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3 दिसंबर विश्व दिव्यांग दिवस पर विशेषआत्म कथा एक दिव्यांग की संघर्षों की कहानी तुलेश्वर कुमार सेन

AP न्यूज विश्वराज ताम्रकार जिला ब्यूरो केसीजी

तुलेश्वर कुमार सेन विशेष आत्म कथा – वे दिन भी क्या थे याद करो तो कभी खुशी कभी कम कह सकते हैं क्योंकि कुछ बातें होठों पर हँसी ले आते हैं तो कुछ बातों से आँखों में आँसू आ जाते हैं। मेरा जीवन पूरी तरह संघर्षों से भरा रहा इसका एक कारण एक पैर से दिव्यांग होना रहा बचपन में कोई एक साल का रहा होगा उसी समय मेरा पैर पोलियों से ग्रसित हो गया था परिवार वाले बहुत इलाज कराया परंतु सफलता नहीं मिली। बैशाखी के सहारे चलने का प्रयास चला और यही मेरा सहारा बन गया जिसके बाद हर पल चुनौती को स्वीकार करना पड़ता था कुछ लोग ही सम्मान से बात कर लेते थे बाकी लोग हमेशा आलोचना या निराशा वाली बातें करते थेकभी कभी मन में कई बार अपने आपको खत्म कर देना चाहिए ऐसा विचार भी मन में आता था परंतु वह समस्या का समाधान नहीं था। फिर अंदर से प्रेरणा मिली क्यों न कुछ ऐसा किया जाए जिससे लोगों के बीच में अपना अलग पहचान बन जाए जो लोग आज आलोचना कर रहे हैं वह प्रशंसा करने पर मजबूर हो जाएं। पढ़ाई में होशियार रहा परंतु कई बार आर्थिक स्थिति मजबूरी बन जाता था खैर एक रास्ता बंद होता है तो कुछ समय बाद दूसरा खुल भी जाता था इसी तरह संघर्ष चलता रहा।आठवीं के बाद पैसा नहीं होने के पढ़ाई छूटने वाली थी परंतु उसी समय कोई नया चमत्कार हो गया। गांव में गायत्री मंदिर था सुबह शाम प्रसाद के लालच में जाता था तो पूरा पूजा विधि विधान का ज्ञान हो गया था। उस समय मुझे पढ़ाई के लिए पैसा चाहिए था उन लोगों को मंदिर में पुजारी.. बस दोनों के बीच समझौता हो गया उस मंदिर का पुजारी बन गया बदले में पैसा मिलने लगा दोनों पार्टी का काम चलता रहा। बारहवीं तक की पढ़ाई पूर्ण हो गई। पढ़ाई के साथ गांव में सब्जी लाकर अपने ट्राइसिकल से बेचता था। नाई परिवार से संबंध रखता हूं तो गंवई और सेलून में हजामत भी बनाता था। इसी बीच मंदिर के पैसे और छात्र वृत्ति के पैसों को मिलकर यासिका कैमरा खरीदा और फोटो ग्राफी का काम सीख गया अब अच्छा आवक होने लगा आगे पढ़ना चाहता था। बी टी आई खैरागढ़ में मेरा चयन हो गया है उसके बाद ट्रेनिग किया और हॉस्टल में रहता था। वहां केवल एक कमरा मिला था बाकी सारा काम अपने हाथों से करना पड़ता था समय निकाल कर वहां भी सेलून जाता था। पढ़ाई पूरी हो गई इस पढ़ाई को पूरा कराने के लिए बहुत सारे लोगों ने प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष सहयोग प्रदान किए थे। जिसमें सर्व स्व०श्री अनिल शुक्ला जी पूर्व जनपद अध्यक्ष, पुरोहित सर , बी आर जोशी, रतन यादव ,धनेश पाटिला, सुश्री साधना अग्रवाल, सुश्री डी मिश्रा मैडम, सुंदर सिंह मरकाम, धरम चंद लूनिया, बाबा देवव्रत सिंह, लाल श्रीराज सिंह, गणपत दुबे, वीरेन्द्र दुबे सरपंच घुमका आदि।

