जिला पंचायत सहकारिता सभापति द्वारा औचक निरीक्षण, समितियों में मिल रही कई कमजोरियां!


जिला पंचायत सहकारिता सभापति द्वारा औचक निरीक्षण, समितियों में मिल रही कई कमजोरियां!
जिला पंचायत के सहकारिता एवं उद्योग सभापति द्वारा सेवा सहकारी समिति लिमो में औचक निरीक्षण किया जिसमें समिति प्रबंधक यशवंत वर्मा के विरूद्ध मिली गंभीर शिकायतों के मद्देजर निरीक्षण किया गया, जिसमें सेवा सहकारी समिति गंडई से सेवा सहकारी समिति लिमो में प्रतिनियुक्ति पर लिमो पर प्रभार मिलना बताया गया जबकि प्रतिनियुक्ति में समिति के कर्मचारी को कही भेजा नहीं जा सकता, इसके लिए नियुक्त करने वाले उच्च अधिकारी जिम्मेदार हैं।
फसल बीमा गबन के आरोप में पूछे जाने पर यशवंत वर्मा ने बताया की ऐसा आरोप कभी लगा ही नहीं। आरोप बेबुनियाद है जब की सक्षम अधिकारी के द्वारा यशवंत वर्मा को गबन का आरोपी पाया गया एवं इन्हें दोषी अपचारी कर्मचारी कहा गया तथा गंडई समिति को गबन की राशि वसूली एवं कार्यवाही कर सूचित करने के लिए आदेशित किया गया परिणामतः यशवंत वर्मा को गंडई समिति की आमसभा में बर्खास्त करने का आदेश पारित किया गया तथा गबन की राशि वसूली की गई गंडई समिति से इन्होंने अपना इस्तीफा भेजा, उसके बाद संबंधित अधिकारियों ने लिमो समिति में प्रति नियुक्ति देकर पदस्थ किया ।
यशवंत वर्मा पर आरोप है कि वे मूलतः खैरागड़ विकासखंड के निवासी हैं, जिन्होंने छूईखदान विकासखंड के निवासी होने का फर्जी प्रमाण पत्र देकर नौकरी प्राप्त किया है। जिसमें 11 वीं कक्षा को कन्या उच्चतर मध्यमिक शाला खैरागढ़ से पास करने का प्रमाण पत्र दिया गया।
लिमो समिति में इनकी प्रतिनियुक्ति के विरूद्ध गंडई के तत्कालीन अध्यक्ष द्वारा संबंधित न्यायलय में आवेदन प्रस्तुत किया गया जिसका प्रकरण संयुक्त पंजीयक कार्यालय रायपुर में विचाराधीन है, जिसे फर्जी बताया गया। लिमो में 1600 क्विंटल धान शॉर्टजी बताया गया जो सन्देह के घेरे में है।
यशवंत वर्मा के द्वारा आरोपों को फर्जी बताया गया है, लेकिन पूरे आरोप सही होने का प्रमाण दस्तावेज मौजूद हैं, क्या ऎसे कर्मचारी एवं प्रतिनियुक्ति देने वाले अधिकारियों के विरूद्ध शासन कोई कार्यवाही कर पाएगा ?
सभापति द्वारा हनईबंद एवं गंडई समिति में जाने पर वहा पर प्रबन्धको को मीटिंग में होना बताया ।

