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कुसुमघटा में गूँजा एकता का मंत्र : शताब्दी वर्ष पर हिंदू सम्मेलन हुआ संपन्न

कुसुमघटा में गूँजा एकता का मंत्र : शताब्दी वर्ष पर हिंदू सम्मेलन हुआ संपन्न

जातिवाद के बंधन तोड़कर राष्ट्रहित में एकजुट हों हिंदू : कुसुमघटा में उमड़ा जनसैलाब

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और संतों के उद्बोधन से सराबोर हुआ हिंदू सम्मेलन, एकता का दिया संदेश

कवर्धा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गौरवशाली शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में कबीरधाम जिले के बोड़ला खंड अंतर्गत कुसुमघटा मंडल में मंगलवार को एक विशाल हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस गौरवमयी आयोजन में नेऊरगांव कला, कुसुमघटा, गंडई खुर्द, बोईरकछरा और खुरमुंदा सहित आसपास के दर्जनों गांवों से बड़ी संख्या में मातृशक्ति, युवा और विद्यालयीन छात्र-छात्राएं सम्मिलित हुए।

सांस्कृतिक छटा और भव्य झांकियां

सम्मेलन का शुभारंभ मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ। कार्यक्रम में प्रभु श्री रामचंद्र और मां दुर्गा के नौ रूपों का प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र रहा। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं को दर्शाती विभिन्न प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।

अतिथियों का उद्बोधन: धर्म और इतिहास पर चर्चा

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता राम मुरारी यादव (विभाग बौद्धिक शिक्षण प्रमुख) ने संघ के वैचारिक अधिष्ठान और 100 वर्षों की विकास यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला। हिंदू धर्म के इतिहास को बताते हुए आधुनिक समाज पर चर्चा करते हुए हिंदुओं को एकत्रित होने की बात कही। मुख्य अतिथि स्वामी रामानंद स्वामी जी महाराज ने हिंदू धर्म की प्राचीनता और गौरवशाली इतिहास की चर्चा करते हुए वर्तमान चुनौतियों के प्रति समाज को जागरूक किया। उन्होंने बताया कि हिंदू धर्म केवल एक उपासना पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक श्रेष्ठ कला है। मानस वक्ता पंडित किशन पाठक ने संत रविदास, कबीरदास, गुरु घासीदास और गोस्वामी तुलसीदास के दोहों के माध्यम से सामाजिक समरसता की व्याख्या की। उन्होंने भागवत के श्लोकों का उद्धरण देते हुए कहा कि सनातन धर्म सर्वे भवन्तु सुखिनः के सिद्धांत पर आधारित है। समाजसेवी शिवनाथ वर्मा ने भी समाज को संगठित होकर धर्म की रक्षा हेतु आगे आने के लिए प्रेरित किया।

हिंदू सम्मेलन हमारी एकता का प्रतीक है

कार्यक्रम के संयोजक आशु चंद्रवंशी ने सफल आयोजन के लिए सभी का आभार व्यक्त करते हुए हिंदू सम्मेलन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा,यह सम्मेलन हमारी एकता का प्रतीक है। हमें जातिवाद के बंधनों को तोड़कर यह समझना होगा कि हम सब पहले हिंदू हैं। जब हम जातियों में बंटते हैं, तो राष्ट्र कमजोर होता है। इस धरा पर ऊंच-नीच का कोई स्थान नहीं है; हम सब भारत माता की संतान हैं और सनातन धर्म के रक्षक हैं।

हनुमान चालीसा के पाठ और भारत माता की आरती के साथ हुआ समापन

भक्तिमय माहौल में गूँजा हनुमान चालीसा और भारत माता की आरती मंगलवार का शुभ दिन होने के कारण, कार्यक्रम का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय रहा। इस अवसर पर उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का सस्वर पाठ किया, जिससे पूरा कुसुमघटा क्षेत्र भक्ति के स्वर से गुंजायमान हो उठा। कार्यक्रम के अंत में भारत माता की भव्य आरती उतारी गई, जिसमें सभी ने राष्ट्र के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त की और भारत माता की जय के नारों से आयोजन स्थल गूँज उठा।कार्यक्रम के अंत में सभी गांवों से आए गणमान्य अतिथियों का श्रीफल और शॉल भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया। स्मृति चिन्ह के रूप में अतिथियों को प्रभु श्री रामचंद्र जी का तैलचित्र भेंट किया गया। कार्यक्रम का समापन सामूहिक प्रसादी वितरण के साथ किया गया। इस कार्यक्रम में कुसुमघटा मंडल के समस्त राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ता और सनातनी बंधु उपस्थित रहे।

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