एक घटना और है जब मैं कक्षा दसवीं में पढ़ता था तब तक मेरे घर में बिजली नहीं लगी थी।बहुत संघर्ष करता रहा ।जब मैं कक्षा दसवीं में 58.6 प्रतिशत लेकर पास हुआ तो सीधा उस समय के वर्तमान ऊर्जामंत्री माननीय  धनेश पाटिला से घुमका विद्युत आपूर्ति वितरण केन्द्र के उद्घाटन कार्यक्रम में जाकर मिला और निवेदन किया कि सर मैं एक दिव्यांग हूं और पढ़ाई में भी होशियार हूं अब तक मेरे घर में बिजली नहीं लगी है। उन्होंने तुरंत विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया इसे तत्काल कनेक्शन दिया जाए। तब कुछ दिन के अंदर कनेक्शन दिया गया। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान खैरागढ़ में डी एड के लिए मेरा चयन हुआ तो बहुत खुशी हुई तीन दिन के अंदर जाकर ज्वाइन करना था।परंतु पास में पैसा नहीं था तब जन सहयोग लेने का मन में निश्चय किया और जितने भी जान पहचान के शिक्षक, मित्रगण साथी,जन प्रतिनिधिगण,रिश्तेदार सब से प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष सहयोग लिया।यथा शक्ति सभी ने सहयोग किया । वर्तमान में जितना हो सका मिला उन पैसों को लेकर प्रशिक्षण प्रारंभ किया । उसके उस समय के वर्तमान प्रधान मंत्री माननीय स्व.श्री अटल बिहारी वाजपेई जी को आर्थिक सहायता के लिए पत्र लिखा। परंतु आवेदनों के मायाजाल ने इतना भरमाया पूछो ही मत। ग्राम पंचायत,जनपद पंचायत,पटवारी कार्यालय,तहसीलदार, एस डी एम कार्यालय, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, कलेक्टर कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय आदि बस घूमता रहा। अंत में थक हार कर जनपद पंचायत राजनांदगांव में अनिल शुक्ला जी जनपद अध्यक्ष/उपाध्यक्ष से मिला तो उन्होंने तुरंत विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया की जब तक इनकी पढ़ाई पूरी नहीं हो जाती है तब तक हर महिना पांच सौ रुपया दिया जाएगा। अगर मेरा कार्यकाल खत्म हो जाए तब भी सभी अधिकारी कर्मचारी इनका मदद करेंगे इनकी पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए और डी एड पूरा होते तक दिया भी। पढ़ाई करके वापस आया तो नौकरी के लिए संघर्ष करता रहा। इसी बीच कुछ अनैतिक कार्य अवैध गांजा, शराब, सट्टा व्यापार करने वालों ने मुझसे संपर्क किया अरे नौकरी का चक्कर छोड़ो हमारे साथ मिल जाओ बहुत पैसा मिलेगा और पुलिस भी नही पकड़ेगा ऊपर से नीचे तक सब कमीशन पर चलता हैमैने साफ मना कर दिया भले ही नौकरी न मिले परंतु गलत काम नही करूंगा। भूख मरूंगा तो भीख मांग लूंगा। कुछ दिन की बात है। उसके बाद कोई न कोई रास्ता खुल जाएगा। डी एड पूरा होने के बाद अपने गांव सलोनी के स्कूल में एक साल तक नि:शुल्क पढ़ायाकई जगह फार्म भरे परंतु कहीं पर नौकरी नहीं लगी। अंत में तक हार कर बिजनेस करने का फैसला बनाया बहुत प्रयास के बाद बहुत उतार चढ़ाव के बाद बैंक से लोन लिया दुकान शुरू हुआ परन्तु दो तीन महीना बाद ही दुकान में ताला तोड़कर पूरा सामान चोरी हो गया। अब आत्म हत्या के अलावा कोई स्थान नहीं था क्योंकि बैंक का लोन था। फिर भी प्रयास जारी रखा और उसी बीच भगवान को कुछ और मंजूर था। मेरी नौकरी 05/08/2006 में बीहड़ वनांचल जंगल के अंदर ग्राम शासकीय नवीन प्राथमिक शाला बसंतपुर बकरकट्टा विकास खंड छुईखदान जिला राजनांदगांव में लगा जहां पर आजादी के साठ साल बाद भी कोई सुविधा नहीं थी। मात्र सरकारी तीन बोरिंग और बिजली के खंभे थे।