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बोड़ला की 6.24 एकड़ शासकीय जमीन पर घमासान, नगरवासियों ने जताई आपत्ति

सुनील केशरवानी बोले – जमीन की कमी से बस स्टैंड, बाजार और हॉकी स्टेडियम तक नहीं बन पाए, फिर भी संस्था को देने की तैयारी

बोड़ला – कवर्धा जिले के बोड़ला नगर में शासकीय भूमि आवंटन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। तहसीलदार न्यायालय बोड़ला द्वारा ग्राम बोड़ला पटवारी हल्का नंबर 24 की लगभग 6.24 एकड़ शासकीय भूमि एक संस्था को आवंटित करने के संबंध में जारी इश्तहार के बाद नगरवासियों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।

इस मामले में 12 मार्च 2026 को नगरवासी सुनील केशरवानी और गजेंद्र कश्यप ने तहसीलदार बोड़ला के समक्ष लिखित आवेदन देकर प्रस्तावित भूमि आवंटन का विरोध दर्ज कराया। आपत्ति पत्र में बताया गया है कि प्रस्तावित भूमि वर्तमान में नगर के सार्वजनिक उपयोग के वाचनालय (पुस्तकालय) परिसर के रूप में है, जो विद्यार्थियों और आम नागरिकों के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण स्थान होना था।

नगरवासी सुनील केशरवानी ने कहा कि बोड़ला नगर पंचायत में पहले से ही जमीन की भारी कमी है। इसी कारण आज तक बस स्टैंड, सर्वसुविधा बाजार, जिमखाना और हॉकी स्टेडियम जैसी मूलभूत सुविधाएं विकसित नहीं हो पाई हैं। उन्होंने बताया कि जगह के अभाव में आईटीआई भवन और नवोदय विद्यालय जैसे महत्वपूर्ण संस्थान भी बोड़ला से बाहर अन्य स्थानों पर स्थापित किए गए।

केशरवानी ने कहा कि इसके बावजूद लगभग 6.30 एकड़ शासकीय भूमि एक संस्था को देने के लिए इश्तहार जारी कर दिया गया, जो नगर के भविष्य और सार्वजनिक हित के विपरीत है। उन्होंने बताया कि जैसे ही उन्होंने यह इश्तहार पढ़ा, उसी दिन लिखित आवेदन देकर इसका विरोध दर्ज कराया और 12 मार्च को पेशी के दौरान न्यायालय में उपस्थित होकर भी आपत्ति दर्ज कराई।

जनप्रतिनिधियों पर साधा निशाना

सुनील केशरवानी ने इस मुद्दे पर नगर के जनप्रतिनिधियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नगर पंचायत बोड़ला के भाजपा और कांग्रेस के नेताओं सहित चुने हुए जनप्रतिनिधियों को अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए, क्योंकि वे नगर की शासकीय जमीन को बचाने में असफल साबित हो रहे हैं और प्रशासन एक निजी संस्था को जमीन देने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित संस्था आरएसएस से जुड़ी हुई है, जो नगर के भीतर इतनी बड़ी जमीन प्राप्त करने की कोशिश कर रही है। केशरवानी ने कहा कि इस मामले में कांग्रेस नेताओं की भी मौन सहमति दिखाई दे रही है और उन्होंने खुलकर विरोध नहीं किया है।

आंदोलन की चेतावनी

सुनील केशरवानी ने कहा कि उन्होंने इस प्रस्ताव के खिलाफ आधिकारिक रूप से आपत्ति दर्ज करा दी है। इसके बावजूद यदि प्रशासन द्वारा जमीन आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है, तो नगरवासियों के साथ मिलकर आंदोलन किया जाएगा।

नगरवासियों की मांग

नगरवासियों का कहना है कि नगर में पहले से ही सार्वजनिक उपयोग की जमीन की कमी है, इसलिए इस भूमि को सुरक्षित रखा जाए। उनका कहना है कि यदि किसी संस्था को भूमि देना आवश्यक हो तो उसे नगर से बाहर किसी अन्य स्थान पर शासकीय भूमि उपलब्ध कराई जाए, ताकि भविष्य में नगर के विकास कार्यों के लिए पर्याप्त जमीन बची रह सके।

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