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विश्व का सबसे बड़ा साहित्य उत्सव में सहभागी बने डॉ. पीसी लाल यादव

गंडई पंडरिया-भारत सरकार संस्कृति
मंत्रालय की ओर से साहित्य अकादमी नई दिल्ली द्वारा दिनांक 11 मार्च से 16 मार्च तक विश्व का सबसे बड़ा साहित्य उत्सव “साहित्योत्सव – 2024” का वृहद आयोजन साहित्य अकादमी परिसर नई दिल्ली में किया गया।जिसमें अंचल के साहित्यकार डॉ.पीसी लाल यादव ने अकादमी के आमंत्रण पर भाग लेकर छत्तीसगढ़ी का सम्मान बढ़ाया। उक्त गरिमामय आयोजन में देश के विभिन्न प्रदेशों से 175 भाषायों के साहित्यकारों ने भाग लिया।
175 सत्रों में आयोजित कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन संस्कृति राज्य मंत्री ,भारत सरकार माननीय  अर्जुन राम मेघवाल ने किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि साहित्यकार साधक होता है। साधक साहित्यकार ही एक बेहतर संस्कृति,एक बेहतर समाज और एक बेहतर देश का निर्माण करता है। अकादमी के अध्यक्ष श्री माधव कौशिक ने भारत को भाषाओं का सबसे बड़ा संग्रहालय निरूपित किया।सचिव  के.निवासराव ने साहित्य अकादमी की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
दूसरे दिन रवींद्र भवन के मेघदूत मुक्ताकाशी मंच पर 175 भाषायों के कवियों ने काव्य पाठ कर सबसे लंबी रिडिंग रिले का रिकार्ड बनाया। डॉ.पीसी लाल यादव ने भी छत्तीसगढ़ के पारंपरिक सोहर गीत ” लाल घर बजत हे बधाई ” प्रस्तुत कर छत्तीसगढ़ व छत्तीसगढ़ी की ओर से सहभागिता निभायी।आयोजन की गरिमा तब और बढ़ गई जब प्रसिद्ध लेखक व गीतकार गुलजार की उपस्थिति में साहित्य अकादमी को विश्व रिकॉर्ड का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। कार्यक्रम का मूल्यांकन व निरीक्षण लन्दन के वर्ल्ड बुक ऑफ रिकार्ड की देख-रेख में हुआ।
आयोजन के चौथे दिन चौथे सत्र के बहुभाषी कवि सम्मिलन में साहित्यकार ,संस्कृति कर्मी व सेवानिवृत्त व्याख्याता डॉ.पीसी लाल यादव ने अपनी छत्तीसगढ़ी कविताओं का पाठ किया। सत्र की अध्यक्षता मिजो भाषा के वरिष्ठ कवि जोरामडिंगरा ने की।  रामदास बिरजे ने चंदगढ़ी, दौलत राम रजवार ने असमी,  रामप्रसाद गमांगा ने सौंरा, राजेश्वरी ने हक्कीपीक्की भाषा में कविताएँ प्रस्तुत कर हिंदी व अंग्रेजी में अनुवाद प्रस्तुत किया। डॉ.पीसी लाल यादव ने अपनी मातृभाषा छत्तीसगढ़ी में दो कविताएँ “हाय रे गोंदाफूल ” तथा ” बेरा अउ लहरा ” की प्रस्तुति देकर खूब तालियाँ बटोरीं। फिर छत्तीसगढ़ी कवितायों का हिंदी अनुवाद बता कर छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ी का गौरव बढ़ाया।
साहित्योत्सव -2024 में भाग लेकर छत्तीसगढ़ी का मान बढ़ाने के लिए साहित्यकारों, कलाकारों व इष्ट-मित्रों ने डॉ. यादव को बधाइयाँ प्रेषित कर शुभकामनाएं दी हैं।

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