स्कूल आंगनबाड़ी नही था। न ही बस रोड, मोबाइल कुछ भी नहीं। समय आने पर सायकल वाले भी बमुश्किल से मिलता था।पैदल ही चलना पड़ता था। बस के लिए दो किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। संकुल आठ किलोमीटर चलना पड़ता था । आदिवासी बैगा और गौड़ जनजाति का चालीस घर का पूरा परिवार था ।पुरुष, महिला, बच्चे सब शराब का सेवन करते थे।बहुत संघर्ष रहा परंतु तीन साल में उस गांव का काया कल्प कर दिया जिस घर में रहता वही मेरा स्कूल और निवास था जहां सारी गतिविधियां संचालन करने लगा। साप्ताहिक दीप यज्ञ,नशा मुक्ति अभियान,बाल संस्कार शाला, गांव में रामायण मंडली,स्वच्छता अभियान,प्रभात फेरी,शिक्षा में गांव के महिला पुरुष को पढ़ाना और आकाशवाणी रायपुर के कार्यक्रम से जोड़ना। आज वहां के बच्चे कालेज में पढ़ रहे हैं। इस तीन वर्ष में उस ग्राम को शराब मुक्त बना दिया था आज भी गांव शराब मुक्त है पीते जरूर हैं पर गांव में नहीं बनता है। मैं वहां पर 26/10/2009 तक रहा ।उसके बाद से पैलीमेटा आ गया वहां पर भी इसी तरह की कार्यों को गति दिया । शिक्षा,साहित्य,समाज सेवा शिक्षा में नवाचार वहां पर 27/10/2009 से 15/11/2022 तक रहा । अब 15/11/2022 से प्रधान पाठक बनकर पुरेना आ गया हूं वहां भी यही सब कार्य कर रहा हूं ।इसके अतिरिक्त साहित्य लेखन,आकाशवाणी में प्रस्तुति,लघु फिल्मों में काम करना,प्रतिदिन मीडिया समाचार प्रिंट ,इलेक्ट्रानिक कवरेज करना अपनी आवाज देना। सभी प्रकार के मंच संचालन में सहभागिता प्रदान करना।इसी तरह के छोटे छोटे कामों ने आज मुख्य मंत्री शिक्षा दूत गौरव अलंकरण,राज्य पाल शिक्षक सम्मान,छत्तीसगढ़ राज्य गौरव सम्मान,अग्रदूत सम्मान,श्रेष्ठ और आदर्श शिक्षक सम्मान और बहुत सारे सौ से अधिक मंचों पर सम्मान दिलाया है। आन लाइन आफ लाइन मंच संचालन रामायण जस झांकी सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी मंच संचालन करता हूं आज नाश मुक्ति वाले गुरुजी के रूप में एक जाने पहचाने चेहरा है। । मेरे स्कूल का समाचार हर एक दो दिन में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में आता है । जो लोग आलोचना करते थे वे भी सम्मान से स्थान देते हैं। विगत 20 वर्षों से नशा मुक्ति अभियान प्रचारक तुलेश्वर कुमार सेन स्कूल,कालेज,ग्राम पंचायत,शासकीय और अशासकीय सार्वजनिक कार्यक्रम, पंचायत आदि में नशा मुक्ति उद्बोधन फ्लेक्स प्रदर्शनी रैली प्रोजेक्टर से व्यसन से बचाएं सृजन में लगाएं फिल्म प्रदर्शन कर रहे हैं। तुलेश्वर कुमार सेन सलोनी राजनांदगांव

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