अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर संतोष ताम्रकार ने साझा की डॉ. बुधरी ताती और सुनीता गोडबोले की प्रेरक कहानी

AP न्यूज विश्वराज ताम्रकार जिला ब्यूरो केसीजी
बस्तर की बेटियों ने सेवा और समर्पण से रचा इतिहास
खैरागढ़ छुईखदान गंडई : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर समाजसेवी श्रीमति संतोष ताम्रकार ने बस्तर क्षेत्र की दो प्रेरणादायी महिलाओं की सफलता और सेवा की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की महिलाएं कठिन परिस्थितियों में भी समाज सेवा, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं।
बस्तर जिले के हीरानार गांव की डॉ. बुधरी ताती नक्सल प्रभावित क्षेत्र में रहते हुए भी वर्षों से महिलाओं को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाने का कार्य कर रही हैं। घने जंगलों और कठिन परिस्थितियों के बीच उन्होंने 1984 से समाज सेवा को अपना जीवन समर्पित कर दिया। बस्तर क्षेत्र में लोग उन्हें स्नेहपूर्वक “बड़ी दीदी” के नाम से पुकारते हैं। उनके इसी समर्पण और सेवा भाव के लिए उन्हें पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। उनके साथ कई सहयोगी बहनें भी अभूझमाड़ के वनवासी गांवों में शिक्षा और जागरूकता फैलाने के कार्य में जुटी हुई हैं।
इसी तरह दंतेवाड़ा जिले के बारसूर क्षेत्र में सुनीता गोडबोले अपने पति डॉ. रामचंद्र गोडबोले के साथ वर्ष 1990 से वनवासी समाज की सेवा में लगी हुई हैं। दुर्गम और नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के बावजूद इस दंपति ने जनजातीय समाज को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और शिक्षा के क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया। सुनीता गोडबोले ने अपने जीवन को पूरी तरह सेवा के लिए समर्पित कर दिया और कुपोषण जैसी गंभीर समस्या को खत्म करने के लिए निरंतर प्रयास किए।
उन्होंने पुणे से बस्तर के बारसूर को अपनी कर्मभूमि बनाकर वनवासी बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य तथा पोषण के लिए अथक परिश्रम किया। कठिन परिस्थितियों में भी उनके प्रयासों से क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।
संतोष ताम्रकार ने कहा कि देश में ऐसी अनेक महिलाएं हैं, जिन्होंने अपने व्यक्तिगत सपनों से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्र के लिए काम किया है। उन्होंने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके गांव में एक वर्ष तक कार्यरत रही प्रिंसिपल मैडम ने भी सीमित समय में विद्यार्थियों को शिक्षा, अनुशासन और संस्कारों से परिपूर्ण कर दिया। आर्थिक परिस्थितियां कठिन होने के बावजूद उन्होंने अपने छोटे भाई-बहनों को पढ़ाकर उनका भविष्य संवारा और स्वयं दूसरों के लिए प्रेरणा बन गईं।
उन्होंने अंत में कहा कि ऐसी सभी महिलाओं का समर्पण और त्याग समाज के लिए प्रेरणा है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उन्होंने उन सभी महिलाओं को नमन किया, जिन्होंने अपना जीवन दूसरों की सेवा और समाज के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया।


