कवर्धा :-SDM कार्यालय कवर्धा में साहब से ज्यादा पावर में रहते हैं कर्मचारी पत्रकार के साथ किया गया अभद्र व्यवहार

कवर्धा :-SDM कार्यालय कवर्धा में साहब से ज्यादा पावर में रहते हैं कर्मचारी पत्रकार के साथ किया गया अभद्र व्यवहार।
कवर्धा। पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथे स्तम्भ के रूप में माना जाता है लेकिन कुछ लोग अपने रौब के सामने पत्रकारों को तुच्छ समझते है। और अपने असली चेहरे को दिखा देते है। देश के कुछ अधिकारी अपनेे रौब के सामने पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार करते है। और अपनी गलती छुपाने के लिए दबाव बनाते है। कभी-कभी तो झुठे केस में फंसाने और जान से मारने की धमकी दे देते है। लेकिन कई भ्रष्ट अधिकारी यह जान ले कि जिस दिन कलम के सिपाहियों का मूढ आफ होगा तो सारी हेकडी तुरन्त निकल जायेगी।
दरअसल एक ऐसा ही मामला छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले के SDM कार्यालय में हुआ, आज उस अधिकारी के द्वारा एक पत्रकार के साथ बत्तमीजी किया गया।वो पत्रकार अपने जाति प्रमाण पत्र के लिए गया था जिसमे सभी आवश्यक दस्तावेज उनके द्वारा लगाया गया था। जिसमे ऑनलाइन आवेदन के बाद जाति के लिए SDM कवर्धा के यहाँ पदस्थ सहायक ग्रेड 3 अनिता यादव के आईडी में गया था। वह पत्रकार जाति प्रमाण पत्र के लिए दर-दर भटकते हुए कई बार एसडीएम कार्यालय के चक्कर लगा रहा था। उसके बाद अंततः एसडीएम कार्यालय में पदस्थ अधिकारी अनिता यादव ने पत्रकार के साथ बदतमीजी करते हुए ,ऊंची आवाज में दसतावेज सही लगाओ,और यहां से निकल जाओ ऐसा कहते हुए आवेदन को वापस किया। लगभग कवर्धा में जितनी भी जाति वापस होती है जिसमे दस्तावेज लगा रहते हैं लेकिन नही लगा है कहा कर वापस भेज दिया जाता है। अनिता यादव ने भला बुरा कहते हुए एक पत्रकार के साथ बदतमीजी किया।देखा जाता है कि कई जगह पत्रकारो को कई जगह जलील होना पड़ता हैं। बिना पैसा के काम करने वाले सभी पत्रकार को गलत नजर से देखा जाता है। पत्रकारों के लिए एक नियम बनने चाहिए जिसमें पत्रकार निर्भीक होकर अपना काम कर सके।
देश में बहुत ऐसे भी अधिकारी हैं जो पत्रकारों का सम्मान करते है क्योकि उनको पत्रकारिता की कीमत समझ में आती है और पत्रकारों का सम्मान करते है। एक चीज सर्वविदित है कि कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के वजह से ही अधिकारी वर्ग भी भ्रष्टाचार में लगातार आरोप-प्रत्यारोप हो रहे हैं।
तब तक देश का विकास सही से नही हो पायेगा। और कलम के सिपाहियों को समाचार लिखने या लगाने में हमेशा से भ्रष्ट अधिकारी अड़ंगा लगायेंगे। आखिर कब तक पत्रकारों पर भारी पडते रहेंगे भ्रष्ट अधिकारी? कब तक दबाते रहेंगे सच की आवाज? कब तक पत्रकारों के साथ होगा दुर्व्यवहार?