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स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव 15 अगस्त की पावन बेला में माननीय श्री नंदकुमार बघेल जी नवीन मेडिकल कॉलेज कांकेर में ध्वजारोहण कर तिरंगे दी सलामी

कांकेर,छत्तीसगढ़: कांकेर की पावन धरा पर खड़ा तिरंगा नीले आसमान को छुता हुआ हर भारत वासी को प्यार और एकता में बांधता है मां भारती के सच्चे सपूत जिन्होंने अपनी प्राणों की आहुति दे दी ऐसे शहीदों के परिजनों सम्बल और सम्मान देने माननीय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन के पिता जी माननीय नंदकुमार बघेल जी 14अगस्त शाम 4 बजे से विश्राम गृह में पधारे हुए हैं आज 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नवीन मेडिकल कॉलेज कांकेर और विश्राम गृह के प्रांगण में ध्वजारोहण कर तिरंगे को सलामी दी इस अवसर पर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ.गर्ग, डॉ मनीष परते, डॉ धीरज कटारा, डॉ हरी प्रकाश साहू, दिनेश ठाकुर, नितेश सेंडे, सेवेद्र कुमार गजेंद्र, श्रीमती भूनेश्वरी नेगी,आदि समस्त स्टाफ उपस्थित थे साथ ही माननीय श्री रिक्की अरोरा जी (राष्ट्रीय मतदाता जागृति मंच मिडिया प्रभारी एवं प्रवक्ता), राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस इंटक राष्ट्रीय सचिव मीडिया प्रभारी एवं प्रवक्ता,राष्ट्रीय मतदाता जागृति मंच दैत्य गुरु शुक्राचार्य श्री गणेश तिवारी भी मौजूद थे , डॉ गर्ग द्वारा आदरणीय बाबूजी को कोविड 19 से संबंधित सभी जानकारी दिया गया , उन्होंने यह भी अवगत कराया कि माननीय मुख्यमंत्री जी छत्तीसगढ़ शासन द्वारा महाविद्यालय के विधिवत तरीके से बहुत साथ दे रहे हैं । गणेश तिवारी ने स्वतंत्रता दिवस पर विशेष वार्ता में कहा कि भारत औपनिवेशिक दासता से मुक्ति का पर्व मना रहा है। जहां यह स्वतंत्र भारत की 75 वर्षों की यात्रा का मूल्यांकन होगा ,वही इस दौरान चार शताब्दी से अधिक चले संघर्ष और बलिदान का पुण्य स्मरण भी स्वाभाविक ही है।भारत में औपनिवेशिक दासता के विरुद्ध राष्ट्रीय आंदोलन स्व के भाव से प्रेरित था जिसका प्रकटीकरण स्वधर्म स्वराज और स्वदेशी की त्रयी के रूप में पूरे देश को मथ रहा था, इसलिए विदेशी शक्तियों को पग पग पर प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। इन शक्तियों ने भारत की आर्थिक सामाजिक सांस्कृतिक और शैक्षिक व्यवस्था ग्राम स्वालंबन को नष्ट कर डाला यूरोपीय शक्तियों के विरुद्ध भारतीय प्रतिरोध विश्व इतिहास में अनूठा उदाहरण जिसने एक और विदेशी आक्रमण का सशस्त्र प्रतिकार तो दूसरी ओर समाज की विकृतियों को दूर कर सामाजिक पुनर्रचना का काम हुआ देशी रियासतों की राजाओं की अंग्रेजों की शक्ति भर प्रतिकार के साथ ही अंग्रेजों की हस्तक्षेप और जीवन मूल्यों पर अमली के विरुद्ध जनजाति समाज उठ खड़ा हुआ, इनका अंग्रेजों ने क्रूरता पूर्वक नरसंहार किया किंतु भी पीछे नहीं हटे।1857 का स्वतंत्र्य समर इसका ही फलितार्थ था। भारत आज विश्व का सबसे बड़ा और सफल लोकतंत्र है। जिन्होंने भारत के सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए स्वतंत्रता के आंदोलन में योगदान किया। उन्होंने ही संविधान रचना का कर्तव्य निभाया। यही कारण है कि संविधान की प्रथम प्रति में चित्रों के माध्यम से रामराज्य की कल्पना और व्यास बुध तथा महावीर जैसे भारतीयता की व्याख्याताओं को प्रदर्शित कर भारत के सांस्कृतिक प्रवाह को अक्षुण्ण रखने की व्यवस्था की गई। स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव उन बलिदान यू देशभक्तों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन का अवसर है जिनके बलिदान से ही हम स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में यथोचित स्थान पाने की दिशा में बढ़ रहे हैं। अनाम वीरा चर्चा से बाहर रही घटनाओं संस्थाओं स्थानों जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन को दिशा दी से मुख्यधारा को परिचित कराना होगा ताकि आने वाली पीढ़ियां जान सके कि आज सहज उपलब्ध स्वतंत्रता के पीछे पीढ़ियों की साधना राष्ट्रर्चन के लिए शताब्दियों तक वही अश्रु श्वेद और शोणित का प्रवाह है।

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