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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्ववनांचल साल्हेवारा रामपुर बकरकट्टा क्षेत्र में धुमधाम से मनाया गया ।

संवाददाता साल्हेवारा : कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव पर्व भारतीय संस्कृति का पर्व है । द्वापरयुग में मथुरा के राजा कंश अपने होने वाले देवकी के आठवें पुत्र को अपने मृत्यु के भय से मारने वाले थे लेकिन कंश राजा की अधर्म पर धर्म की जीत हो गई । कंश अपने बहन देवकी को कारागार में डाल कर पहरेदारो की सूरक्षा में कैद कर रखा था । भाद्रपद शुक्ल मास की अष्टमी को मध्यरात्रि कारागर में देवकी ने कृष्ण को जन्म दिया । कृष्ण के जन्म लेते ही समस्त वातावरण अंधकारमय हो गया बादल गरजने लगा बिजली तड़कने लगी घोर घटा छा गई मूसलाधार बारिश होने लगी सन्नाटा छा गया । पहरेदारो को नींद आ गई कारागार के सभी दरवाजे खुल गये ।देवकी नंदबाबा की बेड़ी खुल गयी ।दोनो अवसर देखकर बिना देर किये कंश की क्रुरता से कृष्ण को बचाने एक टोकरी में सुरक्षित सर पर रखकर मथुरा से गोकुल जाने निकल पड़े बीच में जमुना जी में किलोरे मारती बाढ बह रही थी ।
ईश्वर की लीला महान उतने अंधेरी रात में बिजली चमकती राह दिखाती नंदबाबा टोकरी में भगवान कृष्ण को लिये जमुना जी में घुस गये जमुना जी ने रास्ता दे दिया । गोकुल पहुंच कर यशोदा के पास सुला दिया और रातो रात मथुरा कारागार में बंद हो गये सभी दरवाजे किले बंद हो गये पहरेदारों की नींद खुली सब सामान्य हो गया किसी को कुछ भनक भी ना लगी ऐसी कष्ट मय कृष्ण भगवान का जन्म हुआ था ।

जो कंश कौरव को नाश कर पांच पांडवों के साथ धर्म की जीत हुई ।जो द्वापर युग में बाललीला रासलीला कर गोप गोपीकाओं को मधुर मुरली की धुन में मोह लिये । कृष्ण की बंशी जब बजती थी गायें मंत्रमुग्ध हो जाया करती थी ।राधा मीरा रुक्मिणी कृष्ण की दीवानी थी बालमित्र सुदामा सखा को निहाल कर दिया ।
आज कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव भगवान कन्हैया की याद में भारतीय संस्कृति के आधार पर पुरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है । जन्माष्टमी के दुसरे दिन गोंविदा मटका फोड़ का भव्य आयोजन करते हैं । कृष्ण यदुवंशी थे यादव समाज बड़े धुमधाम से भगवान कृष्ण के प्रति स्नेह भाव रखते हूये उन्हें अपना आदर्श मानकर पुजा अराधना करते हैं ।ऐसे ही जन्माष्टमी का महापर्व वनांचल क्षेत्र साल्हेवारा रामपुर बकरकट्टा में धुमधाम से मनाया गया ।

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