छुईखदान – जल संसाधन विभाग को झूठे शिकायत के दम पर बदनाम करने की साजिश

AP न्यूज विश्वराज ताम्रकार जिला ब्यूरो केसीजी
मामला जल संसाधन संभाग छुईखदान का अपने ही विभाग के खिलाफ सेवानिवृत सहायक वर्ग 3 का एक लिपिक उपादान भुगतान एवं ग्रेजुएट भुगतान के संबंध में निराकरण हेतु राशि लेनदेन का आरोप लगाया था । जिसका जवाब कार्यपालन अभियंता बी.आर. मरकाम ने सभी आरोपों का जवाब देते हुए कहा
किसी भी अधिकारी/कर्मचारी के विरूद्ध कोई प्रकरण नही शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत के साथ तथ्य प्रस्तुत नही उच्च कार्यालय द्वारा नियमित निरिक्षण तथ्यहीन और भ्रामक प्रचार
छुईखदान- गत दिनो जल संसाधन संभाग छुईखदान से सेवानिवृत्त कर्मचारी द्वारा अपने पूर्व पदस्थ कार्यालय एवं सहकर्मीयों सहित विभिन्न अधिकारियो कर्मचारियो पर लेनदेन, सांठगांठ, भ्रष्टाचार आदि आदि का आरोप लगाते हुए शिकायत प्रस्तुत की गई,तदुपरांत मामला मिडीया आदि के माध्यम से आम लोगो तक पहुचा, परन्तु उक्त आरोप, शिकवा-शिकायत पत्र, केवल एक झूठा लिखित आलेख के अलावा कुछ और अधिक नही दिखता है,अर्थात प्रार्थी की ओर से अपने शिकायत के पक्ष मे ऐसा कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नही किया गया जिससे यह स्पष्ट हो कि शिकायतकर्ता के आरोप सच के करीब है, और मामला जांच के योग्य है,यहां यह भी स्पष्ट रूप से पता चला है कि शिकायतकर्ता अपने जिन कार्यालयीन साथी कर्मचारियो की कार्य कुशलता,और क्षमता ,योग्यता पर आरोप पत्यारोप शिकायत दर्ज कराए है उनके साथ वे वर्षो तक एक ही छत और एक ही कक्ष मे साथ काम कर चुके है,यदि वे साथी कर्मचारी गण, भ्रष्ट,है तो अपने कार्यकाल के दौरान ही विषय की जानकारी उच्च अधिकारियो को देनी थी,या वे सुखदुख केसाथी अचानक से दिनांक 31/10/2020 शाम पांच बजे के ठीक बाद गलत कैसे हो गए? या कल तक जिन पदो, जवाबदारियो का निर्वहन वे कर रहे थे तब तक सब ठीक ही था,अचानक शिकायत कर्ता के सेवानिवृत्त होने के साथ ही सब कुछ भ्रष्ट कैसे हो गया,यदि ऐसा ही था तो सेवानिवृत्त के चार साल बाद शिकायत क्यों?सेवाकाल या सेवानिवृत्त के दिन ही शिकायत क्यो नही की गई,निर्माण कार्यो की स्वीकृति,प्रकाशन, निविदा,उच्च अघिकारियों के मार्गदर्शन, निर्देशन,समय-समय पर निरिक्षण का कोई महत्व नही?किसी भी कर्मचारी द्वारा आज तक कोई शिक़ायत नही किया जाना क्या कोई महात्व नही रखता?ये सब ऐसे सवाल है जिसका जवाब आज इस गरीब पिछड़े,अभावग्रस्त क्षेत्र मे जीवन दान के रूप मे आई पिपरिया जलाशय परियोजना (छिदारी बांध) मांगती है, अपने,यहां के अधिकारियो/कर्मचारियो द्वारा क्षेत्र के सिचाई सुविधाओ के विस्तार के लिए पूरी ईमानदारी और लगन से सतत् सेवा जारी है।
(न 500 करोड का आबंटन,न भ्रष्टाचार, समय-समय पर निरिक्षण)
उक्त संबंध मे प्रयास किए जाने पर पता चला है कि वर्ष 2023-24 से लेकर 2025-26 तक इस प्रकार का कोई भी आबंटन इस कार्यालय को प्राप्त नही हुआ है,जबकि विभाग की ओर से विभिन्न संभावित योजनाओ, का प्राक्कलन, प्रतिवेदन,नक्शा, मौके पर स्थल निरिक्षण, का कार्य विभाग को अनुभवी अधिकारियो कर्मचारियो द्वारा मिलकर किया जाता है,और उच्च अधिकारियों(मुख्य अभियंता (मगोक)अधीक्षण अभियंता(शिवनाथ मंडल दुर्ग) के द्वारा समय समय पर मौके पर कार्यो के