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पंडरिया विधानसभा में करोड़ों के विकास के दावों के बीच जामुनपानी के आदिवासी बूंद-बूंद पानी को मोहताज!

जल जीवन मिशन की टंकी बनी, फिर भी नहीं मिला पानी; हैंडपंप खराब होने से नदी-नालों का पानी पीने को मजबूर ग्रामीण

जामुनपानी/कवर्धा। पंडरिया विधानसभा क्षेत्र में करोड़ों रुपये के विकास कार्यों और योजनाओं के दावों के बीच आश्रित ग्राम जामुनपानी के आदिवासी ग्रामीण पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं। गांव की स्थिति ऐसी है कि लोगों के सामने जीवन की सबसे बुनियादी जरूरत स्वच्छ पेयजल का संकट खड़ा हो गया है। सवाल यह है कि जब ग्रामीणों को पीने के लिए पानी तक उपलब्ध नहीं हो रहा, तो विकास योजनाओं का लाभ आखिर किसे मिल रहा है?

ग्रामीणों के अनुसार, गांव में पीने के पानी का एकमात्र सहारा हैंडपंप था, लेकिन ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कर्मचारी द्वारा हैंडपंप को खराब कर दिए जाने के बाद पानी का यह साधन भी बंद हो गया। अब हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों को मजबूरी में नदी-नालों का पानी पीकर गुजारा करना पड़ रहा है। यह स्थिति ग्रामीणों की परेशानी और जिम्मेदार विभाग की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

सबसे बड़ा सवाल जल जीवन मिशन को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि योजना के तहत पानी की टंकी का निर्माण तो कराया गया, लेकिन आज तक उसमें से एक बूंद पानी भी उन्हें नसीब नहीं हुआ। जब गांव में पानी की आपूर्ति ही नहीं हो रही, तो ऐसी योजना का क्या औचित्य, जो जरूरत के समय ग्रामीणों के काम ही न आए?

एक ओर विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जामुनपानी के आदिवासी परिवार पीने के पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों की पीड़ा है कि उन्हें दिखावे के विकास से अधिक जीवन बचाने के लिए पानी की आवश्यकता है। स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना बुनियादी जरूरत है, कोई एहसान नहीं।

ग्रामीणों की दो टूक—हमें करोड़ों का स्वागत नहीं, जीने के लिए पानी चाहिए!

ग्रामीणों ने मांग की है कि खराब हैंडपंप को तत्काल सुधारा जाए, जल जीवन मिशन के तहत बनी पानी की टंकी और पाइपलाइन की स्थिति की जांच की जाए तथा गांव में नियमित स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

अब सवाल संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों से है—जामुनपानी के ग्रामीणों को पीने का पानी कब मिलेगा? क्या ग्रामीणों की इस गंभीर समस्या पर कोई ठोस कार्रवाई होगी, या आदिवासी परिवार इसी तरह बूंद-बूंद पानी के लिए तरसते रहेंगे?

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