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आंगनबाडी सहायिका /कार्यकर्त्ता भर्ती में पैसों की मांग करने वाला रामाधार का बड़ा बयान

आंगनबाडी सहायिका /कार्यकर्त्ता भर्ती में पैसों की मांग करने वाला रामाधार का बड़ा बयान

परियोजना अधिकारी नमन देशमुख के कहने से की रुपयों की मांग

बोड़ला – परियोजना क्षेत्र तरेगांव जंगल में आंगनबाडी भर्ती प्रकिया में मुड़घुसरी मैदान में सहायिका / कार्यकर्त्ता भर्ती पर गीता मेरावी ने परियोजना अधिकारी और वहाँ के कर्मचारी पर आरोप लगाया था की नियुक्ति हेतु एक लाख की मांग की गई, पर पूरी राशि नही दे पाई जिसके चलते ज्वानिंग लेटर मिलने के बाद भी मेरी नियुक्ति रद्द कर दी गई। इसी कड़ी में रामाधार नामक व्यक्ति ने गीता से पैसों की मांग की।
इस पूरे मामले का खुलासा पत्रकारों के माध्यम से किया गया था जिसके प्रकाशन के बाद जिला दंडाधिकारी ने बोड़ला एस डी एम को जाँच अधिकारी नियुक्त कर एक हफ्ते में जाँच रिपोर्ट देने कहा और तरेगांव जंगल परियोजना क्षेत्र से परियोजना अधिकारी नमन देशमुख को प्रभार से हटा दिया। लगभग एक माह बीत जाने के बाद भी जाँच की पूरी कार्यवाही का अब तक कुछ पता नही चला और जाँच अधिकारी एस डी एम मैडम का तबादला हो गया। इस मामले में कर्मचारियों का बयान लिया गया है पर आधिकारिक रूप से कोई बयान अब तक नही आया है। रामाधार जो अब तक पत्रकारों से दूरी बनाये थे और कॉल करने पर कुछ कह नही रहे थे अचानक तरेगांव कार्यालय में दिखे तो जानकारी दिया की मै अपना पक्ष एस डी एम कार्यालय में रख चूका हूँ और साथ ही अपना लिखित कथन भी दे चूका हूँ। मै छोटा आकस्मिक दर पर कार्य करने वाला कर्मचारी हूँ और पैसों की मांग मैंने अपने परियोजना अधिकारी नमन देशमुख के कहने से किया हूँ इसके अलावा मै और कुछ नही जानता। मै पिछले 12 से 13 वर्षो से कार्य कर रहा हूँ पर अब तक ऐसा कोई मामला मेरे ऊपर नही आया है और ना ही कोई आरोप लगा है

सूत्रों की माने तो परियोजना अधिकारी की इस बार की पूरी भर्ती में पारदर्शिता नही है

परियोजना अधिकारी के द्वारा की गई इस भर्ती प्रकिया में सिर्फ फ़र्ज़ीवाड़ा ही सामने आ रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ग्राम खरिया, ब्लॉक बोड़ला में नियुक्त हुई सहायिका ने इस मामले के प्रकाशन के कुछ दिन बाद ही अपने पद से त्याग पत्र देकर काम छोड़ दी सूत्रों की माने तो जिस प्रणाम पत्र के माध्यम से नियुक्ति हुई थी वह फ़र्ज़ी दस्तावेज था, सुनने में आया की किसी आश्रम से अनुभव प्रमाण पत्र जारी हुआ था पर वह आश्रम उस गांव में ही नही था जिसके चलते डर की वजह से त्याग पत्र दिया गया। ये कोई एक, दो नही बल्कि कई ऐसे और भी ग्राम है जहाँ लाखों की लेन देन कर नियुक्ति की गई है जिसकी जाँच जरूरी है।

सूत्रों से ये भी पता चला की आवेदन लेने के अंतिम तिथि निकल जाने के बाद भी पुराने डेट पर दस्तावेज लेने का खेल चला ये मामला बोदा 03 का है जहाँ पर एक महिला ने 13 तारीख को निवास के लिए तहसीलदार बोड़ला को ऑनलाइन आवेदन दिया जो 16 तारीख को प्राप्त हुआ जबकि आवेदन की अंतिम तिथि ही 13 तारीख था ऐसे में पुराने डेट पर आवेदन लेकर फ़र्ज़ीवाड़ा को अंजाम दिया गया पर सूचना अधिकार से प्राप्त दस्तावेज में जो निवास प्रमाण पत्र में 16 तारीख का उल्लेख है जो ऑनलाइन रिकॉर्ड में है। ऐसे फ़र्ज़ीवाड़ा को देख कर कैसे मान लिया जाये की ये पूरी भर्ती ईमानदारी से की गई है ये भर्ती उन उम्मीदवारों के लिए छलावा है जो पात्र होकर भी वंचित रह गये और ऐसे परियोजना अधिकारी जो लाखों कमा कर आराम से बैठे है और आम जनता अब भी जाँच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। ये सभी भर्ती एक साथ की है जो जाँच योग्य है, अन्य उम्मीदवारों से जब बात की गई तो उनका कहना है की इस परियोजना अधिकारी के कार्यकाल की पूरी भर्ती को जाँच कराना चाहिए ताकि और भी मामला जो दबा है वो सबके सामने आए।

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