बढ़ते अपराधों में कमी दिखाने थानों में एफआईआर नहीं लिखा जा रहा

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की पत्रकारों से चर्चा
रायपुर/ 07 अप्रैल 2026। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पत्रकारो से चर्चा करते हुए कहा कि सरकार प्रदेश की बिगड़ चुकी कानून व्यवस्था को संभाल तो पा नहीं रही है, अब अपनी गलती छुपाने सरकार थानों में एफआईआर दर्ज नहीं होने दे रही। बढ़ते अपराधों में कमी दिखाने थानों में एफआईआर नहीं लिखा जा रहा, इस कारण पीड़ित को न्याय मिलने की संभावना खत्म हो गयी तथा अपराधियों के हौसले बुलंद हो गये है। अपराध घटित होने के बाद पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं कर अपराधों की संख्या में कमी होने के प्रयास में लगी है ताकि सरकार अपनी पीठ थपथपा पाये। आम आदमी, सरकार और पुलिस के इस रवैये से परेशान हो गया है। चोरी, जालसाजी, मारपीट तथा प्रताड़ना और साइबर ठगी जैसे मामलों में अब राज्य में एफआईआर कराना बहुत कठिन हो गया है। कानून के अनुसार एफआईआर दर्ज करना पुलिस की बाध्यता है जिस मामले में एफआईआर नहीं किया जा सकता उसमें थाने से कोर्ट जाने के लिए परिवाद दायर करने की लिखित सलाह दी जानी चाहिए। प्रदेश में तो सरकार के दबाव में पुलिस फरियादी को वापस लौटा रही है। पुलिस के इस टालमटोल वाले रवैये के कारण कागजों में भले अपराध कम दिखेगा, हकीकत में अपराध बढ़ रहे है।
सीजीपीएससी की परीक्षा को लेकर आयोग और सरकार गंभीर नहीं
सीजीपीएससी परीक्षा को लेकर सरकार और आयोग गंभीर नहीं है। चुनाव के समय राज्य लोकसेवा आयोग ( PSC ) की परीक्षा को संघ लोकसेवा आयोग ( UPSC ) की तर्ज पर कराने का दावा करने वाली भाजपा सरकार राज्य लोकसेवा आयोग की परीक्षा की समय सारणी व्यवस्थित नहीं बनावा पा रही है। परीक्षार्थियों को प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा में मात्र 51 दिन का ही अंतराल दिया गया है जबकि पिछले वर्ष यह 104 दिन का था। इस वर्ष राज्य सेवा परीक्षा के प्रारम्भिक परीक्षा का परिणाम 25 मार्च 2026 को जारी किया गया और मुख्य परीक्षा 16, 17, 18, 19 मई 2026 को आयोजित की जाने वाली है तो क्या वजह की अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए इतना कम समय मात्र 51 दिन का समय दिया गया है जबकि पिछले वर्ष के राज्य सेवा परीक्षा के प्रारम्भिक परीक्षा के परिणाम और मुख्य परीक्षा के बीच 104 दिन का गेप PSC परीक्षा दिलाने वाले अभ्यर्थियों को दिया गया था। इसके पिछे क्या वजह है? क्या युवाओं का हितैषी होने की दावा करने वाले सरकार बताएगी? क्या छत्तीसगढ़ लोकसेवा आयोग अध्यक्ष कारण बतायेंगे?
*सरकार सुनिश्चित करे आर.टी.ई. में बच्चों का एडमीशन होगा
- प्रदेश सरकार की लापरवाही के कारण इस साल गरीबों के बच्चों का एडमीशन अधर में लटका हुआ है। फीस की राशि का भुगतान नहीं करने और फीस की राशि नहीं बढ़ाने के कारण प्राईवेट स्कूल वाले आर.टी.ई. के तहत बच्चों का एडमीशन देने से मना कर दिये है। कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि सरकार तुरंत प्राईवेट स्कूल के प्रतिनिधियों से बात करे, गतिरोध समाप्त करे, ताकि बच्चों का एडमीशन हो सके। कांग्रेस की यूपीए सरकार ने गरीबों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने आर.टी.ई. लेकर आई थी, भाजपा सरकार उसमें अवरोध पैदा कर रही। *अफीम की खेती को सरकार का संरक्षण साबित हो गया
- दुर्ग जिले के समोदा में बहुचर्चित अवैध अफीम की खेती को मक्का बताने पर निलंबित की गईं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी को जांच रिपोर्ट आए बिना ही सेवा में बहाल कर दिया गया। सरकार के रवैये से बेहद स्पष्ट है कि पूरे छत्तीसगढ़ में अवैध नशे की खेती भाजपा सरकार के संरक्षण में ही हो रहा है। अब तक ना तो भाजपा नेता विनायक ताम्रकार को पार्टी से निष्कासित किया गया है और ना ही किसी अधिकारी कर्मचारी पर कोई ठोस कार्रवाई हुई है, निलंबन कोई सजा नहीं फिर भी बहाली के लिए इतनी तत्परता क्यों? जांच रिपोर्ट का इंतजार तो किया गया होता? अब तो सरकार के रवैया से जांच की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी प्रदेश की जनता को भरोसा नहीं रहा है।
धर्म स्वातंत्रय विधेयक पर हस्ताक्षर राज्यपाल ने किया है उम्मीद करता हूं यह कानून किसी के मौलिक अधिकारों के हनन का कारण नही बनेगा इसका दुरूपयोग नही होना चाहिये। इसके साथ ही हम राज्यपाल से मांग करते है कि छत्तीसगढ़ आरक्षण शंशोधन विधेयक भी तीन साल से अधिक समय से राजभवन में लंबित है। इसमें राज्य के आदिवासियों अनुसूचित जाति तथा पिछड़ा वर्ग का अधिकार समाहित है इस विधेयक पर भी वे हस्ताक्षर करें। इस विधेयक पर हस्ताक्षर क्यों नही हो रहा है?



