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पाकिस्तान को अपने औकात में रहना चाहिए खेल का कोई जाति धर्म नही होता,,,

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छत्रपाल ठाकुर की कलम से,,विश्व कप टी 20 क्रिकेट में पाकिस्तान के हाथों भारत की पराजय पर राजनीति कितना सही,,,,


विश्वकप क्रिकेट टी 20 पर राजनीति मुद्दा था पाकिस्तान की भारत पर जीत कश्मीर में पटाखे फोड़ कर पाकिस्तान के जीत का जश्न मनाया गया ये कहना टी वी न्यूज चैनलों का कहना है।दूसरा पाकिस्तान के किसी मूर्ख मंत्री ने भारत की हार और पाकिस्तान की जीत को इस्लाम की जीत बताया इसका जवाब उस मूर्ख पाकिस्तानी को देना ही चाहिए सभी राजनीतिक पार्टियों को एक साथ मिल कर जवाब देना चाहिए क्योंकी उस मूर्ख मंत्री को ये नही मालूम कि किसी भी खेल का कोई मजहब नही होता किसी भी खेल को खेलने से दो देशों के बीच भाईचारा बढ़ता है दो देशों के बीच आपसी सम्बन्ध मधुर बनाने का एक बेतरीन जरिया होता है खेल। लेकिन ये बात पाकिस्तान के जाहिलों को कौन समझाए।भारत के हुक्मरानों ने तो सैकड़ो प्रयास किये यहां तक ट्रेन और बसे भी चलवाई लेकिन पाक अपने कुकर्मी हरकतों से बाज नही आया कौन पाकिस्तानी हुकूमत को समझाए की चीन कभी तेरा बाप नही बन सकता तेरा बाप भारत ही बन सकता है क्यों कि भारत के हुक्मरान संस्कारिक थे और संस्कारिक रहेंगे पाकिस्तान आज भी सच्चे मन से अपना दिल साफ करले और भारत के शरण में आजाये भारत के प्रधान मंत्री पाकिस्तान पर दया जरूर करंगे कश्मीर का राग अलापना बन्द करे कश्मीर के उन चंद गद्दारों को जो पाकिस्तान को अपना बापू मानते हैं सुधर जाना चाहिए क्योंकि जिस दिन ये गद्दार ये समझ लेंगे की हम भारतिय हैं और भारत ही हमारा देश है तो कश्मीर को स्वर्ग बनने से कोई रोक नही सकता फिर पाकिस्तान कोई मसला ही नही होगा क्योंकि पाकिस्तानी आतंकियों को कश्मीर के चंद गद्दार ही आजतक पनाह देते आये हैं जिस दिन ये गद्दार पकड़ में आगये तो इनकी ख़ैर नही

तकलीफ वहां होती है जब पाकिस्तान की जीत पर कश्मीर में पटाखे फोड़ कर जीत का जस्न कुछ गद्दारों के द्वारा मनाया जाता है इससे भी ज्यादा दुख तब होता है जब भारत के नामचीन टी वी चैनलों के डिबेट शो में इस विषय से हट कर भारत के बड़े राजनीतिक दलों के प्रवक्ता विषय से हट कर एक दूसरे को नीचा दिखाने में लग जाते हैं

इससे पहले भी भारत पाकिस्तान का तीनों फॉर्मेट में क्रिकेट मैच हो चुका है जिसमे दोनों टीम एक दूसरे से हारते जीतते रहे है तब कभी इसे इस्लाम की जीत या हार नही कहा गया हमे समझना होगा कि ऐसा वक्त आया क्यो। जब अपना ही सिक्का खोटा हो तो कोई क्या बोले यही भारतीय टीम है जो तीनों फॉर्मेट का विश्व विजेता है भारत की टीम नम्बर वन में गिनी जाती है फिर पाक टीम ने बिना विकेट खोये मैच कैसे जीत लिया चलिए मान लेते है क्रिकेट अनिस्चत्ताओं का खेल है इसमें कुछ भी परिणाम निकल सकता है लेकिन बार बार शर्मनाक तरीके से हार हो तब क्या कहेंगे ।दूसरा मैच न्यूजीलेंड के साथ शर्मनाक हार को क्या कहेंगे ,,पिच की गलती,,सलेक्टर की गलती,,या खिलाड़ियों की।क्या इस पर डिबेट नही होना चाहिए आज जो भारत की टीम विश्व कप खेल रही है उसमें दुनिया के8श्रेष्ठ खिलाड़ी खेल रहे हैं जो अपने अपने हुनर में माहिर माने जाते है ,,रोहित,विराट,राहुल टॉप बैट्समैन,,बुमरा,भुनेस्वर,शमी बेस्ट बॉलर,,जडेजा,पंड्या बेस्ट आल राउंडर फिर इस तरह शर्मनाक हार क्यों आज इन्हें ये बात तय करनी चाहिए कि ये मैच पैसे के लिए खेल रहे है या देश के लिए मेरा मानना हैः अगर हर खिलाड़ी अपने लिए ही खेलेगा तब भी मैच आसानी से जीता जा सकता है।भारतीय टीम के प्रदर्सन ने भारत के सभी क्रिकेट प्रेमियों को आहत किया है करोड़ों भारतीयों की निगाहें टिकी थी भारत,पाक के मैच पर ।पाकिस्तान से हारकर भारत के खिलाड़ियों ने करोड़ो भारतीय क्रिकेट प्रेमियों का दिल तोड़ा है,,भारतीय कप्तान ने मैच हारने के बाद ग्राउंड में हाथ मिला कर पाकिस्तानी कप्तान को बधाई दी इसे कहते हैं इसपोर्टसमेंन इस्पीड ,विराट ने एक खिलाड़ी और सभ्य भारतीय होने का परिचय दिया।यर उस मूर्ख पाकिस्तानी मंत्री को देखना चाहिये देखा जाय तो भारतीय कप्तान ने मैदान में ही बता दिया था कि ये जीत किसी धर्म या मजहब का नही है।खेल और खिलाड़ी की जीत हैअन्त में यही कहा जा सकता है लगातार 2 हार से भारतीय खिलाड़ियों को सबक लेना चाहिए अति विस्वास हमेशा घातक होता है क्योंकि खेल भी मैदान के अंदर एक जंग है जिसमे दोनों टीमो में जीत की होड़ लगी रहती है।लेकिन ये भी सत्य है कि कभी विश्व कप में बंगला देश ने भी बड़ा उलट फेर किया था इसलिए क्रिकेट को अनिस्चत्ताओं का खेल कहा गया है,,,

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