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तालुक विधिक सेवा समिति खैरागढ़ में – नेशनल लोक अदालत का आयोजन कर वर्चुअल कॉन्फ्रेंसिंग और भौतिक माध्यम से प्रकरणों का निपटारा कर पक्षकारों को किया गया लाभान्वित

खैरागढ़ 09 मार्च 2024// छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के तत्वधान में तालुक विधिक सेवा समिति खैरागढ़ में नेशनल लोक अदालत का आयोजन आज दिनांक 09 मार्च को किया गया जिसमें प्रकरण के पक्षकारों को भौतिक रूप से एवं वर्चुअल कांफ्रेंसिंग दोनों मुख्य माध्यम से मामले में सुलह की सुविधा प्रदान की गई
उक्त नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ पक्षकारों द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के तैल चित्र पर पूजा अर्चना कर की गई न्यायाधीश चन्द्र कुमार कश्यप अपर जिला एवं सत्र न्यायालय खैरागढ़ के 26 प्रकरणों को पक्षकारों से सहमति उपरांत मामले का निपटारा कर उन्हें लाभान्वित किया गया इनमें 10 दावा प्रकरणों में कुल अवार्ड राशि ₹18 लाख 98 हजार 108 रू., अदर सिविल केसेस 04 में ₹23 लाख 21 हजार 446 रू. व 138 चेक बाउंस के 01 मामले में ₹210000 में रु हुआ वही प्री लिटिगेशन नगर पालिका खैरागढ़ के 03 मामले में ₹ 27980 रुपए, विद्युत विभाग के 15 प्रकारण में ₹ 226792 व बीएसएनएल 2 केस में ₹3548 में हुआ इसी प्रकार विवेक गर्ग मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट खैरागढ़ के 138 चेक बाउंस के 02 मामले में ₹310000, ट्रैफिक चालान में 249 मामलों में ₹24900 और वही कैसेस ऑफ यू/एस 321, 258 सीआरपीसी एंड ऑल अदर पेटी ऑफेंस ईटीसी बाय स्पेशल सीटिंग मजिस्ट्रेट के 43 प्रकरणों में 22000 रूपए की अवार्ड राशि पास हुआ और 14 आपराधिक मामलों में भी समझौता हुआ और गुरुप्रसाद देवांगन न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी न्यायालय में क्रिमिनल कंपाउंडेबल ऑफेंस केसेस 27 और ट्रैफिक चालान में 43 मामलों में ₹12900 और वही कैसेस ऑफ यू/एस 321, 258 सीआरपीसी एंड ऑल अदर पेटी ऑफेंस ईटीसी बाय स्पेशल सीटिंग मजिस्ट्रेट के 11 प्रकरणों में 7500 केस में पेटी ऑफेंस ऑफ जुवेनलेस 156 में 15600 अवार्ड राशि पास हुआ। राजीनामा करने हेतु तालुका विधिक सेवा समिति द्वारा प्री सिटिंग की व्यवस्था भी की गई थी जहां लोगों को आपसी सुलह से राजीनामा करने के लिए प्रेरित किया गया। इस प्रकार आज के नेशनल लोक अदालत में कुल 538 केसों का निपटारा हुआ जिसमें कुल अवार्ड
₹4857874 पारित हुआ। इस नेशनल लोक अदालत सफल बनाने में संपूर्ण कोर्ट स्टाफ सहित पैरालीगल वालंटियर गोलूदास साहू, छविराज, कला प्रजापति
सुलहकर्ता अधिवक्ता , गिरिराज ठाकुर, शत्रुघ्न वर्मा, चंद्रशेखर वर्मा, ज्ञान दास, महेश साहू, रामकुमार जांगड़े, मिहिर झा, सूर्य दमन सिंह, संदीप दास वैष्णव, विक्रम यदु , भुनेश्वर वर्मा , साबरा बानो, सुनील पांडे, सुबोध पांडे, सतीश सिंघानिया, मनोज चौबे, विवेक कुर्रे, सुरेश ठाकुर, सुरेश भट्ट, सौरभ श्रीवास्तव, कौशल कोसरे, नीरज झा , सर्वेश ओसवाल, एल एम जंघेल, नीरज झा, घम्मन साहू, मनराखन देवांगन, शत्रुघ्न वर्मा, राजीव चंद्राकर , विवेक कुर्रे, सुरेश साहू, सत्यकला वर्मा आदि का सहयोग रहा।

सफलता की कहानी

न्यायालय की मानवीय पहल

3 साल के लंबे इंतजार के बाद मिले दादी और पोते

आज के सामान्य जनमानस में पुलिस कोर्ट कचहरी को लेकर डर तथा अलग ही विचार आता हैं, किंतु लोक अदालत एक ऐसा माध्यम है जिसमे सामान्य जन अपने मुकदमे आसानी से सुलझा सकता इसी कड़ी में आज  अध्यक्ष श्री आलोक कुमार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार अध्यक्ष  चन्द्र कुमार कश्यप तालुक विधिक सेवा समिति खैरागढ़ एवं  सचिव  देवाशीष ठाकुर के मार्गदर्शन में आयोजित नेशनल लोक अदालत खैरागढ़ व्यवहार न्यायालय में आयोजित किया गया है, आज न्याय सुलभ है की तर्ज पर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी गुरुप्रसाद देवांगन के न्यायालय में विचाराधीन मामले में दादी भूरी बाई चंदेल और पोते प्रेमलाल चंदेल के बीच पारिवारिक विवाद जो कई वर्षो से लंबित था जिसमे न्यायालय द्वारा प्रार्थिया के घर जाकर जो चलने में असमर्थ थी जो पैरालिसिस के तकलीफ से जूझ रहे थी वहां व्यवहार न्यायालय खैरागढ़ के पीएलवी गोलूदास साहू तथा अभियुक्त के वकील सौरभ श्रीवास्तव के द्वारा न्यायालय खैरागढ़ से 25 किलोमीटर दूर उसके ग्राम परसुली न्यायालय आपके द्वारा के तहत घर जाकर राजीनामा दादी और पोते के बीच कराया गया साथ ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रार्थीया राजीनामा के लिए अपनी स्वीकृति जेएमएफसी गुरु प्रसाद देवांगन को दी। और डॉकेट फॉर्म में अपना अंगूठे का निशान लगाई। और दोनों के मध्य राजीनामा हुआ दोनों के मध्य जो विवाद और संघर्ष था वह खत्म हुआ और दोनों एक दूसरे से मिले दोनों के आंख में खुशी के आंसू आ गए। तथा न्यायालय के प्रयास से पुनः मधुर संबंध दोनों नाती पोते के बीच बना। दोनों ने इस पूरे कार्य के लिए नेशनल लोक अदालत के पूरे टीम का बहुत दिल से धन्यवाद किया।
यह पहल आम जन मानस में न्याय के प्रति जागरूक करने एक मिसाल है जिससे और मामले जो आज तक विचारण में है वह भविष्य में इसी तरह जल्द सुलझेंगे तथा लोगो के न्याय तथा न्यायालय के प्रति आस्था और बढ़ेगी।

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