G-QKE15KJ9P0 25777229988609873
ChhattisgarhDurgखास-खबर

परिंदों की पुकार ने बदली सोच, पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प – संतोष ताम्रकार

AP न्यूज विश्वराज ताम्रकार 

दुर्ग // आज के दौर में जहां विकास की दौड़ तेज हो गई है, वहीं प्रकृति और पर्यावरण लगातार संकट में पड़ते जा रहे हैं। इसी विषय को लेकर श्रीमती संतोष ताम्रकार ने एक भावनात्मक रचना के माध्यम से समाज को जागरूक करने का प्रयास किया है।
उन्होंने अपनी रचना में बताया कि कैसे मनुष्य आसमान को छूने और ऊंचाइयों तक पहुंचने का सपना देखता है, लेकिन परिंदों की वास्तविकता कुछ और ही है। परिंदे भले ही आसमान में उड़ते हों, लेकिन उनका असली बसेरा धरती पर ही होता है। पेड़ों की टहनियां, स्वच्छ पानी और हरियाली ही उनका जीवन आधार हैं।
रचना में यह भी उजागर किया गया है कि आज पेड़ों की कटाई, जल की कमी और फैक्ट्रियों से निकलने वाले जहरीले धुएं के कारण परिंदों का जीवन संकट में है। कई प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी हैं, लेकिन इस गंभीर समस्या की ओर लोगों का ध्यान कम ही जा रहा है।
परिंदों की इस पीड़ा को सुनकर लेखिका का मन विचलित हो जाता है और वह एक महत्वपूर्ण संकल्प लेती हैं। उन्होंने तय किया है कि वह धरती पर रहकर ही अपने सपनों को साकार करेंगी। इसके लिए वह पेड़-पौधे लगाएंगी, हरियाली बढ़ाने का प्रयास करेंगी, जल संरक्षण करेंगी और अपने घर की छत पर परिंदों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करेंगी।
यह रचना न केवल एक भावनात्मक अभिव्यक्ति है, बल्कि समाज को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का सशक्त संदेश भी देती है। आज आवश्यकता है कि हर व्यक्ति इस संदेश को समझे और प्रकृति के संरक्षण में अपना योगदान दे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page