द्वीप्ति योजना से छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिलाएं बन रहीं सौर ऊर्जा उद्यमी, कबीरधाम बना मॉडल जिला

रायपुर/कवर्धा, 24 जुलाई। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी द्वीप्ति (DWEEPTI) योजना ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का नया द्वार खोल रही है। इस योजना के तहत महिलाओं को केवल सौर ऊर्जा का उपभोक्ता नहीं, बल्कि विक्रेता, तकनीशियन, उद्यमी और सेवा प्रदाता के रूप में तैयार किया जा रहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने तकनीकी सहयोगी संस्था ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया के साथ मिलकर ग्रीन इकोनॉमी ट्रांजिशन मिशन के अंतर्गत इस नीति को विकसित किया है।

छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है जिसने महिला नेतृत्व वाली विकेंद्रीकृत अक्षय ऊर्जा नीति को अपनाया है। योजना के तहत अगले पांच वर्षों में 5,000 महिला ऊर्जा उद्यम, 50 हजार हरित रोजगार, 5 लाख परिवारों तक स्वच्छ ऊर्जा की पहुंच तथा 10 हजार संस्थानों को योजना से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

तैयार हो रही हैं ‘सोलर दीदी’
योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) और जिला प्रशासनों के सहयोग से 12 जिलों के 13 क्लस्टर स्तरीय महासंघों (सीएलएफ) को प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अधिकृत सोलर वेंडर के रूप में पंजीकृत किया गया है। महिलाओं को सोलर संयंत्रों की स्थापना, संचालन, रखरखाव और तकनीकी सेवाओं का प्रशिक्षण देकर ‘सोलर दीदी’ के रूप में तैयार किया जा रहा है, ताकि वे अपने ही क्षेत्रों में लोगों को सेवाएं उपलब्ध करा सकें।
‘लखपति दीदी’ विजन को मिलेगा बल
योजना के तहत स्व-सहायता समूहों से जुड़े परिवारों को आसान किश्तों पर ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। इससे महिलाओं को सौर ऊर्जा आधारित उद्यम स्थापित करने में आर्थिक सहायता मिलेगी और वे स्थायी आय का स्रोत विकसित कर सकेंगी। यह पहल प्रधानमंत्री के ‘लखपति दीदी’ विजन को भी मजबूती प्रदान कर रही है।
कबीरधाम बना सफलता की मिसाल
द्वीप्ति योजना के सफल क्रियान्वयन में कबीरधाम जिला राज्य के अग्रणी जिलों में शामिल हो गया है। जिला पंचायत कबीरधाम (बिहान) ने सीएसपीडीसीएल-आरएपीएम रायपुर के सहयोग से वंदे मातरम् क्लस्टर लेवल फेडरेशन को अधिकृत सोलर वेंडर के रूप में पंजीकृत कराया है। टाटा के तकनीकी सहयोग से स्व-सहायता समूहों की 35 महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण देकर जिले की पहली ‘सोलर दीदी’ टीम तैयार की गई है।
योजना के तहत जिले के समनापुर गांव में पहला रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किया गया। माता भवानी स्व-सहायता समूह की सदस्य अंजनी पटेल ने बताया कि इस प्रशिक्षण ने महिलाओं के लिए रोजगार का नया रास्ता खोला है और अब वे स्वयं सोलर सिस्टम स्थापित कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
40 से अधिक ऑर्डर मिले
कलेक्टर गोपाल वर्मा ने कहा कि यह पहल आजीविका संवर्धन और अक्षय ऊर्जा का सफल संगम है। वहीं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि कबीरधाम जिले में अब तक रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के 40 से अधिक ऑर्डर प्राप्त हो चुके हैं तथा कई संयंत्र स्थापित भी किए जा चुके हैं। इससे प्रशिक्षित ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर लगातार बढ़ रहे हैं।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह ने कहा कि अब तक अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका केवल लाभार्थी तक सीमित थी, लेकिन द्वीप्ति योजना उन्हें विक्रेता, तकनीशियन, प्रबंधक और उद्यमी के रूप में स्थापित कर रही है। यह योजना ग्रामीण महिलाओं को स्वच्छ ऊर्जा आधारित आत्मनिर्भर आजीविका से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
द्वीप्ति योजना : प्रमुख तथ्य
- 5 वर्षों में 5,000 महिला ऊर्जा उद्यम स्थापित होंगे।
- 50,000 हरित रोजगार सृजित किए जाएंगे।
- 5 लाख परिवारों तक स्वच्छ ऊर्जा पहुंचाई जाएगी।
- 10,000 संस्थानों को योजना से जोड़ा जाएगा।
- 12 जिलों के 13 क्लस्टर स्तरीय महासंघ अधिकृत सोलर वेंडर बनाए गए।
- कबीरधाम में 35 महिलाओं को ‘सोलर दीदी’ के रूप में प्रशिक्षित किया गया।
- जिले में रूफटॉप सोलर सिस्टम के 40 से अधिक ऑर्डर प्राप्त हो चुके हैं।

