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देवारीभाठ में ‘निर्यात जागरूकता कार्यक्रम’ आयोजित, किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने पर जोर

AP न्यूज विश्वराज ताम्रकार जिला ब्यूरो चीफ केसीजी

खैरागढ़ :
जिले के डीपीआरसी भवन, ग्राम देवारीभाठ में 16 फरवरी 2026 को कृषि उत्पादों के निर्यात अवसरों पर एक महत्वपूर्ण ‘निर्यात जागरूकता कार्यक्रम’ आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर द्वारा कृषि विभाग, जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र (डीटीआईसी-केसीजी) तथा मां भवानी बहुउद्देशीय किसान उत्पादक समिति के सहयोग से किया गया।

कार्यक्रम में जिले के विभिन्न किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के सदस्य, मिलर्स, प्रोसेसर्स एवं क्षेत्र के प्रगतिशील किसान शामिल हुए। लगभग 55 प्रतिभागियों ने सहभागिता कर अनाज, बाजरा, ताजे फल एवं सब्जियों के निर्यात संबंधी संभावनाओं की जानकारी प्राप्त की।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषि निर्यात क्षमता को बढ़ाना तथा किसानों को गुणवत्ता मानकों, पैकेजिंग, प्रमाणन और निर्यात से जुड़े आवश्यक दस्तावेजों के संबंध में जागरूक करना था। विशेषज्ञों ने एफपीओ के माध्यम से सामूहिक उत्पादन को बढ़ावा देने, निर्यात गुणवत्ता के अनुरूप प्रसंस्करण, पैकेजिंग एवं मूल्यवर्धन पर विशेष बल दिया। साथ ही जैविक उत्पादों के निर्यात हेतु एनपीओपी प्रमाणन की प्रक्रिया की भी विस्तृत जानकारी दी गई।

एपीडा के सलाहकार आनंद कुमार ने किसानों को अपने उत्पादों के नमूने परीक्षण के लिए भेजने, गुणवत्ता मानकों का पालन करने तथा पैकेजिंग पर आवश्यक लेबलिंग के माध्यम से पोषण संबंधी जानकारी प्रदर्शित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए गुणवत्ता और प्रमाणन अत्यंत आवश्यक है।

जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के सहायक प्रबंधक अर्जुन साहू ने राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 एवं प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की जानकारी देते हुए बताया कि एफपीओ एवं समूह आधारित इकाइयों को 3 करोड़ रुपए तक का अनुदान प्राप्त हो सकता है, जिससे प्रसंस्करण एवं निर्यात अवसंरचना को मजबूत किया जा सके।

कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का समाधान विशेषज्ञों द्वारा किया गया। इस पहल से जिले में एफपीओ आधारित निर्यात नियोजन को सुदृढ़ करने, उत्पाद गुणवत्ता में सुधार लाने तथा किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि करने की दिशा में सकारात्मक परिणाम की अपेक्षा व्यक्त की गई।

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