संपादन,गुणवत्ता की प्रत्यक्ष जांच किया जाता है,आवश्यक मार्गदर्शन सतत् किया जाता है,जहां तक 500 करोड की स्वीकृति का सवाल है तो पता चला है कि सन् 2023 से लेकर आज तक किसी भी मद मै ,शिकायत मे उल्लेखित राशि की स्वीकृति इस संभाग को प्राप्त नही होना बताया गया है जिससे यह स्पष्ट होता है कि शिकायत कर्ता के द्वारा बिना कोई तथ्यात्मक जानकारी संलग्न किए निराधार शिक़ायत करके जल संसाधन विभाग और अधिकारियो कर्मचारियो की प्रतिष्ठा धूमिल की गई।
(वार्षिक मरम्मत,शासकीय यात्रा राशि का सदुपयोग)
जानकारी के मुताबिक विभिन्न योजनाओं, शासकीय भवनो के वार्षिक मरम्मत, तथा अधिकारियो द्वारा विभाग द्वारा संचालित निर्मित, / निर्माणाधीन योजनाओ की सतत् निगरानी हेतु शासन हित मे शासन द्वारा उपलब्ध वाहनो का उपयोग किया जाता रहा है,नीजी वाहनो का उपयोग नही किया गया है साथ ही निर्मित योजनाओ भवनो आदि का वार्षिक मरम्मत हेतु प्राप्त स्वीकृति को पूर्ण रूप से संबंधित योजना मे खर्च किया जाता है जिसको उच्च कार्यालय एवं अधिकारियो द्वारा मौका निरिक्षण पश्चात प्रमाणित भी किया जाता है तथा आवश्यकता पड़ने पर दिशानिर्देश भी दिया जाता है, उक्त मामले मे भी शिकायत के साथ प्रमाणित साक्ष्य प्रस्तुत नही किया जाना शिकायत को झूठा साबित करता है,
किसी भी अधिकारी/कर्मचारी का राजनैतिक पृष्भूमि/संबंध नही
जबकि यह भी स्पष्ट है कि शासन के नियमो के तहत एक शासकीय अधिकारी/कर्मचारी के लिए उनके समक्ष आने वाला हर प्रार्थी आमजन ही होता, उनके आवेदन पत्र आदि के आधार पर सभी के साथ समान व्यवहार करते हुए निष्पक्ष होकर यथासंभव निराकरण किया जाता है,ऐसे मे बिना प्रमाण के पदस्थ अधिकारियो पर संबंधों का आरोप प्रथम दृष्टया निराधार दिखाई दे रहा है।
सभी कार्य गुणवत्तापूर्ण
प्राप्त जानकारी के मुताबिक जल संसाधन संभाग छुईखदान के अंतर्गत निर्मित तथा निर्माणाधीन योजनाओं के प्रारंभ से पूर्व उपयोग मे आने वाले कच्चे माल, सहित अन्य उपयोगी वस्तुओं की गुणवत्ता की जांच अनुसंधान अधिकारी,केन्द्रीय मिट्टी एवं पदार्थ प्रयोग शाला रायपुर द्वारा किया जाकर, प्रमाणित कर अनुमति प्राप्त कर किया जाता जाना बताया गया है साथ ही उच्च अधिकारियो जैसे मुख्य अभियंता,अधीक्षण अभियंताओ का सतत् मौका निरिक्षण के प्रमाण स्पष्ट है कि कार्यो पर सतत् और परत दर परत निगरानी है इन आधारो से स्पष्ट होता है कि निर्माणाधीन कार्यो की गुणवत्ता से कोई समझौता नही किया गया है।
शासकीय कार्य के लिए कोई रकम की मांग नही
गत दिनो शिकायत कर्ता की ओर से उनके भुगतान के एवज मे रकम की मांग का आरोप व शिकायत किया गया है, ये वही शिकायत कर्ता है जो कभी जल संसाधन संभाग छुईखदान मे उसी पद और जवाबदरी पर कार्यरत थे,तब तक कोई शिक़ायत नही थी, आज रिटायर्मेंट के पांच साल बाद उनको अपने ही साथी कर्मचारी गण भ्रष्ट नजर आने लगे,यह हजम होने के लायक विषय नजर नही आता है,बिना साक्ष्य या प्रमाण के किसी भी शासकीय सेवक पर निराधार व झूठा आरोप उसकी छवि ख़राब करती है मान सम्मान की हानि करती है,छुईखदान स्थित केवल जल संसाधन ही नही नियमानुकूल राज्य के किसी भी शासकीय कार्यालय, अधिकारीयो, कर्मचारियो द्वारा अपने दायित्व के निर्वहन के बदले किसी प्रकार के रकम की मांग आवेदक या पक्षकार से नही की जाती है।
(क्या है मामला?)
