पंडरिया विधायक ने आदिवासी समाज के साथ किया विश्वासघात: नीलू चंद्रवंशी

पंडरिया विधायक ने आदिवासी समाज के साथ किया विश्वासघात: नीलू चंद्रवंशी
भोजन व्यवस्था पर वादा खिलाफी तो गोद लेने की जिम्मेदारी कैसे होगी पूरी
चिलचिलाती धूप में आदिवासी समाज भूखे प्यासे वापस लौटे घर, आदिवासी समाज में विधायक के खिलाफ दिखा आक्रोश
पंडरिया विधायक को आदिवासी समाज से सार्वजनिक रूप से माफी मांगना चाहिए
पीड़ित परिवार को 50-50 लाख रुपए मुआवजा तथा योग्यता के आधार पर परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग
कुई कुकदुर। वनांचल क्षेत्र के ग्राम सेमरहा के वाहन दुर्घटना में 19 लोगो की मृत्यु हुई थी, जिसका दशगात्र कार्यक्रम कल संपन्न हुआ। दशगात्र कार्यक्रम के भोजन व्यवस्था की जिम्मेदारी पंडरिया विधायक ने ली थी, लेकिन विधायक की गेरजिम्मेदारी के कारण यह व्यवस्था इतनी खराब थी की दशगात्र कार्यक्रम में पहुंचे 90 प्रतिशत आदिवासी समाज के लोगो को भोजन ही नसीब नही हुआ और उन्हें भूखे प्यासे बिना भोजन किए अपने घर लौटना पड़ा। इस अव्यवस्था से नाराज आदिवासी समाज के कई लोगों ने मीडिया के सामने अपनी नाराजगी व असंतोष प्रकट करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी। वही दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी के नेताओ के लिए वीआईपी भोजन की व्यवस्था की गई। शाम को जारी भाजपा नेताओं के इस वीआईपी दावत को देख लोगों का गुस्सा और भड़क गया और उन्होंने उन्होंने भाजपा नेताओं को जमकर कोसा। लोगों का मानना है की आदिवासी समाज के 90 प्रतिशत लोगो को भोजन न मिलना आदिवासी समाज के साथ धोखा है, आदिवासी समाज का अपमान है।
पंडरिया विधायक ने भोजन की व्यवस्था की जिम्मेदारी लेकर पूरा नहीं कर आदिवासी समाज को अपमानित किया है, आदिवासी समाज को धोखा दिया है। जिसे लेकर आदिवासी समाज में विधायक के खिलाफ आक्रोश दिखाई दे रहा है। भारतीय जनता पार्टी के लोग सिर्फ बोलते है करते नही है भाजपा के नेताओ ने पीड़ित परिवार को 5-5 लाख देने की घोषणा की थी लेकिन पीड़ित परिवार को अभी तक राशि नही मिली है और पंडरिया विधायक ने भोजन व्यवस्था की जिम्मेदारी लिया था लेकिन उनके द्वारा भोजन व्यवस्था भी नही की गई। भाजपा के नेताओ के झूठे वादों से कुई कुकुदुर क्षेत्र के आदिवासी समाज में भारी आक्रोश दिखाई दे रहा है। क्षेत्रीय विधायक भावना बोहरा द्वारा आदिवासी समाज के साथ किए गए इस विश्वासघात और धोखे की कड़े शब्दों से निंदा करते हुए जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष नीलकंठ चंद्रवंशी ने समाज से सार्वजनिक रूप से माफी मांगे जाने तथा प्रदेश सरकार से प्रत्येक पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपए मुआवजा तथा योग्यता के आधार पर परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है।