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कवर्धा: विशेष पिछड़ी बैगा समाज की संस्कृति संवर्धन और समाज को मुख्यधारा में लाने के लिए गए बड़े फैसले – आदिम जाति विकास मंत्री श्री प्रेम साय टेकाम

विशेष पिछड़ी बैगा समाज की संस्कृति संवर्धन और समाज को मुख्यधारा में लाने के लिए गए बड़े फैसले – आदिम जाति विकास मंत्री श्री प्रेम साय टेकाम

आदिम जाति विकास मंत्री श्री टेकाम ने किया तीन दिवसीय बैगा बाल महोत्सव का शुभारंभ

बैगा समाज को विकास के मुख्यधारा में जोड़ने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार प्रतिबद्ध

कवर्धा, 20 फरवरी 2021। प्रदेश के आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक स्कूल शिक्षा मंत्री श्री प्रेम साय टेकाम ने कबीरधाम जिले के बैगा बाहूल्य पंडरिया विकासखसड के सुदूर एवं दुर्गम वनांचल ग्राम छिन्दीडीह में तीन दिवसीय बैगा महोत्सव का विधिवत शुभारंभ किया। मंत्री श्री टेकाम ने बैगा बाल महोत्सव का शुभांरभ करते हुए समाज स्थानीय वनोपज संसाधनों से उपलब्ध समाग्री की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होने बैगा नर्तक दलों के साथ गीत-संगीत में हिस्सा लेते हुए बैगा आदिवासियों के साथ नृत्य भी किया। उन्होने तीन अलग-अलग बैगा नर्तक दलो को 45 हजार रूपए के चेक वितरण भी किया। लगातार 11वां वर्ष से बैगा समाज और अस्था समिति द्वारा यह बैगा बाल महोत्सव का आयोजन हो रहा है। महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर श्री नीलकंठ चन्द्रवंशी, श्री मुकुंद माधव कश्यप, श्री राम कुमार सिन्हा, बैगा समाज के प्रदेशाध्यक्ष श्री ईतवारी बैगा,श्री लमतू राम बैगा, बैगा विकास अभिकरण के जिला अध्यक्ष श्री पुसूराम बैगा, बैगा समाज के जिला अध्यक्ष श्री कामू बैगा और कोरिया, मुंगेली, गौरेला पेन्ड्रा मरवाही, जिले में निवासरत बैगा समाज के जिला अध्यक्ष और पदाधिकारी विशेष रूप से उपस्थित थे।

