“लक्ष्य” शिविर के दूसरे दिन बच्चों ने जाना आत्मा-परमात्मा का रहस्य


योग और नैतिक शिक्षा से हो रहा उज्जवल भविष्य का निर्माण
कोटमीसुनार। भाठापारा स्थित ब्रह्माकुमारीज़ सेवाकेन्द्र, प्रभु-अनुराग भवन में आयोजित 7-दिवसीय ‘लक्ष्य’ बाल संस्कार शिविर के दूसरे दिन बच्चों में भारी उत्साह दिखा। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य बढ़ते हुए बच्चों का सर्वांगीण विकास करना है।
शारीरिक स्वास्थ्य और एकाग्रता पर ज़ोर
सत्र की शुरुआत ब्रह्माकुमारी शशिप्रभा दीदी के मार्गदर्शन में योगाभ्यास से हुई। संगठन मंत्र के पश्चात बच्चों ने गर्दन, कंधों और पैरों के सूक्ष्म व्यायाम के साथ-साथ कपालभाति, अनुलोम-विलोम और अग्निसार जैसे प्राणायामों का अभ्यास किया। दीदी ने बताया कि सही मुद्रा में बैठने से नर्वस सिस्टम सक्रिय रहता है और प्राणायाम से बुद्धि प्रखर होती है, जिससे पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ती है। बच्चों को विशेष समझाइस दी गई कि व्यायाम के तुरंत बाद पानी न पिएं।
कहानियों और गीतों से आध्यात्मिक बोध
राजयोग शिक्षिका बीके शशिप्रभा ने ‘हाथी और पांच दोस्तों’ की प्रेरक कहानी के माध्यम से परमात्मा के वास्तविक परिचय को स्पष्ट किया। उन्होंने बच्चों को समझाया कि आत्मा भृकुटी के बीच चमकते हुए एक अजब सितारे की तरह है, और ‘परमात्मा भी ज्योति बिंदु स्वरूप हैं जो ‘परमधाम’ सुनहरे लाल प्रकाश की दुनिया में रहते हैं।
सांस्कृतिक प्रस्तुति और देशभक्ति का संगम
शिविर में संगीत के माध्यम से भी शिक्षा दी गई। बच्चों ने सुमधुर स्वर में ”ईश्वर अपने साथ है,डरने की क्या बात है सदा सफलता साथ हमारे हाथ में उसके हाथ है” और “मां भारती पुकारती ” का अभ्यास किया। ‘सर्वे भवंतु सुखिनः’ की प्रार्थना के साथ सभी के कल्याण की कामना की गई।
नैतिक मूल्य और भविष्य के लक्ष्य
सत्र के दौरान बच्चों को चोरी न करने, गाली न देने और माता-पिता व गुरुजनों का सम्मान करने के संस्कार दिए गए। छोटे-छोटे बच्चों ने अपने लक्ष्य का निर्धारण करने का संकल्प लियाl एक मूल्यवान मानव बनना मनुष्य के जीवन का प्रथम लक्ष्य होना चाहिए। जिससे जीवन में आगे बढ़ते हुए हम सबके मददगार बन सके। *गृहकार्य*
बच्चों को दिन भर की दिनचर्या में पांच संकल्प मन में दोहराने मैं खुश हूं, मैं शांत हूं, मैं फिट हूं स्वस्थ हूं, मेरे संबंध मधुर है, मैं भगवान का प्यारा बच्चा हूं का अभ्यास’होमवर्क’ में दिया गया है। दीदी ने बताया कि अनुशासन और सीखने में रुचि दिखाने वाले बच्चों को शिविर के अंत में पुरस्कृत किया जाएगा।


