नामी कंपनियों के घी के नमूने जांच में फेल, खाद्य मंत्री बताएं कार्रवाई क्यों नहीं हुई? – कांग्रेस

देवभोग, अमूल, वचन सहित 12 कंपनियों के घी में लेड की मात्रा तय मानक से अधिक, सरकार मौन क्यों? त्योहारों में जनता की सेहत से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
रायपुर। प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि खाद्य मंत्री दयालदास बघेल प्रदेश की जनता को बताएं कि देवभोग, अमूल, वचन, प्योर काऊ घी, देशी घी धौलपुर, कीर्ति गोल्ड, वास्तु एगमार्क सहित 12 नामी कंपनियों के घी के नमूने जांच में फेल होने के बावजूद अब तक क्यों कार्रवाई नहीं की गई? यदि जांच रिपोर्ट में घी के नमूनों में लेड की मात्रा निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई है, तो संबंधित कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने में देरी क्यों हो रही है? सरकार आखिर किसका इंतजार कर रही है?
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि त्योहारों के समय जनता बाजार में उपलब्ध नामी ब्रांडों के घी पर भरोसा करके खरीदारी करती है। ऐसे में घी की गुणवत्ता जांच में घी के नमूने अमानक पाए गए हैं, जनता के स्वास्थ्य से जुड़े मामले में किसी भी कंपनी को उसके नाम, प्रतिष्ठा या रसूख के आधार पर राहत देना गलत है। देवभोग घी में लेड की मात्रा लगभग 0.035 मिलीग्राम, अमूल में 0.037 मिलीग्राम, देशी घी धौलपुर में 0.043 मिलीग्राम, वचन में 0.161 मिलीग्राम, कीर्ति गोल्ड में 0.192 मिलीग्राम और वास्तु एग मार्क में 0.154 मिलीग्राम बताई जा रही है।
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि लेड जैसे भारी धातु का अधिक मात्रा में शरीर में प्रवेश स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इसके लगातार संपर्क में आने से किडनी, तंत्रिका तंत्र और अन्य अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए खाद्य पदार्थों में इसकी मौजूदगी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। सरकार की प्राथमिकता कंपनियों के व्यावसायिक हितों की रक्षा करना नहीं, बल्कि आम जनता को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना होना चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि खाद्य विभाग की जिम्मेदारी केवल नमूने लेकर जांच कराने तक सीमित नहीं है। यदि कोई उत्पाद निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतरता, तो रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई करना भी विभाग का दायित्व है। सरकार स्पष्ट करे कि संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी किए गए या नहीं, बाजार में उपलब्ध संदिग्ध बैचों की बिक्री रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए और दोषी पाए जाने पर कंपनियों के खिलाफ क्या दंडात्मक कार्रवाई की गई। जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद भी यदि बाजार में संबंधित उत्पाद बिकते रहते हैं, तो खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच के लिए पर्याप्त और आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। यदि नमूनों को जांच के लिए दूसरे राज्यों में भेजना पड़ता है, तो इससे रिपोर्ट आने में देरी की समस्या पैदा हो सकती है। सरकार को राज्य में आधुनिक खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं की क्षमता बढ़ानी चाहिए, ताकि मिलावट और अमानक खाद्य पदार्थों की समयबद्ध जांच हो सके और रिपोर्ट आने तक उपभोक्ताओं को संभावित जोखिम से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

