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राजनांदगांव : दो दिवसीय लोक मड़ई एवं कृषि मेला का हुआ समापन : लोक मड़ई में लोक कलाकार को प्रदर्शन के लिए मिलता है मंच – कलेक्टर

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राजनांदगांव : दो दिवसीय लोक मड़ई एवं कृषि मेला का हुआ समापन : लोक मड़ई में लोक कलाकार को प्रदर्शन के लिए मिलता है मंच – कलेक्टर

राजनांदगांव : कलेक्टर श्री टोपेश्वर वर्मा एवं पुलिस अधीक्षक श्री डी श्रवण ने विकासखंड डोंगरगढ़ के लाल बहादुर नगर में आयोजित दो दिवसीय लोक मड़ई एवं कृषि मेला का समापन समारोह का शुभारंभ किया। उन्होंने मंच में देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना कर दूसरे दिन कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में सर्वप्रथम नक्सली हिंसा में शहीद वीर जवानों के परिजनों को शॉल और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरण तथा विधायक डोंगरगांव एवं लोक मड़ई एवं कृषि मेले के संरक्षक श्री दलेश्वर साहू, छत्तीसगढ़ अल्प संख्यक आयोग के सदस्य श्री हफीज खान, राजगामी संपदा न्यास के अध्यक्ष श्री विवेक वासनिक उपस्थित थे।
कलेक्टर श्री टोपेश्वर वर्मा ने कहा कि प्रतिवर्ष आयोजित होने वाली लोक मड़ई का आकर्षण भव्य होता है। इसका लोक इंतजार करते है। लोक मड़ई में विभिन्न विभाग कृषि, मछलीपालन, पशुपालन, उद्यानिकी विभाग तथा कृषि से जुड़े विभागों की प्रदर्शनी लगाई जाती है। जिसका लाभ किसानों को मिलता है। राजनांदगांव जिला उन्नतशील कृषि के लिए जाना जाता है। इस क्षेत्र में धान के साथ-साथ उद्यानिकी, पशुपालन, मछलीपालन, सब्जी, फूल की खेती उन्नत तरीके से की जाती है। उन्नतशील कृषि में लोक मड़ई का बहुत बड़ा साथ रहा है। उन्होंने कहा कि लोक मड़ई में लोक कलाकार को प्रदर्शन करने के लिए मंच मिलता है। लोक संस्कृति, लोक गायन और विभिन्न विधाओं के लिए प्रस्तुति यहां दी जाती है। जिससे हमारे क्षेत्र के कलाकारों को मंच में कला दिखाने का मौका मिलता है।
पुलिस अधीक्षक श्री डी श्रवण ने कहा कि लोक मड़ई का आयोजन पहला अनुभव है। यहां आकर बहुत अच्छा लगा। लोक मड़ई में अलग-अलग कलाकारों के लिए मंच मिलता है। इसमें छत्तीसगढ़ की संस्कृति झलकती है। इस मंच के माध्यम से छत्तीसगढ़ के कला को स्थान मिलता है। उन्होंने कहा कि लोक मड़ई एवं कृषि मेला का आयोजन बहुत ही सराहनीय है। इससे कलाकारों में रूचि भी दिखाई देती है। छत्तीसगढ़ अल्प संख्यक आयोग के सदस्य श्री हफीज खान ने कहा कि लोक मड़ई कार्यक्रम में वर्षों की सहभागिता दिखाई देती है। यहां अन्नदाता, किसान, मजदूर प्रदर्शनी के माध्यम से जानकारी लेकर लाभ प्राप्त करते हैं। लोक मड़ई में छत्तीसगढ़ की संस्कृति, लोक कला को देखने और सुनने का अवसर मिलता है। इस तरह के आयोजन में लोगों में कृषि तथा लोक कला के प्रति जागरूकता बढ़ती है।
लोक मड़ई एवं कृषि मेला के समापन संध्या में कलाकारों ने मनमोहन छत्तीसगढ़ी कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। मेले में राम वनगमन पथ की प्रदर्शनी लोगों के आकर्षण का केन्द्र रहा। यहां छत्तीसगढ़ में भगवान राम द्वारा वनवास के दौरान जिन स्थानों पर आगमन हुआ था। उसकी विशेष झांकी दिखाई गई। लोक मड़ई के दोनों दिन विभागीय स्टॉलों में शासकीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों की जानकारी लेने लोग उत्साहित दिखें। जनसंपर्क विभाग, उद्यानिकी विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान), कृषि विभाग, वन विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम, कृषि विज्ञान केन्द्र, पशुधन विकास विभाग सहित अन्य विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉल पर हर समय दर्शक जानकारी लेते रहे। सुराजी ग्राम योजना के तहत नरवा, गरवा, घुरवा और बारी के बारे में लोगों को बताकर जागरूक किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, लोक कलाकार, वरिष्ठ नागरिक एवं अधिकारी सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

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