गृह निर्माण मंडल की मनमानी पर उपभोक्ता आयोग का हंटर, 21 लाख ब्याज सहित लौटाने का आदेश
राजनांदगांव की अटल विहार योजना का मामला, आवंटियों को मानसिक क्षतिपूर्ति के 50 हजार और वाद खर्च के 20 हजार रुपये भी देने होंगे
रायपुर/राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल को राज्य उपभोक्ता आयोग से बड़ा झटका लगा है। राजनांदगांव की अटल विहार आवासीय योजना में मकान के निर्माण की गुणवत्ता और जमा राशि वापस नहीं मिलने से जुड़े मामले में आयोग ने मंडल को आवंटियों की रकम ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए मूल राशि के साथ मानसिक क्षतिपूर्ति और वाद खर्च का भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।
मामला आवंटी गीता शुक्ला और निर्मल शुक्ला से जुड़ा है। दोनों ने राजनांदगांव स्थित अटल विहार योजना में मकान लेने के लिए 21 लाख 83 हजार 567 रुपये जमा किए थे। आवंटियों का आरोप था कि मकान का निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हुआ और शिकायत करने के बावजूद उनकी समस्याओं का संतोषजनक समाधान नहीं किया गया।
आवंटन निरस्त कर जमा राशि लौटाने की मांग
मकान के निर्माण और सुधार कार्यों से संतुष्ट नहीं होने के बाद आवंटियों ने आवंटन निरस्त कर जमा राशि ब्याज सहित वापस करने की मांग की। इस संबंध में उन्होंने गृह निर्माण मंडल के समक्ष आवेदन भी प्रस्तुत किया, लेकिन उन्हें राशि वापस नहीं मिली। इसके बाद मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा।
गृह निर्माण मंडल ने ब्याज देने का किया विरोध
सुनवाई के दौरान गृह निर्माण मंडल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि आवंटित मकान का निर्माण पूरा हो चुका था और आवंटियों को कब्जा लेने के लिए कहा गया था। मंडल ने यह भी दलील दी कि आवंटन निरस्त होने की स्थिति में नियमानुसार निर्धारित कटौती के बाद ही राशि वापस की जा सकती है। उसके अनुसार, इस मामले में ब्याज देने का प्रावधान लागू नहीं होता।
योजना के नियमों को आयोग ने माना अहम
राज्य उपभोक्ता आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान योजना की शर्तों को महत्वपूर्ण माना। आयोग के अनुसार, योजना के नियमों में प्रावधान था कि यदि हितग्राही मकान के निर्माण या किए गए सुधार कार्यों से संतुष्ट नहीं है और आवंटन निरस्त किया जाता है, तो जमा राशि 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाई जाएगी।
आयोग ने यह भी पाया कि आवंटियों की ओर से लिखित आवेदन दिए जाने के बावजूद राशि वापस नहीं की गई। संबंधित मकान बाद में किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिए जाने के बाद भी मूल आवंटियों की जमा रकम का भुगतान नहीं किया गया।
आयोग ने स्पष्ट किया कि जब योजना की शर्तों में ही ब्याज सहित राशि लौटाने का प्रावधान है, तो वैध आवेदन के बाद भी भुगतान नहीं करना सेवा में कमी के दायरे में आता है।
30 दिन के भीतर करना होगा भुगतान
राज्य उपभोक्ता आयोग ने गृह निर्माण मंडल को निम्नलिखित भुगतान करने का आदेश दिया है—
- मूल राशि: 21,83,567 रुपये।
- ब्याज: 19 फरवरी 2019 से भुगतान होने तक 7.5 प्रतिशत वार्षिक दर से।
- मानसिक क्षतिपूर्ति: 50,000 रुपये।
- वाद खर्च: 20,000 रुपये।
आयोग के आदेश के अनुसार, सभी भुगतान 30 दिनों के भीतर किए जाने हैं।
उपभोक्ता अधिकारों के लिए अहम फैसला
यह मामला उन आवंटियों के लिए महत्वपूर्ण है, जो आवासीय योजनाओं में मकान की गुणवत्ता, निर्माण संबंधी कमियों या जमा राशि की वापसी को लेकर परेशानियों का सामना कर रहे हैं। आयोग के आदेश से स्पष्ट होता है कि आवासीय योजना की शर्तों के तहत उपभोक्ताओं को मिलने वाले अधिकारों की अनदेखी को सेवा में कमी माना जा सकता है।