मंत्री श्री टेकाम ने बैगा बाल महोत्सव का शुभारंभ सभा को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश के नई सरकार मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजातियों की संस्कृति, और उनके सरंक्षण और संबर्धन के साथ-साथ समाज को विकास के मुख्यधारा में लाने के लिए गई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए है। उन्होने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में पांच विशेष पिछड़ी जनजातियां बैगा, अबूझमाड़िया, कमार, पहाड़ी कोरबा और बिरहोर निवासरत है। इन सभी विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास के लिए मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में बैगा के विकास के लिए विशेष अभिकरण का गठन किया गया है। विशेष पिछडी जनजातियों के कला-संकृति और उनके वेश-भूषा की महत्व को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण फैसले लिए गए है। उनहोने कहा कि बैगा बोली और भाषा की विशेषता और महत्व को बनाए रखने के लिए बैगानी भाषा में पाठ्यपुस्तक का प्रकाशन किया गया है। अब यहां के बच्चे अपने भाषा में भी पुस्तक का अध्ययन कर रहे है। उन्होने कहा कि प्रदेश में निवासरसत विशेष पिछडी जनजातियों को विकास के मुख्यधारा में लाने के लिए छत्तीसगढ़ के भूपेश सरकार प्रतिबद्ध है और के लिए ठोस निर्णय भी लिए जा रहे है। आने वाले समय में यह पिछड़ी जनजातियां विकास और शिक्षा से जुड़ेगे। उन्होने कहा कि प्रदेश को कबीरधाम जिला पहला जिला है जहां बैगा समाज के पढे-लिखें सौकड़ों शिक्षित युवक-युवतियों को शाला संगवारी के रूप में चयन कर रोजगार से जोड़ा गया है। राज्य सरकार की नीति के परिणाम है कि आज बैगा समाज के युवक-युवतियां स्कूलों में बच्चों को पढ़ा रही है।
मंत्री श्री टेकाम ने कहा कि वनांचल और जंगलों के बीच सदियों से निवास करने वाले लोगों के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए अनेक आयोजनाएं संचालित कर रही है। इसके अलावा उन्हे आर्थिक रूप में मजबूत और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर देने के लिए वनोपज सग्रहण के लिए नीतियां बनाई गई है। वनोपज, महुआ का समर्थन मूल्य 17 रूपए से बढ़ाकर 30 रूपए प्रति किलो की दर निर्धारित किया गया है। तेन्दूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक दर 25 सौ रूपए से बढ़ाकर सीधे 4 हजार रूपए कर दिया गया है। प्रदेश भर में 856 हाट-बाजारों में लघु वनोपज की खरीदी की नई व्यवस्था देने से प्रदेश के किसानों से लेकर वनो में निवारत लाखों वनवासियों को इसका सीधा लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा तेंदूपत्ता संग्राहकों को समाजिक सुरक्षा का लाभ देने के लिए सहित शहीद महेन्द्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक समाजिक सुरक्षा योजना बनाई गई है। पूरे प्रदेश में इस योजना के तहत तेंदूपत्ता संग्राहक में लगे हुए लगभग 12 लाख 50 हजार संग्राहक परिवारो को समाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि संग्राहक परिवार के मुखिया की मृत्यु होने पर उनके उत्तराधिकारी को 4 लाख रूपए देने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में प्रदेश के नई सरकार द्वारा लोक व जनकल्याण, किसानों, वन वासियों और प्रदेश के नागरिकों के आर्थिक उत्थान व उनके सर्वाग्रीण विकास के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही है।
जाति तथा अनुसूचित जाति विकास पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक स्कूल शिक्षा मंत्री श्री प्रेम साय टेकाम ने कहा राज्य सरकार प्रदेश के सर्वाग्रीण विकास, लोगों के आर्थिक विकास, उत्थान और किसानों के जीवन को विकास के मुख्यधारा से जोड़ते हुए प्रदेश के सेवा और जतन की दिशा में काम कर रही है। उन्होने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लिए गए ठोस फैसले जैसे कृषि ऋण माफी, सिंचाई कर माफी, धान के समर्थन मुल्य 25 सौ रूप्ए प्रति कि्ंवटल दर,समर्थन मूल्य पर 52 प्रकार के लघु वनोपजों की खरीदने की व्यवस्था, महुआ का समर्थन मुल्य 17 रूपए से बढ़ाकर 30 रूपए समर्थन मूल्य करने, तेन्दूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक दर 25 सौ रूपए से बढ़ाकर सीधे 4 हजार रूपए करने, प्रदेश भर में 856 हाट-बाजारों में लघु वनोपज की खरीदी की नई व्यवस्था देने से प्रदेश के किसानों से लेकर वनो में निवारत लाखों वनवासियों का आत्मविश्वास बढ़ा है। उन्होने कहा कि मुख्यमंत्री श्री बघेल के नेतृत्व में 15 वर्षों से लंबित 207 करोड़ रूपए का सिंचाई कर माफ किया है। उन्होने कहा कि हमारा छत्तीसगढ़ राज्य देश के अग्रणीय राज्यों में शामिल हो गया है। उन्होने कहा कि देश में धान का सर्वाधिक समर्थन मूल्य पर धान खरीदी करने वाला पहला राज्य बन गया है। देश में महुआ का सर्वाधिक समर्थन मूल्य 30 रूपए प्रति किलो की दर वनोपज खरीदने वाला पहला राज्य बन गया है। उन्होने कहा कि सर्वभौम पीडीएस योजना के तहत सभी परिवारों को राशन देने में देश के पहला राज्य बन गया है। गौधन योजना के तहत दो रूपए प्रतिकिलो की दर से गोबर खरीदी करने वाला देश में पहला राज्य बन गया है। उन्होने कहा कि जैविक खेती करने वाला देश में छत्तीसगढ़ भी पहला राज्य बनने वाला है। उन्होने कि प्रदेश सरकार जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य भर में गोबर से जैविक खाद बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होने कहा कि प्रदेश में नई सरकार बनते ही किसानों के हित में किसानों के कल्याण के लिए किए गए वादा को निभाते हुए राज्य के 16 लाख 50 हजार किसानों के 8 हजार 818 करोड़ रूपए का कर्जा माफ कर देश में किसानों के कर्जा माफ करने वाला पहला राज्य बन गया है।
मंत्री श्री टेकाम ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल द्वारा किसानों के ऋण माफ करने के बाद कर्ज के बोझ से खेती-किसानी छोड़ चुके किसान भी कर्जमाफी के बाद पुनः खेती की ओर लौटने लगे है। कर्जा माफ होने से किसानों के चहरे में खुशहाली आई है, किसानों का आत्मविश्वास बढ़ा है

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