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कहानी संग्रह “खेतिहारिन” समीक्षा डाँ.पीसीलाल यादव

संघर्ष के कहानी “खेतिहारिन”


कहानी साहित्य के सशक्त विधा आय।लिखित साहित्य के पहिली घलो वाचिक परंपरा म हमला लोक कथा के रूप म सुग्घर- सुग्घर मनोरंजक अउ शिक्षाप्रद छत्तीसगढ़ी कहानी सुने बर मिलत रिहिस।आजो मिलथे फेर गाँव-गोढ़ा म। शिक्षा के प्रचार प्रसार होय ले छत्तीसगढ़ी साहित्य में कहानी लेखन के परंपरा शुरु होय हे। छत्तीसगढ़ी कहानी के लिखित रूप जादा जुन्ना नइहे। फेर पुरखा मन जउन लिखे हें,ओमन हमर बर मील के पखरा आय।
अभी नवा समय म जउन कहानीकार मन अपन कहानी म अपन समय अउ परिवेश ल लिखथें तेन सँहराय के लईक हे। अभी-अभी मोला कटंगी-गंडई के सरलग लिखइया साहित्यकार श्री कमलेश प्रसाद शर्माबाबू के “खेतिहारिन” कहानी संग्रह पढ़े के मौका मिलिस।एक बात तो साफ हे कहानीकार अपन तीर-तकार के परिवेश म जउन देखथे,तउने ल अपन अनुभव संग सँघेर के लिखथे।अइसने सिरजन के उदिम आय “खेतिहारिन” ह। खेतिहारिन खेत म अवतरे रिहिस त ओखर नाँव खेतिहारिन परगे। “खेतिहारिन”कहानी नारी जागरन के कहानी आय।बेटी घलो उन्नत तरीका ले जोम देके किसानी कर सकत हे अउ उन्नति के रद्दा गढ़ सकथे। खेतिहारिन बड़ साहसी हे,ये कहानी म विधवा बिहाव अउ अंतर्जातीय बिहाव के बात आय हे,जेन समाज ल नवा रद्दा देखात हे।
कहानी संग्रह “खेतिहारिन” म अइसने येखर मिलाके सात कहानी के जोरन हे।सबो कहानी हमर ग्रामीण परिवेश के कहानी आय।तेखरे सेती ग्रामीण रीति-रिवाज अउ ग्रामीण संस्कृति के सुग्घर वर्णन हे। कहानीकार घलो गाँव के रहवाइया ये।गाँव के पैदाइस,गाँव के शिक्षा-दीक्षा अउ रहन-सहन होय के सेती गाँव के पूरा प्रभाव कहानीकार में हे।तेखरे सेती वो प्रभाव ह घलो ऊँखर लेखन म दिखत हे।
केहे जाथे पापी पेट जो करा दे कम हे।येखर पटन्तर देवत दुसरइया कहानी “पापी पेट” आय।जेमा दूर के ढोल सुहावने कस शहर जवइया मनखे मनके कहानी आय।जब शहर जाके देखथे त सब जिनिस उहाँ खोखला हे,जुच्छा दिखावा हे।
अइसने तीसरइया कहानी “बंठू-बुटिया” आय।देखे जाथे के जादा मया दुलार में संतान बिगड़ जथे।येहा समाज के आँखी उघरइया कहानी आय।
संग्रह के चौथा कहानी “अनुकम्पा” आय,जेमा बताय गेहे कि कइसे आज आरक्षण ह समाज बर जीवलेवा होगे हे।भरे ल भरे जुच्छा ल ढरकाय, हाना ल चरितार्थ करथे।कई पीढ़ी ले आरक्षण के लाभ कहाँ तक उचित हे?जेन पछुवाय तेन पछुवाय हे।ये कहानी बड़ मार्मिक बन परे हे।
संग्रह के पाँचवा कहानी “अंकुश ममा निरंकुश भाँचा” घलो सत्य ल उजागर करत कहानी आय।
संग्रह के छठवा कहानी “कउँवा मितान” ह आज के राजनीति के कच्चा चिट्ठा आय। पहिली मितान मन कृष्ण-सुदामा कस राहँय ।”कउँवा मितान” म कलियुगी मितान के युगीन चित्रण हे।जेन हा अपन सुवारथ बर मितान तक ल बोर देथे।येहा कपटी राजनीति के प्रभाव ये।
आखिरी कहानी “जोगी या भोगी” में आजकल के ढोंगी बाबा मन के सजीव चित्रण हे।धरम के चोला ओढ़े कइसे ठग फुसारी में मनखे जीथे ।अउ कखरो धरम ले आस्था ले खिलवाड़ करथे ।जेने पतरी म खाथे तेने म छेदा करथे। दरअसल धरम के नाँव लेके मनखे तइहा जग ले ठगावत आवत हे अउ अइसने ठगाते रहि।आज हम देखथन कि छत्तीसगढ़ में अइसने बाहरी मनखे आ- आ के धरम के नाँव म ठगत हें।हमर चेत कब चढ़ही ? आँखी कब उघरही ? कहानी के मरम ल समझे ल परही।आँखी मुंदे रहिबो त जिनगी घलो मुंदा जही।हमर सुख – सपना सब धंधा जही।
“खेतिहारिन” कहानी गाँव-गोढ़ा के कहानी ये। कहानीकार के भाखा निच्चट गँवइहा घलो हे।येखर परछो देवत हे कहानी म पात्रानुकूल अउ वातावरण के हिसाब ले प्रयुक्त हाना मन।ठऊर-ठऊर म कहानी के प्रभाव बढ़ाय बर बऊरे गीत कविता मन। कहानीकार ह कवि घलो हे,तेखर सेती मौका देख के कविता मन ल घलो कोनो-कोनो मेर गूँथे हे।
भाखा बड़ सहज अउ सरल हे। सरस घलो हे। प्रवाह घलो बने हे। येखर पहली इँखर एक अउ कहानी संग्रह “छत्तीसगढ़ के रतन बेटा” छपे हे। येहा दूसरा कहानी संग्रह ये।अइसने लिखत-लिखत अउ निखार आही लेखन में।अवइया कहानी मन अउ निखरही अइसे मोला भरोस हे। “खेतिहारिन कहानी संग्रह” छत्तीसगढ़ी कहानी म अपन ठऊर बनाही अइसे विस्वास जगाथे।
कहानीकार  कमलेश प्रसाद शर्मा बाबू ल बहुत-बहुत बधाई अउ शुभकामना।

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