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निजी विश्वविद्यालयों में प्रवेश से पहले जांच लें 5 जरूरी बातें: विनियामक आयोग

रायपुर, 25 जून 2026। छत्तीसगढ़ के निजी विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण सलाह जारी की गई है। प्रवेश प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़े से बचाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग ने छात्रहित में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

आयोग के सचिव अशोक अग्रवाल द्वारा जारी परिपत्र में कहा गया है कि किसी भी निजी विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने से पहले छात्रों को पांच महत्वपूर्ण बिंदुओं की जांच अवश्य करनी चाहिए, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रहे और बाद में किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े।

1. विश्वविद्यालय की वैधानिक मान्यता जांचें

छात्र सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि संबंधित विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) अधिनियम-2005 के तहत राज्य शासन द्वारा विधिवत अधिसूचित है या नहीं।

2. राजपत्र में प्रकाशन अनिवार्य

किसी भी निजी विश्वविद्यालय के परिनियम एवं अध्यादेश का छत्तीसगढ़ शासन के राजपत्र में प्रकाशित होना आवश्यक है। नियमानुसार राजपत्र में प्रकाशन के बाद ही विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को प्रवेश देने का अधिकार रखता है। इसके बिना प्रवेश प्रक्रिया अवैध मानी जा सकती है।

3. संबद्धता देने की अनुमति नहीं

छत्तीसगढ़ के निजी विश्वविद्यालय एकात्मक स्वरूप (Unitary System) के अंतर्गत संचालित होते हैं। इसलिए उन्हें अपने परिसर के बाहर किसी अन्य कॉलेज या संस्थान को संबद्धता देने की अनुमति नहीं है। ऐसे विश्वविद्यालय केवल अपने मुख्य परिसर अथवा अध्ययन शालाओं में ही पाठ्यक्रम संचालित कर सकते हैं।

4. यूजीसी से पाठ्यक्रम की मंजूरी

जिस पाठ्यक्रम या डिग्री में छात्र प्रवेश ले रहे हैं, वह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा अनुमोदित होना चाहिए। साथ ही संबंधित पाठ्यक्रम का उल्लेख विश्वविद्यालय के राजपत्र में प्रकाशित अध्यादेश में भी होना आवश्यक है।

5. पी-एच.डी. के लिए नियमों की जांच करें

पी-एच.डी. कार्यक्रमों के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के 2022 के विनियम लागू हैं। छात्रों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि संबंधित विषय में निर्धारित योग्यता वाले नियमित शोध निर्देशक (Research Guide) विश्वविद्यालय में कार्यरत हों। बाहरी शोध निर्देशकों के माध्यम से शोध कार्य कराना यूजीसी नियमों के अनुरूप नहीं माना जाता।

आयोग की अपील

आयोग के सचिव अशोक अग्रवाल ने विद्यार्थियों और अभिभावकों से अपील की है कि वे किसी भी भ्रामक विज्ञापन या झूठे दावों के प्रभाव में न आएं। प्रवेश लेने से पहले आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी की जांच करें अथवा आयोग कार्यालय से नियमों की पुष्टि करने के बाद ही प्रवेश संबंधी निर्णय लें।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है।

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