ChhattisgarhRajnandgaon
कविता कालम

कविता
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गुरू आगे -गुरू आगे
भागे सब उत्ताधुर्रा
ढकेलीक ढकेला होगे
पायेबर वोखर
गोड़ के धुर्रा.
जब ले राम के
गोड़ के धुर्रा
अहिल्या ल तारे हे
तब ले
साधु सन्यासी गुरू मनके
गोड़धुर्रा के भाव
बाढ़े हे.
गुरू अकबकागे
सब चेलामन सकलागे
गोड़ भुंईयां मे माढ़य नही
मुड़भसरा उलानबाटी खागे.
मान सम्मान के चक्कर मे
ईज्जत बेचागे .
धुर्रा देके चक्कर मे
धुर्रा खेदागे.
धुर्रा खेदाय गुरू
पोट-पोट करे हे .
अस्पताल में लगे हे रेला
चिटपोट परे हे.
अईसन चेला चंगुरिया
शरमाबाबू गर के फांसी.
राम- राम कहत
प्राण छोड़दीस सन्यासी.
कमलेश प्रसाद शरमाबाबू
गंडई कटंगी