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औषधीय पौधों के कृषिकरण एवं संग्रहण का जैविक प्रमाणीकरण कार्यशाला

औषधीय पौधों के कृषिकरण एवं संग्रहण का जैविक प्रमाणीकरण कार्यशाला

वर्तमान में आयुष औषधि की मांग तेजी से बढ़ने के कारण जड़ी बूटियों की मांग में वृद्धि देखी जा रही है, वहीं दूसरी ओर वनों से विनाश पूर्वक दोहन से अब जड़ी बूटियों की वनों में उपलब्धता में कमी आई है, इसलिए आयुष मिशन के माध्यम से आयुष विभाग भारत सरकार ने औषधीय पौधों के कृषिकरण हेतु विशेष पहल प्रारंभ किया है। कृषकों को विशेष मांग आधारित औषधीय पौधों के कृषिकरण हेतु 30% से लेकर 75% अनुदान के साथ साथ जैविक कृषिकरण को बढ़ावा देने के लिए एक अनुकरणीय पहल की है। आयुष विभाग भारत सरकार के सहयोग से क्वालिटी कांउसिल आफ इंडिया नई दिल्ली जो भारत की सबसे बड़ी एवं विश्वसनीय प्रमाणीकरण संस्था है उनके द्वारा छत्तीसगढ़ के औषधीय पौधों के कृषकों एवं संग्राहकों को जैविक प्रमाणीकरण हेतु प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य की परंपरागत ज्ञान एवं वनौषधि विकास फाउंडेशन के सहयोग से
दिनांक 08//03/2022 को एथनिक रिसोर्ट सरोदा दादर चिल्फी पर्यटन विभाग छत्तीसगढ़ में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई है। परंपरागत ज्ञान एवं वनौषधि विकास फाउंडेशन के डायरेक्टर निर्मल अवस्थी ने बताया कि वन मंडलाधिकारी कवर्धा के मार्गदर्शन में चार जिलों जिनमें मरवाही, कोरबा, मुंगेली, कबीर धाम से लगभग 50 कृषकों एवं संग्राहकों को इस एक दिवसीय जैविक प्रमाणीकरण के प्रशिक्षण हेतु आमंत्रित किया गया है। क्वालिटी कांउसिल आफ इंडिया नई दिल्ली के दो ख्याति प्राप्त विषय विशेषज्ञों के द्वारा छत्तीसगढ़ के वातावरण अनुकूल औषधीय पौधों के कृषकों को औषधीय पौधों के जैविक कृषिकरण हेतु जागरूक करना है।

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