आदिवासी समाज की बेटी और देश की माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अपमान केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि भारत के संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और पूरे आदिवासी समाज की अस्मिता का अपमान है।
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आदिवासी समाज की बेटी और देश की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी का अपमान केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि भारत के संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और पूरे आदिवासी समाज की अस्मिता का अपमान है।
दुर्भाग्यपूर्ण है कि वोटबैंक की राजनीति और तुष्टिकरण में लिप्त तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सत्ता के अहंकार में इतने डूब चुके हैं कि उन्हें देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा का भी ख्याल नहीं रहा। यह न केवल शर्मनाक है बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं का खुला अपमान है।
राष्ट्रपति का पद दलगत राजनीति से कहीं ऊपर है। देश की प्रथम नागरिक के प्रति इस तरह का व्यवहार लोकतंत्र की बुनियादी परंपराओं पर गहरा आघात है।
तृणमूल कांग्रेस को इस घोर आपत्तिजनक कृत्य के लिए पूरे देश और आदिवासी समाज से तत्काल माफी मांगनी चाहिए।

