर्ताओं व नेताओं को सत्ता व संगठन में मौका देते रहे , जो उनके लिए चुनौती न बन सके ! इन दोनों के नेतृत्व में सर्वाधिक उपेक्षा आदिवासी नेताओं की हुई ! जोगी शासनकाल में नेता प्रतिपक्ष रहे व पार्टी के बड़े आदिवासी चेहरा माने जाने वाले नंदकुमार साय को सबसे पहले निशाना बनाया गया ! उनके अलावा सरगुजा के राम विचार नेताम,ननकीराम कंवर सहित बस्तर के कई आदिवासी नेताओं को सड़यंत्र पूर्वक राजनीतिक वनवास में भेज दिया गया ! इसका खामियाजा 2013 व 2018 के चुनाव में भाजपा को उठाना पड़ा ! 2013 में भाजपा बस्तर से साफ हो गई वहीं 2018 में बस्तर के साथ सरगुजा के आदिवासी अंचल में भी भाजपा का पूरी तरह से सफाया हो गया ! सरगुजा में तो भाजपा एक सीट भी नहीं जीत पाई ! आदिवासी की तरह पिछड़ा वर्ग के नेताओं की भी घोर उपेक्षा की गई ! पिछड़ा वर्ग सबसे बड़ा धड़ा साहू समाज है ! इस समाज से भाजपा में दो मजबूत नेता स्व.ताराचांद साहू एवं चंद्रशेखर साहू सबसे ज्यादा राजनीतिक सड़यंत्र के शिकार हुए ! छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद पहले प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रहे स्व. ताराचंद साहू के लिए ऐसी परिस्थिति पैदा की गई कि उन्हें भाजपा छोड़ना पड़ गया ! यही स्थिति चंद्रशेखर साहू के साथ भी रही ! वैचारिक रूप से मजबूत माने जाने वाले चंद्रशेखर को पार्टी के भीतर खुलकर उभरने का मौका ही नहीं मिला ! पिछड़ा वर्ग के दूसरे बड़े धड़े कुर्मी समाज को भाजपा ने कभी महत्व ही नहीं दिया ! इस समाज के नेता महज पिछलग्गू बनकर रह गए ! हालांकि धरमलाल कौशिक को प्रदेश अध्यक्ष,विधानसभा अध्यक्ष तथा वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी मिली हुई है ! किन्तु सच्चाई यही है कि कौशिक सौदान सिंह व रमन सिंह के रबर स्टांप से ज्यादा हैसियत कभी नहीं रही ! यही कारण है कि पिछड़ा वर्ग के ये दोनों बड़े धड़े 2018 के चुनाव में पूरी तरह भाजपा से कटकर कॉंग्रेस के पाले में चले गए