मामला यहां से शुरूआत होता है जब इसी विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी गण यथा ओम प्रकाश जंघेल (अमीन),रूखूमलाल देशमुख तथा (सेवानिवृत्त सहायक वर्ग तीन) के द्वारा इस विभाग मे अपने दैनिक वेतन भोगी कार्यकाल का उपादान प्रदान किए जाने हेतु उपादान भुगतान अधिनियम 1972 के तहत माननीय श्रम पदाधिकारी, न्यायालय नियंत्रण प्राधिकारी उपादान भुगतान, राजनांदगांव के समक्ष वाद संस्थित कर उपादान राशि प्रदान किए जाने का अनुरोध किया गया,जिस पर विचारोपरांत माननीय न्यायालय द्वारा वादीगणों के पक्ष मे निर्णय देते हुए उपादान की निर्धारित राशि प्रदान किए जाने का आदेश किया गया,जिसके पालन मे जल संसाधन संभाग छुईखदान द्वारा वादी क्रमशः ओमप्रकाश जंघेल व रूखूमलाल देशमुख को न्यायालय द्वारा आदेशित राशि का भुगतान कर दिया गया,यहां यह बताना आवश्यक है कि इस पूरे मामले मे उक्त दोनो वादियो की ओर से विभाग, अधिकारीगण, कर्मचारी गणो के कार्य प्रणाली पर अभी तक कोई आरोप-प्रत्यारोप या विपरित टीप्पणी नही किया गया है,परन्तु वादी के पक्ष मे आदेशित राशि 349769/-रूपए मे से 55860/-रूपए का भुगतान पूर्व से ही शिकायत कर्ता के दैनिक वेतन भोगी कार्यकाल का विभागीय बिल क्रमांक 301 दिनांक 07 सितंबर 2021 के द्वारा को किया जा चुका है,जिसकी जानकारी वादी/शिकायतकर्ता द्वारा न्यायालय को शायद नही दिया गया था, इधर माननीय न्यायालय द्वारा प्रकरण क्रमांक 33/पी जी ए/आर जे, आदेश दिनांक 13/6/2025 के माध्यम से राशि 349769/- रूपए वादी को प्रदान किए जाने का आदेश किया गया,न्यायालय के आदेश व दैनिक वेतन भोगी कार्यकाल की,भुगतान किए गए उपादान राशि मे अंतर की राशि का बगैर न्यायालयीन संशोधित आदेश के भुगतान उचित नही मानते हुए कार्यालय जल संसाधन संभाग छुईखदान के ज्ञापन क्रमांक 3134/न्या.प्र./उपादान, छुईखदान दिनांक 18/07/2025एवं ज्ञापन क्रमांक 3630/,न्या.प्र. /उपादान, छुईखदान दिनांक 25/08/2025 को पत्र के माध्यम से अवगत कराया जाना स्पष्ट हो चुका है जिसके बाद भी वादी/शिकायत कर्ता की ओर से संशोधित आदेश प्रस्तुत किया जाना विभाग को अपेक्षित है,इधर मामले मे वादी/शिक़ायत कर्ता की ओर से पत्र का जवाब भी अपेक्षित है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मामले मे विभाग नियमों के अधीन रहकर आज भी भुगतान के लिए तैयार है परन्तु वादी की ओर से अपेक्षित सहयोग करते हुए संशोधित न्यायालयीन आदेश प्रस्तुत किए जाने की स्थिति मे ही सब संभव होगा।
इधर लोगो और सुधि पाठको की ओर से नगर के एकमात्र बड़ा कार्यालय जो लगभग 1956 के आसपास की स्थापना बताई जाती है, के ऊपर आज तक इस प्रकार का शिकायती आरोप कभी नही लगा है, जबकि जल संसाधन संभाग छुईखदान का एक गौरवशाली इतिहास रहा है, जो कार्यालय भरे अकाल की स्थिति मे भी अपने किसानो को पालने के साथ ही आम निस्तारण की व्यवस्था देती आ रही है,जहां के अधिकारीयो की ईमानदारी, कार्यकुशलता का उदाहरण पूरे क्षेत्र और अन्य विभागों मे दिया जाता है उस पर भ्रष्टाचार जैसा स्तरहीन आरोप लोगो के गले नही उतर रहा है लोगो ने कहा है कि दोषियों पर जरूर कार्यवाही होनी चाहिए परन्तु एक आधारहीन, तथ्यहीन शिकायती कागज के आधार पर नही, साक्ष्य और तथ्य के आधार पर, लोगो ने यह भी कहा कि यदि आरोप सिद्ध नही होने की स्थिति मे शिकायतकर्ता के विरूद्ध मानहानि का प्रकरण पंजीबद्ध करने का अधिकार द्वितीय पक्ष के पास सुरक्षित होना चाहिए ताकि किसी को भी दूसरे के मान सम्मान ईमान को ठेस भविष्य मे नही पहुचाया जा सके,फिलहाल समाचार का उद्देश्य,प्रदेश के मुख्यमंत्री को लिखे आधारहीन तथ्यहीन, शिकायत पत्र के बाद प्रशासनिक, व जनमानस मे हुए हडकंप व जल संसाधन संभाग छुईखदान के सम्मान को लगे ठेस से पूर्व सच्चाई से पर्दा उठाना है कि किसी भी प्रकार के भ्रामक लेख को ही सच मानने से पूर्व तथ्यो की जांच अवश्य कर ले ।
