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सफलता की कहानी – जैविक खेती से आत्मनिर्भर बनीं “लखपति दीदी” – राधा बाई वर्मा

AP न्यूज विश्वराज ताम्रकार जिला ब्यूरो चीफ केसीजी

स्व-सहायता समूह से जुड़कर बदली राधा वर्मा की जिंदगी

कृषि सखी बनने से मिली जैविक खेती की नई दिशा

विविध आजीविका गतिविधियों से बढ़ी आय

किसानों को प्रशिक्षण देकर बनीं क्षेत्र की प्रेरणा

खैरागढ़ : खैरागढ़ विकासखंड के ग्राम खमतराई की निवासी राधा बाई वर्मा आज अपने परिश्रम, लगन और नवाचार के दम पर क्षेत्र में “लखपति दीदी” के रूप में पहचान बना चुकी हैं। कभी सीमित संसाधनों के कारण आर्थिक कठिनाइयों का सामना करने वाली राधा वर्मा आज जैविक खेती, सब्जी उत्पादन, मछली पालन और जैविक कीटनाशक निर्माण जैसे विभिन्न आजीविका गतिविधियों के माध्यम से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।

संघर्ष से सफलता की ओर

स्व-सहायता समूह से जुड़ने से पहले राधा वर्मा का परिवार मुख्य रूप से पारंपरिक धान की खेती पर निर्भर था। सीमित आय के कारण परिवार का भरण-पोषण करना भी मुश्किल हो जाता था। वर्ष 2017 में उन्होंने ओम सांई स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपने जीवन में बदलाव की शुरुआत की। समूह से ऋण लेकर उन्होंने खेती को आधुनिक और टिकाऊ बनाने का संकल्प लिया।

कृषि सखी बनकर मिली नई दिशा

इसी वर्ष उनका चयन कृषि सखी के रूप में हुआ। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने जैविक खेती के महत्व और इसके लाभों को समझा। इसके बाद उन्होंने जैविक खाद और जैविक कीटनाशक बनाना शुरू किया तथा अपनी खेती में इनका उपयोग प्रारंभ किया। धीरे-धीरे उन्होंने पूरी तरह जैविक खेती अपनाई और सब्जी उत्पादन भी शुरू किया।

आजीविका के विविध स्रोत

राधा वर्मा ने खेती को ही अपनी सफलता का आधार बनाया। उन्होंने सब्जी उत्पादन, धान की खेती, मछली पालन और जैविक कीटनाशक निर्माण जैसे विभिन्न कार्यों को अपनाया। वे जैविक कीटनाशक बनाकर कृषि विभाग तथा आसपास के किसानों को भी उपलब्ध कराती हैं।

प्रशिक्षण देकर बन रही हैं प्रेरणा

राधा वर्मा केवल स्वयं ही आगे नहीं बढ़ीं, बल्कि उन्होंने आसपास के गांवों के किसानों को भी जैविक खेती के लिए प्रेरित किया। वे कृषि सखी के साथ-साथ मास्टर ट्रेनर के रूप में किसानों को जैविक खेती का प्रशिक्षण दे रही हैं। वर्ष 2025 से वे कृषि विभाग के साथ मास्टर ट्रेनर के रूप में भी जुड़ी हुई हैं, जिसके लिए उन्हें प्रतिदिन 500 रुपये का मानदेय प्राप्त होता है।

वार्षिक आय

उनकी वार्षिक आय विभिन्न गतिविधियों से इस प्रकार है –सब्जी खेती से लगभग 3 लाख रुपये, धान की खेती से लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये, मछली पालन से लगभग 18 हजार रुपये, जैविक दवाइयों के विक्रय से लगभग 12 हजार रुपये, कृषि सखी के रूप में लगभग 24 हजार रुपये तथा मास्टर ट्रेनर के रूप में लगभग 12 हजार रुपये की आय प्राप्त होती है।
इस प्रकार उनकी कुल वार्षिक आय लगभग 5 लाख 16 हजार रुपये तक पहुंच गई है, जिससे वे लखपति दीदी के रूप में स्थापित हो चुकी हैं।

उपलब्धि और सम्मान

जैविक खेती के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्य को देखते हुए 9 नवम्बर 2025 को उन्हें राजभवन, रायपुर में राज्यपाल से मिलने का अवसर प्राप्त हुआ। इस अवसर पर उन्हें 5000 रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई।

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